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नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। दीपावली और छठ पर्व पर घर जाने वाले यात्रियों की मुश्किलें कंफर्म टिकट न मिलने से काफी बढ़ गई हैं।
रायपुर रेल मंडल से उत्तरप्रदेश, बिहार, मुंबई, पुणे और दिल्ली जाने वाली प्रमुख ट्रेनों में कंफर्म टिकट मिलना बेहद मुश्किल हो गया है, जिसके चलते टिकटों की भारी मांग के कारण कई रूट्स पर 'नो-रूम' जैसे हालात बन गए हैं और लंबी वेटिंग चल रही है।
नवंबर माह में छह को धनतेरस, आठ को दीपावली (लक्ष्मी पूजा), 10 को गोवर्धन पूजा, 13 से 15 तक छठ पूजा, 20 को देवउठनी एकादशी और 21 को तुलसी विवाह जैसे प्रमुख त्योहार हैं। इन आयोजनों के चलते छठ पर्व के दौरान रायपुर रेलवे स्टेशन से उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड यानी पूर्वांचल की ओर जाने वाली ट्रेनों में सबसे ज्यादा भीड़ रहती है।
चूंकि, बड़ी संख्या में लोग इन त्योहारों पर अपने घर लौटते हैं, इसलिए इन रूट्स की लगभग सभी नियमित ट्रेनों में महीनों पहले ही वेटिंग लिस्ट लंबी हो जाती है।
पटना और बिहार रूट
रायपुर से पटना, गया और राजेंद्र नगर की ओर जाने वाली गाड़ियों में सबसे अधिक दबाव है। इस रूट पर तीन प्रमुख गाड़ियां साउथ बिहार, गोंदिया बरौनी और सारथना एक्सप्रस चलती है। इसके अलावा चालपल्ली स्पेशल ट्रेन भी पैक हो चुकी है।
ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफार्म कन्फर्म टिकट के आंकड़ों के मुताबिक, एक नवंबर से 30 नवंबर के बीच इस रूट की प्रमुख ट्रेनों में भारी भीड़ और लंबी प्रतीक्षा सूची दर्ज की जा रही है। नवंबर माह के अधिकांश दिनों में स्लीपर श्रेणी में वेटिंग लिस्ट 30 से 50 के पार पहुंच चुकी है, जबकि थर्ड एसी और सेकंड एसी में भी सीटें उपलब्ध नहीं हैं।
रायपुर से पुणे
रायपुर से पुणे जाने वाली गाड़ियों में इस पूरे अवधि के दौरान भारी भीड़ देखने को मिल रही है। इस व्यस्त मार्ग पर चलने वाली प्रमुख ट्रेनों (जैसे आजाद हिंद एक्सप्रेस और अन्य कनेक्टिंग व साप्ताहिक ट्रेनें) में स्लीपर श्रेणी से लेकर थर्ड एसी और सेकंड एसी तक में सीटें फुल हैं।
14 नवंबर को रायपुर से पुणे के लिए तीन ट्रेनें हटिया पुणे सुपरफास्ट एक्सप्रेस, आजाद हिंद और दूरंतो एक्सप्रेस हैं। तीनों में नो रूम दिखा रहा है। वहीं पूरे नवंबर माह भर लंबी वेटिंग है।
इसलिए बिगड़ती है स्थिति
रायपुर और छत्तीसगढ़ के अन्य औद्योगिक जिलों में पूर्वांचल के तमाम लोग नौकरी, व्यवसाय या पढ़ाई के सिलसिले में निवास करते हैं। छठ और दीपावली के मौके पर एक साथ भारी पलायन होने के कारण नियमित ट्रेनों की क्षमता कम पड़ जाती है, जिसके चलते रेलवे को हर साल इस रूट पर विशेष (स्पेशल) ट्रेनें चलानी पड़ती हैं, फिर भी कंफर्म टिकट मिलना बेहद मुश्किल होता है।
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