
रायपुर, निप्र। एक डॉक्टर ने छत्तीसगढ़ी भाषा को जन-जन तक पहुंचने की जिद ठान ली है। अकेले अपने दम पर पहले छत्तीसगढ़ी शब्दकोश तैयार किया, इसके बाद छत्तीसगढ़ी कहावतों का कोश। अब एक नया प्रयोग करने जा रहे हैं, ताकि राह चलते हर किसी की जुबान पर छत्तीसगढ़ी चढ़ जाए। शुक्रवार 28 अक्टूबर से ठीक एक महीने बाद 28 नवंबर को छत्तीसगढ़ी राज्य भाषा दिवस है। इस अनूठे प्रयास पर 'नईदुनिया' खास रिपोर्ट।
पेशे से फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. गीतेश अमरोहित का नया प्रयोग है, चौराहों पर बोर्ड लगाना, इसमें छत्तीसगढ़ शब्द और भाषा से जुड़े अन्य सहायकों को लिखा जाएगा। शुरुआत पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (यूनीवर्सिटी) चौक से होने जा रही है, जिसके बाद जय स्तंभ चौक, दुर्गा कॉलेज, छत्तीसगढ़ी कॉलेज और अन्य जगहों पर बोर्ड लगेंगे। यूनिवर्सिटी चौक पर सर्वाधिक छात्र-छात्राएं एकजुट होते हैं, यहां से गुजरते हैं, इसलिए इसे चुना। डॉ. अमरोहित ने बोर्ड लगाने की तैयारी रात 9.30 बजे शुरू कर दी थी। 'नईदुनिया' को जानकारी मिली, टीम वहां पहुंची और पूरी गतिविधि को न सिर्फ कैमरे में कैद किया, बल्कि उनके विचार को समझा भी।
यूनिवर्सिटी चौक पर यहां 3 बोर्ड लगाए गए हैं, एक पर छत्तीसगढ़ी शब्द, दूसरे पर प्रशासनिक, तीसरे पर फल, सब्जी, रोजाना इस्तेमाल होने वाली घरेलू सामग्री को प्रदर्शित किया गया है। बोर्ड लगते ही लोगों की भीड़ जुटने लगी, हर कोई दिलचस्पी से इन्हें पढ़ रहा था। कुछ तो इन्हें नोट भी करते दिखे। इसे अपनी तरह का अलहदा प्रयोग माना जा रहा है। डॉ. अमरोहित का कहना है कि हम किसी के कुछ करने का इंतजार क्यों करें, शुरुआत तो करें, नतीजा चाहे जो हो।
रोजाना 50 शब्द होंगे बोर्ड पर- बोर्ड में छत्तीसगढ़ी शब्द के साथ छत्तीसगढ़ी प्रशासनिक शब्दों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। मुहावरा, कहावत, पहेलियां भी लिखी होंगी।
छत्तीसगढ़ी का बढ़ा महत्व
पीएससी द्वारा ली जा रही परीक्षाओं में 50 नंबर के सवाल छत्तीसगढ़ी भाषा से जुड़े होते हैं। पं. रविशंकर विश्वविद्यालय, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में एमए छत्तीसगढ़ी कोर्स संचालित हो रहा है। वहीं पं. सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय बिलासपुर में डिप्लोमा इन छत्तीसगढ़ी का पाठ्यक्रम है। प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों में हिंदी की किताब में छत्तीसगढ़ी के पाठ शामिल हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ी अभी तक केंद्र की आठवीं अनुसूचि में शामिल नहीं हो पाई है।
आयोग अपनी तरफ से प्रयासरत है, लेकिन दुख इस बात का है कि छत्तीसगढ़ी बोलने वाले तक आवेदन हिंदी-अंग्रेजी में करते हैं, बोलते नहीं। डॉ. अमरोहित के प्रयास का स्वागत करते हैं, आयोग उनके साथ है। -सुरेंद्र दुबे, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य भाषा आयोग