
जितेंद्र सिंह दहिया, नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। खेती को मजबूत करने और आय बढ़ाने के लिए किसान अब सिर्फ फसल कर्ज तक सीमित नहीं हैं। वे गोदाम, कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण इकाई, पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए भी बैंक से वित्तीय मदद मांग रहे हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में आवेदन मंजूरी की प्रक्रिया में ही अटक या खारिज हो रहे हैं। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के 30 जून 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, पशुपालन और मत्स्य पालन किसान क्रेडिट कार्ड को मिलाकर 55,261 आवेदन खारिज किए गए हैं।
इनमें पशुपालन के 46,672, मत्स्य पालन के 7,174 और एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के 1,415 आवेदन शामिल हैं। एग्री फंड में ही खारिज आवेदनों में 1509.77 करोड़ रुपये की कर्ज मांग थी। इसके अलावा 981.55 करोड़ रुपये के 1463 आवेदन अब भी लंबित हैं। यानी किसानों और कृषि कारोबार से जुड़े लोगों की बड़ी राशि वाली परियोजनाओं का फैसला अभी बैंकिंग प्रक्रिया में अटका हुआ है।
एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में राज्यभर से 6745 आवेदन मिले। इनमें कुल 5329.99 करोड़ रुपये की कर्ज मांग की गई थी। 3867 मामलों में 2266.36 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली और 3679 मामलों में 2069.16 करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं। दूसरी ओर, 1415 आवेदन 1509.77 करोड़ रुपये की मांग के साथ खारिज कर दिए गए। 1463 आवेदन 981.55 करोड़ रुपये के अभी लंबित हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि कृषि अधोसंरचना तैयार करने की योजनाओं में बड़ी संख्या में आवेदक अभी बैंक के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।
जिलों में भी तस्वीर अलग-अलग है। रायपुर में 650 आवेदन 824.57 करोड़ रुपये की मांग के साथ आए। इनमें 403 मामलों को 358.93 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली और 380 मामलों में 322.79 करोड़ रुपये बांटे गए। 153 आवेदन 213.70 करोड़ रुपये की मांग के साथ खारिज हुए। बेमेतरा में 432 आवेदन 634.15 करोड़ रुपये के मिले। 238 मामलों को 190.64 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली, जबकि 126 आवेदन 318.17 करोड़ रुपये की मांग के साथ निरस्त कर दिए गए।
यहां खारिज राशि मंजूर राशि से 127.53 करोड़ रुपये ज्यादा रही। धमतरी में 487 आवेदन आए। 286 मामलों में 164.45 करोड़ रुपये मंजूर हुए और 269 मामलों में 140.71 करोड़ रुपये बांटे गए। 116 आवेदन 71.54 करोड़ रुपये की मांग के साथ खारिज हुए। बालोद में 413 आवेदनों में 259 को 115.93 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली और 45.28 करोड़ रुपये की मांग वाले आवेदन खारिज हुए।
पशुपालन के लिए किसान क्रेडिट कार्ड में 78,773 आवेदन मिले। इनमें सिर्फ 29,670 को मंजूरी मिली, जबकि 46,672 आवेदन खारिज कर दिए गए। 1,348 आवेदन 15 दिन से ज्यादा समय से लंबित थे। एसबीआई में पशुपालन के 26,143 आवेदन पहुंचे, जिनमें 17,179 खारिज हुए। सहकारी बैंकों में 36,357 आवेदन आए और 19,250 निरस्त किए गए। जिलों में दुर्ग के 4755 में से 3437, मुंगेली के 5088 में से 4123 और रायपुर के 4051 में से 2226 आवेदन खारिज हुए।
मत्स्य पालन किसान क्रेडिट कार्ड के लिए 11,950 आवेदन मिले। इनमें 4,192 को मंजूरी मिली, जबकि 7,174 आवेदन खारिज किए गए। 515 आवेदन लंबित थे। एसबीआई में 4263 आवेदन पहुंचे, जिनमें 2815 निरस्त हुए। सरगुजा में 2176 में से 1430 और रायपुर में 1308 में से 939 आवेदन खारिज हुए।
एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में एसबीआई को सबसे ज्यादा 3118 आवेदन मिले। इनमें 1841 मामलों में 562.25 करोड़ रुपये मंजूर हुए और 1824 मामलों में 540.52 करोड़ रुपये बांटे गए। बैंक ने 688 आवेदन 298.10 करोड़ रुपये की मांग के साथ खारिज किए। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक में 1014 आवेदन आए।
इनमें 679 मामलों को 163.56 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली और 666 में 161.21 करोड़ रुपये वितरित किए गए। निजी बैंकों में 953 आवेदन पहुंचे, जिनमें 322 आवेदन 397.21 करोड़ रुपये की मांग के साथ खारिज हुए। अकेले एचडीएफसी बैंक ने 194 आवेदन 213.47 करोड़ रुपये की मांग के साथ निरस्त किए।
प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 में तस्वीर अलग रही। राज्य में 326 आवेदन 50.08 करोड़ रुपये की मांग के साथ मिले। इनमें 280 मामलों को 42.27 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली और 273 मामलों में 36.90 करोड़ रुपये वितरित किए गए। सिर्फ 18 आवेदन खारिज हुए और 28 लंबित रहे। रायपुर से 131 आवेदन आए, जिनमें 124 को मंजूरी मिली और 17.31 करोड़ रुपये वितरित किए गए। वहीं कई आदिवासी बहुल जिलों से एक भी आवेदन दर्ज नहीं हुआ।
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