
राज्य ब्यूरो,नईदुनिया,रायपुर : 500 करोड़ रुपये के कोल लेवी घोटाले की जांच में संपत्तियों की खरीद और बैंक लेनदेन को लेकर नए तथ्य सामने आए हैं। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) के अभियोग पत्र के अनुसार, मुख्य आरोपित सूर्यकांत तिवारी ने कथित अवैध कमाई से करोड़ों रुपये की जमीन और अन्य संपत्तियां खरीदीं। इन्हें अपने नाम पर रखने की अपेक्षा अपने भाई व रिश्तेदारों के साथ करीबियों के नाम पर दर्ज कराया। इनमें से कई संपत्तियां बाद में इंद्रमणि कोल ग्रुप के डायरेक्टर व अपने सहयोगी सुनील अग्रवाल के नाम हस्तांतरित कराई गईं।
अभियोग पत्र के अनुसार, दिव्या तिवारी के नाम पर खट्टी, महासमुंद, हिमालय पार्क, शापिंग काम्प्लेक्स, जामली और रायपुर में संपत्तियां खरीदी गईं। इनमें जेडी इंटरप्राइजेज और एएम फ्यूल्स से संबंधित संपत्तियां भी शामिल हैं। इनका मूल्य 5.07 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि इन संपत्तियों का भुगतान सूर्यकांत तिवारी ने किया था।
इसी तरह दिव्येश चंद्राकर के नाम पर रायपुर में तीन संपत्तियां खरीदी गईं, जिनकी कीमत करीब 85 लाख रुपये थी। बाद में इन्हें सुनील अग्रवाल के नाम हस्तांतरित किए जाने का उल्लेख है। सोनाली दुबे और अभिषेक दुबे के नाम पर खरोरा और बेलसोंडा में करीब डेढ़ करोड़ रुपये की चार संपत्तियां खरीदी गईं। शरद तिवारी और मुकुट दुबे के नाम पर खरीदी गई जमीनों को भी बाद में सुनील अग्रवाल के नाम किए जाने की बात अभियोग पत्र में कही गई है।
अभियोग पत्र के अनुसार, राधाकांत तिवारी के नाम पर आरंग क्षेत्र में करीब दो करोड़ रुपये मूल्य की दो संपत्तियां खरीदी गईं। बाद में इन्हें भी सुनील अग्रवाल के नाम हस्तांतरित करने का उल्लेख है। ग्राम रसनी में प्रवीण अग्रवाल से 14 एकड़ 25 डिसमिल जमीन खरीदकर महाराज मेगा प्रोजेक्ट के नाम पर तीन रजिस्ट्रियां कराई गईं। इसके लिए करीब 10 करोड़ रुपये के भुगतान की जानकारी दी गई है।
अभियोग पत्र के अनुसार, वर्ष 2020 से 2022 के दौरान सूर्यकांत तिवारी नकद राशि जोगेंद्र सिंह को देता था। इसके बाद विभिन्न फर्मों और बैंक खातों के जरिये रकम संबंधित व्यक्तियों और फर्मों तक पहुंचाई जाती थी। इसमें अन्नपूर्णा लाजिस्टिक से 2.25 करोड़, एएसआर ट्रक लिंक्स से 87 लाख, अजय जैन से संबंधित खातों से 90.59 लाख और अन्य खातों से 6.75 करोड़ रुपये की एंट्री का उल्लेख है। इन लेनदेन को असुरक्षित ऋण के रूप में दर्शाए जाने की बात भी अभियोग पत्र में कही गई है।
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