
नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर। शहर के कन्या परिसर मार्ग स्थित प्लेस ऑफ सेफ्टी से सोमवार रात करीब 8.30 से नौ बजे के बीच फिल्मी अंदाज में छह अपचारी बालक फरार हो गए। बैरक से खाना खाने के लिए बाहर निकले बालकों ने अचानक रसोइए सुमित यादव पर गर्म दाल उड़ेल दी और ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी को कमरे में बंद कर बंधक बना लिया।
दो कर्मचारियों से झूमाझटकी कर ग्रील फैलाकर सभी दीवार फांदकर भाग निकले। भागने के दौरान दो घायल हो गए। घटना के समय रसोइए के साथ दो सुरक्षा कर्मचारी और हाउस कीपर मौजूद थे। गर्म दाल पड़ने से रसोइया बुरी तरह झुलस गया, जिसे मिशन अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सूचना मिलते ही गांधीनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और तलाशी अभियान शुरू किया। भागते समय एक बालक के पैरों में चोट आई, वह ज्यादा दूर नहीं भाग सका और लंगड़ाते हुए खुद ही प्लेस ऑफ सेफ्टी लौट आया। दूसरे बालक के सिर में चोट लग गई, पुलिस ने उसे रेलवे स्टेशन के पास से पकड़कर प्रबंधन को सौंप दिया।
बाकी चार बालक अभी भी फरार हैं। फरार बालकों में सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया और मनेन्द्रगढ़ के एक-एक बालक शामिल हैं। सभी की उम्र 16 से 18 साल के बीच है और सभी के खिलाफ हत्या, चोरी जैसे गंभीर अपराधों में मामले दर्ज हैं। पुलिस ने रात भर रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और उनके संभावित ठिकानों पर तलाशी ली, लेकिन पता नहीं चल सका।
पहले भी हो चुकी हैं फरार होने की घटनाएं
अंबिकापुर का प्लेस ऑफ सेफ्टी और बाल संप्रेक्षण गृह लगातार सुर्खियों में है। यहां पहले भी अपचारी बालकों के फरार होने की घटनाएं हो चुकी है। लगातार घटनाओं के बाद अधीक्षक को सस्पेंड कर दिया गया था। कलेक्टर ने सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए थे, कई बदलाव भी किए गए, लेकिन सोमवार रात की घटना ने फिर सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।
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जानिए कब हुई भागने की घटनाएं
फरवरी 2026: प्लेस ऑफ सेफ्टी से 15 अपचारी बालक गार्ड पर हमला कर फरार हुए थे।
23 जून 2026: बाल संप्रेक्षण गृह से 11 बालक खिड़की उखाड़कर, बारिश और बिजली गुल होने का फायदा उठाकर भागे थे। ये हत्या, दुष्कर्म, लूट के अपराध में थे।
जुलाई 2026: एक महीने में 27 बच्चे भागे थे इसमें 13 बच्चों ने दीवार फांदकर और तीन ने टॉयलेट का रोशनदान तोड़कर भागने की घटना शामिल है।
क्या है प्लेस ऑफ सेफ्टी
प्लेस ऑफ सेफ्टी किशोर न्याय प्रणाली के तहत एक विशेष संस्थागत केंद्र या सुरक्षित स्थान होता है। यहां उन बच्चों या किशोरों (आमतौर पर 16 से 18 वर्ष की आयु के बीच) को रखा जाता है, जिन पर कोई गंभीर अपराध करने का आरोप होता है, या जिन्हें कानून के तहत बालिग मानकर किशोर न्याय बोर्ड या बाल न्यायालय में प्रक्रिया के लिए भेजा गया हो, अथवा जिन्हें जमानत नहीं मिली हो।
यह जेल या पुलिस लाकअप नहीं होता है; इसे बाल-अनुकूल तरीके से डिजाइन किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित शरण देना और उनके मानसिक व सामाजिक सुधार के लिए काउंसलिंग, शिक्षा और पुनर्वास की सेवाएं प्रदान करना है। किशोर न्याय बोर्ड या बाल न्यायालय के आदेशानुसार बच्चों को यहां रखा जाता है।
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