
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। भाजपा सरकार को सत्ता में आए दो वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक चंद्रखुरी स्थित माता कौशल्या धाम में भगवान श्रीराम की 51 फीट ऊंची नई प्रतिमा स्थापित नहीं हो पाई है। भाजपा ने सत्ता संभालते ही नई प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा की थी। भाजपा ने कांग्रेस शासनकाल में स्थापित प्रतिमा को लेकर आपत्ति जताई थी कि उसमें भगवान राम की महिमा के अनुरूप झलक नजर नहीं आती है।
मुख्यमंत्री को लिखा था पत्र
विगत वर्ष 20 नवंबर को भाजपा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने इस संबंध में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखा था। पत्र में उल्लेख किया गया था कि वर्तमान सरकार के गठन के बाद भी यह मांग लगातार उठती रही, किंतु दो वर्षों के बाद भी मूर्ति परिवर्तन की प्रक्रिया पूर्ण नहीं होने से जनता में निराशा व्याप्त है। नई मूर्ति ग्वालियर में तैयार होने के बावजूद विभागीय उदासीनता के कारण किसी अन्य राज्य में स्थापित किए जाने की स्थिति बन रही है, जो अत्यंत चिंतनीय है।
पत्र में आग्रह किया गया था कि तीन महीनों के भीतर चंद्रखुरी में प्रभु श्रीराम की पारंपरिक स्वरूपानुकूल भव्य मूर्ति की स्थापना सुनिश्चित की जाए और माता कौशल्या की जन्मभूमि के समग्र विकास के लिए एक विस्तृत मास्टर प्लान बनाकर प्राथमिकता से कार्य शुरू किया जाए।
सात दिनों के भीतर मूर्ति लगाने का वादा
विधानसभा के शीतकालीन सत्र में विधायक अजय चंद्राकर ने भी नई मूर्ति का मामला उठाया था। उस दौरान पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने सात दिनों के भीतर मूर्ति लगाने का वादा किया था। छत्तीसगढ़ को भगवान राम का ननिहाल माना जाता है। यहां भगवान राम की माता कौशल्या का मायका है, इसलिए कहा जाता है कि राम छत्तीसगढ़ के भांजे हैं। कौशल्या धाम में स्थापित भगवान राम की प्रतिमा को कब हटाया जाएगा और नई प्रतिमा कहां स्थापित होगी, इसे लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं है।
प्रतिमा स्थापित होते ही शुरू हुआ विवाद
कौशल्या धाम में प्रभु श्रीराम की मूर्ति को लेकर शुरू से ही विवाद रहा है। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कौशल्या धाम परिसर का जीर्णोद्धार किया गया था और वर्ष 2021 में 51 फीट ऊंची श्रीराम की प्रतिमा स्थापित की गई थी। उस समय राम वन पथ गमन और कौशल्या धाम जीर्णोद्धार को तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार ने एक ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में प्रचारित किया था।
विपक्ष में रही भाजपा ने आपत्ति जताई थी कि प्रतिमा भगवान राम के स्वरूप के अनुरूप मनमोहक नहीं है। यह प्रतिमा ग्वालियर के मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा द्वारा बनाई गई थी।
राम वन गमन पथ की जांच भी ठंडे बस्ते में
राज्य सरकार की राम वन गमन पथ की जांच भी फिलहाल ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। मान्यता है कि वनवास के दौरान भगवान राम ने प्रदेश में लंबा समय बिताया था। वनवास के दौरान जहां-जहां भगवान राम के चरण पड़े, वह क्षेत्र राम वन गमन पथ कहलाता है।
बताया जाता है कि भूपेश सरकार के कार्यकाल में राम वन गमन पथ पर 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई थी। प्रदेश में ऐसे दस स्थानों को चिन्हित किया गया था, जहां से भगवान राम के गुजरने की मान्यता है और इन स्थानों के विकास पर राशि खर्च की गई थी। भाजपा ने आरोप लगाया था कि योजना के तहत निर्माण कार्यों में अनियमितताएं हुई हैं और कुछ एजेंसियों को भुगतान पहले ही कर दिया गया था। निर्माण कार्य की गुणवत्ता का निरीक्षण भी नहीं किया गया।
सत्ता में आने के बाद सरकार ने सभी कार्यों की जांच के लिए विधायक अजय चंद्राकर की अध्यक्षता में सात सदस्यों की कमेटी गठित की थी। कमेटी को प्रत्येक स्थल का फिजिकल वेरिफिकेशन करना था।
जिम्मेदारों का क्या कहना है
विवेक आचार्य, एमडी, पर्यटन विभाग ने कहा कि “मूर्तिकार को पुरानी प्रतिमा की जगह ही नई मूर्ति स्थापित करनी है। इसके लिए अलग से कोई वर्क आर्डर जारी नहीं किया गया था। प्रतिमा को कब हटाया जाएगा और नई प्रतिमा कहां व कब स्थापित होगी, इसके लिए अभी समय तय नहीं किया गया है।”
पर्यटन मंत्री का क्या कहना है
राजेश अग्रवाल, पर्यटन मंत्री ने कहा कि “चंद्रखुरी स्थित कौशल्या माता मंदिर परिसर में इस माह प्रभु श्रीराम की मूर्ति स्थापित कर दी जाएगी। नई मूर्ति तैयार हो चुकी है। रायपुर आने के बाद पूरे रीति-रिवाज के साथ इसकी स्थापना की जाएगी।”
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