• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • शारदीय नवरात्रि
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • रायपुर

छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन के 1100 करोड़ रुपये अटकने से गांवों के नल सूखे

Jal Jeevan Mission: अधिकांश योजनाओं में जलशोधन संयंत्र, इंटेक वेल, पाइपलाइन और मुख्य जलाशयों का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन परीक्षण और जलापूर्...और पढ़ें

By Abhishek RaiEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Tue, 20 Oct 2026 08:32:34 AM (IST)Updated Date: Tue, 20 Oct 2026 08:49:14 AM (IST)
छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन के 1100 करोड़ रुपये अटकने से गांवों के नल सूखे
जल जीवन मिशन के तहत बनी पानी की टंकी।

HighLights

  1. केंद्र-राज्य की वित्तीय प्रक्रिया में पेंच, समन्वय की कमी
  2. प्रदेश के 18 जिलों के 3,234 गांवों में जलापूर्ति की जाएगी
  3. परीक्षण और जलापूर्ति शुरू करने के लिए राशि उपलब्ध नहीं

अभिषेक राय, नईदुनिया राज्य ब्यूरो, रायपुर। जल जीवन मिशन के तहत गांवों में घर-घर नल से पानी पहुंचाने की योजना भुगतान और सरकारी समन्वय के अभाव में प्रभावित हो रही है। मल्टी-विलेज योजनाओं के करीब 1,100 करोड़ का भुगतान अटकने से निर्माण एजेंसियों के सामने काम जारी रखने का संकट खड़ा हो गया है।

एक साल से संचालन एवं रखरखाव (ओएंडएम) नीति का प्रस्ताव लंबित है, जिसके अनुमोदन के बिना केंद्रीय प्रतिपूर्ति की राह अटकी हुई है। नतीजतन, कई गांवों में टंकियां और पाइपलाइन तैयार होने के बावजूद नल से जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। छत्तीसगढ़ कांट्रैक्टर एसोसिएशन का दावा है कि पंचायत और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) के बीच तालमेल की कमी और केंद्र-राज्य की वित्तीय प्रक्रिया में गतिरोध इसकी प्रमुख वजह है।


प्रदेश के कई जिलों में भूजल स्तर गिरने से गर्मी के दिनों में पेयजल का संकट गहराता है। इसे देखते हुए सतही जलस्रोतों पर आधारित 71 मल्टी-विलेज योजनाएं स्वीकृत की गई हैं। अधिकांश योजनाओं में जलशोधन संयंत्र, इंटेक वेल, पाइपलाइन और मुख्य जलाशयों का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन परीक्षण और जलापूर्ति शुरू करने के लिए राशि उपलब्ध नहीं है।

इन योजनाओं से पानी पहुंचने पर जुड़ी सिंगल-विलेज योजनाओं की तैयार टंकियों को भी जलस्रोत मिल सकेगा। मई 2026 तक जलापूर्ति शुरू करने का लक्ष्य था, लेकिन देरी के कारण आगामी गर्मी में भी ग्रामीणों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है।

प्रस्ताव की फाइल अटकी

मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन की संचालन एवं रखरखाव नीति का प्रस्ताव करीब एक साल से लंबित है। कांट्रैक्टर एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में केंद्रीय अंश नहीं मिलने पर राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से भुगतान किया था। अब 2026-27 में आगे की राशि जारी करने से पहले केंद्र से प्रतिपूर्ति मिलने की बात कही जा रही है।

इसके लिए राज्य की ओ एंड एम नीति का अनुमोदन जरूरी है। इसका प्रारूप तैयार होने के बावजूद पंचायत और पीएचई विभाग के बीच समन्वय की कमी से अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। ओडिशा, मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों में नीति लागू होने से केंद्रीय राशि मिल रही है। प्रदेश में 58 मल्टी-विलेज योजनाओं से जुड़ी एजेंसियों का दावा है कि वे अपने संसाधनों और कर्ज से 80 प्रतिशत काम पूरा कर चुकी हैं।

यह भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ में 18 जिलों के 3234 गांवों में खड़ा हुआ जल संकट!, मल्टी-विलेज योजनाओं का भुगतान अटका

जिलों के 3,234 गांवों तक पहुंचेगा पानी

मल्टी-विलेज योजनाओं के माध्यम से 18 जिलों के 3,234 गांवों में जलापूर्ति की जाएगी। इनमें रायगढ़ जिले के 396, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के 16, कोरबा के 245, जांजगीर-चांपा के 32, राजनांदगांव के 393, महासमुंद के 48, कबीरधाम के 31, गरियाबंद के नौ, बिलासपुर के 93, सूरजपुर के 413, मुंगेली के 240, दुर्ग के 201, बलौदाबाजार-भाटापारा के 192, बेमेतरा के 219, कोरिया के 292, बालोद के 148, सरगुजा के 190 और धमतरी जिले के 76 गांव शामिल हैं।

यह भी पढ़ें- जल जीवन का संकट: अमाड़ के 45 घरों में नहीं पहुंची एक बूंद भी पानी, तीन साल से शोपीस बनी सौर टंकी

अगस्त 2025 के बाद से भुगतान नहीं हुआ

नीति लागू करने आग्रह किया जा चुका है, जो अब तक नहीं हुआ है। इससे विभाग, निर्माण एजेंसियों और ग्रामीणों तीनों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। 1,100 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान लंबित होने के कारण निर्माण एजेंसियों के लिए काम जारी रखना मुश्किल हो गया है। अगस्त 2025 के बाद से भुगतान नहीं हुआ है। - बीरेश शुक्ला, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ कांट्रैक्टर एसोसिएशन

कुछ दिन पहले ही भुगतान की राशि जारी की गई

मल्टी विलेज योजनाओं की नियमित समीक्षा की जा रही है। योजना के कार्यों में आ रही कमियों और गतिरोध को दूर करने के प्रयास जारी हैं। निर्माण एजेंसियों को समय-समय पर भुगतान किया जा रहा है। कुछ दिन पहले ही भुगतान के लिए राशि जारी की गई है। -रिमिजियस एक्का, संचालक, जल जीवन मिशन