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छत्तीसगढ़ सरकार को बड़ा झटका, प्री-पेड स्मार्ट मीटर का बिल न भरने पर केंद्र ने रोका एक-तिहाई अनुदान

CG Government Smart Meter: प्रदेश के विकासखंड स्तर तक के लगभग 85 प्रतिशत सरकारी विभागों में प्री-पेड स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी ...और पढ़ें

By Satish PandeyEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Fri, 18 Sep 2026 04:55:22 PM (IST)Updated Date: Fri, 18 Sep 2026 04:55:22 PM (IST)
छत्तीसगढ़ सरकार को बड़ा झटका, प्री-पेड स्मार्ट मीटर का बिल न भरने पर केंद्र ने रोका एक-तिहाई अनुदान
आरडीएसएस स्कीम का अटकाया फंड।

HighLights

  1. 3,000 करोड़ का बिजली बिल बकाया
  2. आरडीएसएस स्कीम का अटकाया फंड
  3. सिर्फ 6 जिलों के विभागों ने दिखाई रुचि

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। राज्य के सरकारी कार्यालयों में स्मार्ट मीटरों को प्री-पेड में बदलने के कड़े निर्देशों और अगस्त माह से लागू हुई व्यवस्था के पश्चात भी विभिन्न विभाग प्री-पेमेंट (अग्रिम भुगतान) करने में घोर लापरवाही दिखा रहे हैं।

प्रदेश के विकासखंड स्तर तक के लगभग 85 प्रतिशत सरकारी विभागों में प्री-पेड स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी विभागों से बिलों का प्री-पेमेंट नहीं मिल रहा है। इस गंभीर उदासीनता के कारण केंद्र सरकार ने राज्य को मिलने वाले केंद्रीय अनुदान की एक-तिहाई राशि पर रोक लगा दी है।


कुल 32,741 सरकारी कनेक्शन चिह्नित

केंद्र सरकार की गाइड लाइन के अनुसार, एक अगस्त से विकासखंड स्तर तक के समस्त सरकारी विभागों में लगे स्मार्ट मीटरों में प्री-पेड सिस्टम लागू कर दिया गया था। ऐसे कुल 32,741 सरकारी कनेक्शन चिह्नित किए गए थे।

व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए बिजली कंपनी प्रबंधन द्वारा सरकारी कनेक्शनों का ग्रुप तैयार कर नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए गए। लेकिन पूरे प्रदेश में अब तक प्री-पेमेंट के नाम पर मात्र डेढ़ से दो करोड़ रुपये ही प्राप्त हो सके हैं।

केवल छह जिलों के विभागों ने दिखाई रुचि

बिजली कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक, प्री-पेमेंट करने वालों में केवल छह जिलों के आरटीओ, क्रेडा, पशु चिकित्सा विभाग बलौदाबाजार, जिला पंचायत बलौदाबाजार, कबीरधाम, दुर्ग और मानव अधिकार आयोग दफ्तर ही आगे आए हैं। दूसरी ओर, नगरीय प्रशासन और पंचायत जैसे बड़े तथा अधिक खपत वाले विभाग प्री-पेमेंट करने में लगातार टालमटोल कर रहे हैं।

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करोड़ों का बकाया, अटका केंद्रीय अनुदान

वर्तमान में छत्तीसगढ़ के करीब 45 सरकारी विभागों पर लगभग 3,000 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है।

  • आरडीएसएस स्कीम का नियम: केंद्र की स्कीम के तहत अगली किस्त का भुगतान तभी संभव है जब सरकारी स्मार्ट मीटरों में प्री-पेड व्यवस्था पूरी तरह लागू हो और बकाया राशि शून्य हो। आरडीएसएस यानी पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय की एक प्रमुख योजना है, जिसे बिजली वितरण कंपनियों की परिचालन क्षमता और वित्तीय स्थिरता में सुधार के लिए शुरू किया गया है।
  • किश्तों का प्रविधान: बकाया राशि के निपटारे के लिए चार किश्तों जुलाई-सितंबर, अक्टूबर-दिसंबर, जनवरी-मार्च 2027 और अप्रैल-जून 2027) का प्रविधान किया गया था। इसके बावजूद सरकारी विभाग न तो प्री-पेमेंट कर रहे हैं और न ही पुराने बकाए के भुगतान में कोई रुचि दिखा रहे हैं, जिसका सीधा असर अब केंद्रीय फंड पर पड़ा है।