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रायपुर में SDM बदले तो प्रॉपर्टी पर बदल गया फैसला, भूदान की जमीन को मिल गई आवासीय की मंजूरी

रायपुर के फाफाडीह में भूदान की जमीन के उपयोग परिवर्तन में गड़बड़ी सामने आई है।

By Jitendra DahiyaEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Mon, 19 Oct 2026 07:56:12 AM (IST)Updated Date: Mon, 19 Oct 2026 08:09:34 AM (IST)
रायपुर में SDM बदले तो प्रॉपर्टी पर बदल गया फैसला, भूदान की जमीन को मिल गई आवासीय की मंजूरी
रायपुर में भूदान की जमीन पर राजस्व रिकॉर्ड में उलझा मामला (AI Generated Image)

HighLights

  1. 2022 में खारिज आवेदन को 2024 में मंजूरी
  2. भूदान प्रविष्टि हटाने का कोई स्पष्ट आदेश नहीं
  3. प्रीमियम के साथ 10 हजार रुपये अर्थदंड तय

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। राजधानी के फाफाडीह इलाके में भूदान की जमीन के उपयोग परिवर्तन का मामला सामने आया है। एक ही खसरे की जमीन को लेकर दो एसडीएम के दो अलग-अलग आदेशों ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर दिया है।

पहले एसडीएम ने किया था खारिज

21 जून 2022 को तत्कालीन एसडीएम देवेंद्र पटेल ने जमीन का आवासीय उपयोग बदलने से इनकार कर दिया था। प्रवीण यादव, रविन्द्र यादव और अरविन्द यादव ने खसरा नंबर 126/10 की 600 वर्गफीट जमीन के लिए आवेदन किया था। पटवारी और राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट में 2011-12 के खसरा पांचसाला रिकॉर्ड के आधार पर जमीन भूदान धारक के नाम पर दर्ज बताई गई थी। इसी आधार पर एसडीएम कोर्ट ने उपयोग परिवर्तन को अनुचित माना और केस को नस्तीबद्ध कर दिया।


दो साल बाद मिली मंजूरी

दो साल बाद इसी जमीन को मंजूरी मिल गई। 3 जून 2024 को एसडीएम नंदकुमार चौबे ने खसरा नंबर 126/10 और खसरा नंबर 126/15 की कुल 1200 वर्गफीट जमीन के उपयोग परिवर्तन का आदेश जारी कर दिया। यानी पहले जहां 600 वर्गफीट का आवेदन खारिज हुआ था, वहीं अब दोगुनी जमीन को आवासीय में बदलने की अनुमति दे दी गई।

रिकॉर्ड में क्या है झोल

पूरा मामला नियम और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़ा है। 2024 की राजस्व रिपोर्ट में जमीन को आदिवासी, शासकीय पट्टा, घास, आबादी, कोटवारी सेवा, संस्था या सीलिंग की भूमि नहीं बताया गया। लेकिन पहले दर्ज भूदान की स्थिति का क्या हुआ, इसका कोई जिक्र आदेश में नहीं है। 2024 के आदेश में भूदान की पुरानी प्रविष्टि को बदलने या खत्म करने के किसी अलग आदेश का स्पष्ट उल्लेख भी नहीं किया गया है।

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कितना लगा शुल्क

आवासीय उपयोग की मंजूरी के साथ 1,800 रुपये प्रीमियम, 10,037 रुपये सालाना पुनरीक्षित भू-राजस्व, 1,129 रुपये अधोसंरचना विकासकर, 1,129 रुपये पर्यावरण उपकर और 10 हजार रुपये अर्थदंड तय किया गया है। पैसे जमा होने के बाद संशोधित खसरा और बदला हुआ बी-1 तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

मामले की जानकारी मिली है। यदि नियम विरुद्ध जमीन के उपयोग परिवर्तन किया गया है तो संबंधित अधिकारी पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

-श्याम धावड़े, संभाग आयुक्त, रायपुर