
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। राजधानी में संपत्तियों का आखिरी जीआईएस सर्वे करीब दस साल पहले हुआ था। इस बीच शहर का विस्तार हुआ, नए निर्माण हुए और कई रिहायशी मकानों का उपयोग बदलकर व्यावसायिक कर दिया गया। अब नगर निगम आधुनिक लिडार तकनीक से शहर की संपत्तियों की मैपिंग कराने जा रहा है। इससे भवनों के वास्तविक उपयोग और स्वीकृत उपयोग के बीच अंतर सामने आएगा।
सर्वे के आधार पर दूसरे चरण में कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल निगम ने रिहायशी मकानों में कैफे, रेस्टोरेंट और दुकानें संचालित करने वाली 360 संपत्तियों को नोटिस जारी किया है। नोटिस के बाद भी कारोबार बंद नहीं करने वालों पर सीलबंदी की कार्रवाई शुरू हो गई है। इसी कड़ी में रोहिणीपुरम के गोल चौक के पास झा कोचिंग के नजदीक स्थित हेवन कैफे को सील कर दिया गया।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय वार्ड में स्थित यह कैफे तीन दिन पहले ही शुरू हुआ था। जोन-5 की नगर निवेश टीम ने संचालक को पहले नोटिस देकर व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने के निर्देश दिए थे। पालन नहीं होने पर टीम ने परिसर सील कर दिया। जोन-5 में यह दूसरी सीलबंदी है।
जून 2026 में नगर निगम की विशेष सामान्य सभा में पार्षदों और एमआईसी सदस्यों ने नगर निवेश विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। इसके बाद निगम आयुक्त सचिन मिश्रा ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर अवैध प्लॉटिंग, निर्माण, अतिक्रमण और आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग का सर्वे कराने के निर्देश दिए।
जोन कार्यालयों को भी कार्रवाई के अधिकार दिए गए। इसके बाद करीब 1100 अवैध निर्माण और अतिक्रमण के मामलों में नोटिस व कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई। इसी अभियान में 360 आवासीय संपत्तियों में व्यावसायिक गतिविधियां सामने आईं।
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निगम के अनुसार, अतिरिक्त निर्माण के कुछ मामलों में नियमानुसार राजीनामा कराया जा सकता है। इसके लिए 50 प्रतिशत तक शुल्क देना पड़ सकता है, लेकिन इससे जमीन का स्वीकृत लैंड यूज नहीं बदलता। आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित जमीन पर केवल शुल्क जमा करने से कैफे, रेस्टोरेंट या दुकान चलाने की अनुमति नहीं मिलती।
सभी 10 जोन में कार्रवाई शुरू कर दी गई है। लिडार सर्वे में सामने आने वाली अन्य संपत्तियों पर भी नियमानुसार कार्रवाई होगी।- आभास मिश्रा, नगर निवेशक