
नईदुनिया न्यूज, संडी बंगला। मां की चिंता और पिता के आशीर्वाद के सहारे 28 वर्षीय सौरभ देवांगन ने पांच साल में पैदल भारत भ्रमण का संकल्प पूरा कर लिया। करीब 20 हजार किलोमीटर की यात्रा कर 28 राज्यों और आठ केंद्रशासित प्रदेशों का भ्रमण करने के बाद वे बुधवार को रायपुर लौटे।
सौरभ ने सात अक्टूबर 2021 को रायपुर के वीआईपी रोड स्थित श्रीराम मंदिर से यात्रा शुरू की थी। पांच साल बाद सात अक्टूबर 2026 को इसी मंदिर में पहुंचकर उन्होंने अपनी यात्रा पूरी की।
यात्रा शुरू करने के समय कई लोगों ने सौरभ के माता-पिता मालती देवांगन और लुकेश देवांगन से बेटे की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। लोगों का सवाल था कि इतनी लंबी यात्रा पैदल कैसे पूरी होगी और रास्ते में कोई अनहोनी हो गई तो क्या होगा। हालांकि, माता-पिता के आशीर्वाद और सहयोग ने सौरभ का हौसला बढ़ाया और उन्होंने अपना लक्ष्य हासिल कर लिया।
दोस्त लौटे, लेकिन सौरभ ने जारी रखी यात्रा
वर्ष 2021 में पढ़ाई पूरी करने के बाद सौरभ करियर पर ध्यान देने की तैयारी कर रहे थे। कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के बाद उन्होंने खैरागढ़ स्थित इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी कर चुके कुछ दोस्तों के साथ भारत भ्रमण की योजना बनाई। इसका उद्देश्य देश को करीब से देखना और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधारोपण करना था।
शुरुआत में दोस्तों का समूह साथ चला, लेकिन कुछ समय बाद सभी वापस लौट गए। 15 राज्यों का भ्रमण करने के बाद सौरभ भी निराश हो गए थे और गांव लौटने के बारे में सोचने लगे थे। फिर उन्होंने हिम्मत जुटाई और बाकी राज्यों की यात्रा पूरी करने का फैसला किया। इसके बाद अकेले ही आगे बढ़ते हुए उन्होंने भारत भ्रमण का संकल्प पूरा किया।
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कहीं मिला अपनापन, तो कहीं झेलनी पड़ी परेशानी
सौरभ के अनुसार, पूर्वोत्तर भारत में यात्रा का अनुभव बेहद अच्छा रहा। वहां के लोग सार्वजनिक स्थलों को साफ-सुथरा रखते हैं और उनकी जीवनशैली व संस्कृति अलग तथा आकर्षक है। देश के अलग-अलग हिस्सों में उन्हें ऐसे लोग भी मिले, जिन्होंने सहयोग और अपनापन देकर भारतीय होने पर गर्व का अहसास कराया।
हालांकि, सफर में कई कठिन परिस्थितियों का सामना भी करना पड़ा। कुछ जगह लोगों ने उन्हें आधी रात को सड़क किनारे से भगा दिया, तो कहीं मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया गया। ओडिशा में उन्हें 45 किलोमीटर लंबे जंगल से पैदल गुजरना पड़ा।
सौरभ ने बताया कि वहां केवल वाहनों को गुजरने की अनुमति थी। किसी घटना की स्थिति में स्वयं जिम्मेदार होने संबंधी लिखित सहमति देने के बाद उन्हें आगे बढ़ने दिया गया। इस दौरान मगरमच्छ समेत अन्य जंगली जानवरों का खतरा भी रहा। कई बार वे सड़क दुर्घटनाओं में बाल-बाल बचे।
अब साइकिल से छत्तीसगढ़ नापने की तैयारी
सौरभ बताते हैं कि यात्रा ने उन्हें वर्तमान में जीने, परिस्थितियों का सामना करने और जीवन की अहमियत समझने की सीख दी। उन्होंने अंगदान करने का भी निर्णय लिया है, ताकि मृत्यु के बाद उनके अंग जरूरतमंदों के काम आ सकें। छह साल तक घर-परिवार से दूर रहने के बाद अब वे दो महीने मां के साथ बिताएंगे और उनके हाथ का बना चीला, बरा, फरा व अंगाकर रोटी खाएंगे।
इसके बाद बलौदाबाजार जिले के अपने गांव जारा संडी में सफाई अभियान चलाकर युवाओं को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ेंगे। थिएटर की पढ़ाई कर चुके सौरभ भविष्य में इसी क्षेत्र में काम करना चाहते हैं। साथ ही कुछ महीने बाद साइकिल से पूरे छत्तीसगढ़ का भ्रमण करने की भी उनकी योजना है।