
अनिमेष पाल, नईदुनिया, रायपुर। नईदुनिया फोरम में मंगलवार को "कृषि में सहकारिता और पर्यावरणीय विकास–दिशा और दृष्टि" विषय पर चर्चा हुई। यह चर्चा छत्तीसगढ़ के बस्तर को विकसित संभाग बनाने से लेकर प्रदेश में समग्र कृषि विकास तक फैली।
सत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसानों की आय, खेती का रकबा घटने, किसानों की आत्महत्या, सिंचाई सुविधाओं के विकास और प्राकृतिक संसाधनों के भविष्य पर गंभीर मंथन हुआ। सहकारिता तथा वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप और पूर्व मंत्री धनेंद्र साहू ने टिकाऊ और संसाधन संरक्षण पर आधारित खेती के विकास की आवश्यकता पर जोर दिया।

फोरम में बताया गया कि छत्तीसगढ़ की 47.8 लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है, जिसमें लगभग 37 लाख किसान कृषि कार्य से जुड़े हैं। सरकार हर वर्ष 25 लाख से अधिक पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदती है।
हालांकि, कुल कृषि क्षेत्र का केवल 23 प्रतिशत हिस्सा ही सिंचित है, जो चिंताजनक है। बदलते मौसम और अनियमित वर्षा का सीधा असर उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ रहा है, जिससे आत्महत्या के मामले बढ़े हैं।
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कृषि को गति देने के लिए प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों की भूमिका में बदलाव की आवश्यकता है। ये समितियां अब केवल ऋण वितरण तक सीमित नहीं रह सकतीं, बल्कि कृषि यंत्र बैंक, गुणवत्तापूर्ण बीज, जैविक खाद, भंडारण और विपणन का केंद्र बनेंगी।
पर्यावरण संरक्षण अब कृषि का अभिन्न हिस्सा बन गया है। जलवायु परिवर्तन के दौर में धान आधारित क्षेत्रों में फसल विविधीकरण और जल संरक्षण अनिवार्य हो गया है। बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती और वर्षा जल संचयन जैसे मॉडल टिकाऊ खेती को बढ़ावा दे सकते हैं।
राज्य सरकार सहकारिता का दायरा धान खरीदी से आगे बढ़ा रही है, विशेषकर बस्तर में दुग्ध उत्पादन नेटवर्क विकसित करने की पहल की जा रही है। यदि खेती के साथ अन्य कृषि आधारित गतिविधियां विकसित होती हैं, तो ग्रामीण रोजगार बढ़ेगा और कृषि अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

नईदुनिया फोरम की चर्चा का निष्कर्ष यही रहा कि छत्तीसगढ़ के पास उपजाऊ भूमि, सहकारिता नेटवर्क और परंपरागत कृषि ज्ञान जैसी पूंजी है। यदि इसे आधुनिक तकनीक और पर्यावरण संरक्षण के साथ जोड़ा जाए, तो छत्तीसगढ़ सहकारिता आधारित, बहुआयामी और सतत कृषि विकास का राष्ट्रीय मॉडल बन सकता है।
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बस्तर में माओवादी हिंसा की समाप्ति के बाद सरकार पर्यावरण संरक्षण संग रोजगार और विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है। बस्तर को देश का सबसे विकसित संभाग बनाने का लक्ष्य है। सड़कें, बिजली, पानी और सिंचाई सुविधाओं पर जोर दिया जा रहा है। सहकारिता से समृद्धि के लिए सुरक्षा कैंपों को विकास केंद्र में बदला जा रहा है। वहां डेयरी, कौशल उन्नयन व रोजगारपरक योजनाएं शुरु की जा रही हैं।