
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। पूरे देश में मचे गैस संकट का असर अब राजधानी रायपुर के बड़े सरकारी शिक्षण संस्थानों में भी दिखने लगा है। गैस की सप्लाई प्रभावित होने से इनके हॉस्टल और कैंटीन में खाना बनाने की समस्या खड़ी हो गई है।
मेस चलाने वालों ने छात्रों को कह दिया है कि गैस बचाने के लिए अब रोटियां नहीं सेंकी जाएंगी। हालात सामान्य नहीं होते, तब तक केवल चावल ही मिलेगा।
राजधानी के इन प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रदेश और देशभर के हजारों बच्चे रहकर पढ़ाई करते हैं। नवा रायपुर स्थित ट्रिपल आइटी में 1000 बच्चे हैं। एनआइटी में 1050 और हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में लगभग 1000 बच्चे हॉस्टल में रहते हैं। आइआइएम और एम्स मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों का भी यही हाल है।
रायपुर मेडिकल कॉलेज में 1200 से ज्यादा बच्चे और स्टाफ हैं, जो हॉस्टल की मेस पर निर्भर हैं। इन सभी संस्थानों में हर दिन 5000 से ज्यादा बच्चों के लिए सुबह, दोपहर और रात का खाना बनता है। इसके लिए हर दिन दर्जनों कमर्शियल सिलेंडरों की जरूरत होती है। गैस सप्लाई रुकने से पूरी चेन बिगड़ गई है।
सरकारी संस्थान के कैंटीन संचालकों ने बताया कि उनकी चुनौती गैस बचाने की है। रोटी बनाने में ज्यादा समय लगता है और गैस की खपत भी ज्यादा होती है। कई जगहों पर कैंटीन ठेकेदारों ने कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि तवा न चढ़ाया जाए। बच्चों को भी बता दिया है कि कुछ दिन बिना रोटी के ही काम चलाना होगा।
एक साथ चावल बनाना आसान होता है और इसमें गैस भी कम लगती है। इसलिए फिलहाल दाल-चावल पर ही जोर दिया जा रहा है।
बच्चों को भूखा तो नहीं रखा जा सकता, इसलिए संस्थान और मेस ठेकेदार हर संभव जुगाड़ लगा रहे हैं। कई संस्थानों में जब गैस बिल्कुल खत्म हो गई तो मजबूरी में बाहर से ब्लैक में महंगे दाम पर गैस खरीदकर सप्लाई चालू रखी गई।
हालांकि ठेकेदारों का कहना है कि ब्लैक में रोज-रोज महंगी गैस खरीदकर इतने बच्चों का खाना बनाना उनके लिए बड़ा आर्थिक नुकसान है और यह लंबे समय तक मुमकिन नहीं हो पाएगा।
संस्थानों के प्रबंधन ने भी कमर कस ली है। एनआइटी, एचएनएलयू, एम्स और मेडिकल कॉलेजों की तरफ से हिंदुस्तान पेट्रोलियम सहित तमाम गैस एजेंसियों को सहयोग के लिए पत्र लिखा है। प्रबंधन ने अपील की है कि शिक्षण संस्थानों को गैस सप्लाई में प्राथमिकता दी जाए।
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हमने इसके लिए हिंदुस्तान पेट्रोलियम को पत्र लिखा है। अभी हालात खराब नहीं हैं, लेकिन आगे छात्रों को कोई दिक्कत न हो, इसलिए पहले से ही पूरी सावधानी बरत रहे हैं।
- डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव, रजिस्ट्रार, एचएनएलयू
हमने कैंटीन चलाने वाली कंपनी को साफ निर्देश दे दिए हैं कि गैस की कमी का असर छात्रों के खाने पर बिल्कुल नहीं पड़ना चाहिए। इसके साथ ही हम लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
- डॉ. पी. पलटानी, प्रभारी रजिस्ट्रार, ट्रिपल आइटी
हम सावधानी के तौर पर पूरी तरह तैयार हैं। अभी हालात बिगड़े नहीं हैं, फिर भी हमने संबंधित गैस एजेंसी को जरूरी निर्देश दे दिए हैं।
- डॉ. एन. डी. लोंढे, रजिस्ट्रार, एनआइटी
अभी गैस की समस्या आ रही है। छात्रों की परेशानी को देखते हुए एसोसिएशन की तरफ से गैस एजेंसियों को पत्र लिख दिया गया है।
- डॉ. रेशम रत्नाकर, अध्यक्ष, जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन