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CG Dhan Kharidi: धान खरीदी का लक्ष्य नहीं हुआ पूरा, पिछले साल से भी 9 लाख टन कम; किसान ने पिया फिनाइल

राज्य सरकार के इस वर्ष 160 टन धान खरीदी का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। शुक्रवार 30 जनवरी रात 9 बजे तक प्रदेश भर के खरीदी केंदों में केवल 139 लाख टन धान ह...और पढ़ें

By Sandeep TiwariEdited By: Roman Tiwari
Publish Date: Sat, 31 Jan 2026 08:01:14 AM (IST)Updated Date: Sat, 31 Jan 2026 08:06:27 AM (IST)
CG Dhan Kharidi: धान खरीदी का लक्ष्य नहीं हुआ पूरा, पिछले साल से भी 9 लाख टन कम; किसान ने पिया फिनाइल
धान खरीदी का लक्ष्य नहीं हुआ पूरा (फाइल फोटो)

HighLights

  1. अंतिम दिन रात नौ बजे तक 139 लाख टन की खरीद
  2. 27,41,116 किसानों से धान की खरीदी नहीं हो पाई
  3. वर्ष 2024-25 में 149 लाख टन धान की खरीदी हुई थी

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर: राज्य सरकार इस वर्ष धान खरीदी का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाई है। इस बार 160 लाख टन खरीदी का लक्ष्य तय किया गया था। अंतिम दिन शुक्रवार की रात नौ बजे तक 139 लाख टन खरीद (Total dhan kharidi) हुई थी। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान खरीदी विगत वर्ष की तुलना में करीब 9 लाख क्विंटल कम हुई है।

वर्ष 2024-25 में 149 लाख टन धान की खरीदी हुई थी। प्रदेश में 15 नवंबर 2025 से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 2,740 धान उपार्जन केंद्रों के माध्यम से खरीदी शुरू की गई थी। इसके बावजूद सभी पंजीकृत 27,41,116 किसानों से धान की खरीदी नहीं हो पाई। समयसीमा समाप्त होने के बाद भी करीब दो लाख किसान धान बेचने से वंचित रह गए हैं।


प्रदेश के करीब सभी धान खरीदी केंद्रों में सुबह से ही धान बेचने के लिए किसानों की लंबी कतारें लग गई थी। किसान संगठनों और कांग्रेस ने बार-बार खरीदी की अवधि बढ़ाने की मांग की, लेकिन सरकार ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया।

विगत पांच वर्षों में हुई खरीदी

साल खरीदी
2019-20 83.94
2020-21 92.02
2021-22 97.99
2022-23 107.54
2023-24 144.92
2024-25 149.25

किसान संगठनों का कहना है कि खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी तय थी, लेकिन शनिवार और रविवार को उपार्जन केंद्रों में खरीदी नहीं होती। इसके अलावा 15 जनवरी से ऑनलाइन और ऑफलाइन टोकन प्रणाली भी बंद कर दी गई थी। इससे 2.85 लाख किसानों का टोकन ही नहीं कट पाया था, जबकि करीब 1.90 लाख छोटे किसान टोकन मिलने का इंतजार करते रहे।

इस वर्ष धान खरीदी (मात्रा टन में)

  • मोटा- 7696221.3
  • पतला- 890853.9
  • सरना- 5398312.6
  • कुल- 13985387.7

किसान संगठनों ने आरोप लगाया कि पूरे पंजीकृत किसानों से खरीदी नहीं होना सरकार की लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे धान लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

प्रमुख जिलों में हुई खरीदी

  • रायपुर- 665578.5
  • बिलासपुर- 675480.9
  • दुर्ग- 557889.2
  • सरगुजा- 319399.7
  • बस्तर- 278371.9

जशपुर में किसानों ने किया रतजगा

जशपुर जिले में अंतिम दिन किसानों ने मंडियों में रात बिताई। मंडियों में किसान ट्रैक्टर और पिकअप के माध्यम से धान लेकर पहुंचे थे। अंतिम दिन समय पर धान की तौलाई सुनिश्चित करने के लिए किसानों ने रातभर तौलाई में जुटे रहे। गम्हरिया मंडी में गुरुवार रात नौ बजे तक किसान टोकन के लिए इंतजार करते रहे। जशपुर-रांची नेशनल हाईवे पर धान की बोरियों से भरे ट्रैक्टरों की लंबी कतारें लग गई थी।

किसान का फिनाइल पीकर आत्महत्या की कोशिश

जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम सांकर में धान नहीं बिकने से परेशान एक किसान ने फिनाइल पी लिया। आत्महत्या की कोशिश से पहले उसने एक वीडियो भी बनाया, जिसमें उसने प्रशासनिक अव्यवस्थाओं को अपनी हालत के लिए जिम्मेदार ठहराया है। स्जवन समय रहते किसान को लेकर अस्पताल लेकर पहुंचे, जिससे जान बच गई।

यह भी पढ़ें- बालोद में भाजपा की पूर्व विधायक ही नहीं बेच सकी अपना धान, सुबह से शाम तक धरने पर बैठी रहीं

प्रदेश के सभी जिलों में पंजीकृत किसानों से धान खरीदी नहीं हो पाई है। कुछ जिलों में भौतिम सत्यापन के बाद भी खरीदी नही हुई है। मुख्यमंत्री को समयसीमा बढ़ाने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा गया था। अब किसान ट्रकों व अन्य साधनों से धान लेकर कलेक्ट्रर के पास पहुंचेंगे।

नवीन शेष, भारतीय किसान संघ

प्रदेश में जिस प्रकार से धान खरीदी हुई, उससे स्पष्ट है कि लाखों किसान धान नहीं बेच पाए हैं। अब किसान अपनी उपज को औने-पौने दाम पर बिचौलिया के पास बेचने के मजबूर होंगे। राज्य सरकार की मंशा थी कि कम धान खरीदी हो, जिससे 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान न करना पड़े।

दीपक बैज, प्रदेशाध्यक्ष, कांग्रेस

प्रदेश में टोकन होने के बावजूद लाखों किसान धान नहीं बेच पाए हैं। यह न केवल प्रशासनिक प्रबंधन पर सवाल उठाता है, बल्कि उन किसानों की मेहनत पर भी चोट है, जिसने सालभर पसीना बहाया है। किसान धान की बिकवाली से परेशान होकर आत्महत्या को मजबूर हुए हैं। यह किसान विरोधी सरकार के प्रमाण है।

डॉ. चरण दास महंत, नेता प्रतिपक्ष

कांग्रेस मुद्दाविहीन है, इसलिए इस तरह का आंदोलन कर रही है। उनका धर्म ही विरोध करना है। धान खरीदी को लेकर दो दिन पहले ही समीक्षा कर अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि किसानों का धान समय पर बिके और टोकन मिलने में देर न हो।

विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री