
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। कोल लेवी घोटाले की जांच में कथित अवैध वसूली का दायरा कोयला परिवहन से आगे बढ़कर आयरन पैलेट और लौह अयस्क तक पहुंच गया है। ईओडब्ल्यू के छठे पूरक चालान में तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म और आइएएस अधिकारी जयप्रकाश मौर्य की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, जब्त डायरी में मौर्य को करीब एक करोड़ रुपये दिए जाने का उल्लेख मिला है। जयप्रकाश निलंबित आइएएस रानू साहू के पति हैं।
जांच में आयरन पैलेट परिवहन में 100 रुपये प्रति टन और कोयला परिवहन में 25 रुपये प्रति टन वसूली का राजफाश हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, कांग्रेस शासनकाल (2018-2023) में राज्य में करीब 19.05 करोड़ टन लौह अयस्क का उत्पादन हुआ था। इस पूरी मात्रा पर 100 रुपये प्रति टन की दर को लागू किया जाए, तो यह राशि करीब 1,905 करोड़ रुपये बैठती है।
इसी अवधि में 81 करोड़ टन कोयले का उत्पादन हुआ था। 25 रुपये प्रति टन के हिसाब से 2,025 करोड़ की वसूली का अनुमान है। हालांकि, यह एक गणितीय आकलन है और इसका यह अर्थ नहीं है कि ईओडब्ल्यू ने पूरे उत्पादन पर वसूली सिद्ध कर दी है। वर्तमान में ईओडब्ल्यू ने इस घोटाले का कुल आकलन लगभग 500 करोड़ रुपये किया है।
ईओडब्ल्यू के अनुसार, 14 दिसंबर 2021 को लौह अयस्क और आयरन पैलेट परिवहन के लिए अभिवहन पास की व्यवस्था का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। पांच जनवरी 2022 के आदेश के बाद सड़क और रेल मार्ग से परिवहन की व्यवस्था लागू हुई। आरोप है कि इसी दौरान मौर्य ने पैलेट उद्योगपतियों की बैठक लेकर सूर्यकांत तिवारी या उसके लोगों को 100 रुपये प्रति टन देने के निर्देश दिए।
आरोप पत्र में मौर्य से जुड़ी दो डायरी प्रविष्टियों का भी उल्लेख है। ईओडब्ल्यू का दावा है कि जांच में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने, खनिज विभाग से जुड़े मामलों में उसके संपर्क में रहने और कथित वसूली की व्यवस्था में सहयोग करने के तथ्य मिले हैं। तत्कालीन खनिज अधिकारी अनुराग दीवान के मोबाइल से आदेश से जुड़े डिजिटल साक्ष्य मिलने की बात भी कही गई है।
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