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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 08, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

2,223 करोड़ में बनेगी गोंदिया–डोंगरगढ़ चौथी रेललाइन, मुख्यमंत्री साय ने जताया आभार

गोंदिया–डोंगरगढ़ चौथी रेललाइन परियोजना को केंद्र सरकार की ओर से मंजूरी प्रदान कर दी गई है। 84 किलोमीटर के इस परियोजना की लागत 2,223 करोड़ रुपये होगी। ...और पढ़ें

By Abhishek RaiEdited By: Roman Tiwari
Publish Date: Wed, 08 Oct 2025 03:36:56 PM (IST)Updated Date: Wed, 08 Oct 2025 03:39:58 PM (IST)
2,223 करोड़ में बनेगी गोंदिया–डोंगरगढ़ चौथी रेललाइन, मुख्यमंत्री साय ने जताया आभार
गोंदिया–डोंगरगढ़ चौथी रेललाइन को मंजूरी

HighLights

  1. योजना को पूर्ण होने से लाजिस्टिक लागत में बचत: 514 करोड़ प्रति वर्ष
  2. इस रेलमार्ग की लंबाई 84 किमी होगी जो पांच साल में बन कर तैयार होगा
  3. परियोजना की अनुमानित लागत 2,223 करोड़ है, इससे डीजल बचत होगी

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर: केंद्र सरकार ने गोंदिया–डोंगरगढ़ चौथी रेललाइन परियोजना को मंजूरी दे दी है। 84 किमी लंबी परियोजना राजनांदगांव और महाराष्ट्र के गोंदिया से होकर गुजरेगी। इस परियोजना को 2,223 करोड़ रुपये की लागत से अगले पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।

परियोजना के तहत 15 प्रमुख पुल, 123 लघु पुल, एक सुरंग, तीन रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) और 22 रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी) का निर्माण प्रस्तावित है। आकांक्षी जिला राजनांदगांव के लिए यह परियोजना यात्री सुविधाओं में सुधार के साथ स्थानीय व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर प्रदान करेगी।


परियोजना पूर्ण होने पर प्रतिवर्ष करीब 30.6 मिलियन टन अतिरिक्त माल यातायात संभव हो सकेगा। इससे रेलवे की आय में वृद्धि होगी और राज्य की औद्योगिक इकाइयों को कच्चे माल और तैयार उत्पादों के परिवहन में सुगमता मिलेगी। इसके अलावा यह परियोजना पर्यावरण के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद साबित होगी।

अनुमानित तौर पर इससे हर साल करीब 23 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, 4.6 करोड़ लीटर डीजल की बचत होगी और करीब 514 करोड़ रुपये की लाजिस्टिक लागत घटेगी। यह लाभ हर वर्ष एक करोड़ पेड़ों के बराबर कार्बन कटौती के समान है, जो सतत विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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मुख्यमंत्री साय ने जताया आभार

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल छत्तीसगढ़ के विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम है, बल्कि इस परियोजना से संपूर्ण मध्य भारत की अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा मिलेगी। नई रेललाइन के माध्यम से रायगढ़ मांड, कोरबा और इब घाटी की खदानों से कोयला परिवहन की गति बढ़ेगी, जिससे महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के थर्मल पावर प्लांटों को नियमित आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

साथ ही उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश की खनिज अर्थव्यवस्था और लाजिस्टिक तंत्र दोनों को स्थायित्व मिलेगा। यह परियोजना प्रदेश के लोगों को बेहतर आवागमन सुविधा, औद्योगिक प्रगति और पर्यावरणीय संतुलन का सशक्त आधार प्रदान करेगी।