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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 06, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

छत्तीसगढ़ में बरसात ने बिगाड़ी सब्जियों की सेहत, आसमान छू रहे दाम, थोक से रिटेल तक महंगाई की मार

Vegetable Price In CG: छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही बारिश के चलते सब्जियों की कीमतें बढ़नी शुरू हो गई हैं। वर्तमान में रायपुर सहित प्रदेश की मंडियों मे...और पढ़ें

By Mohan KumarEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Sun, 06 Jul 2025 09:14:53 PM (IST)Updated Date: Sun, 06 Jul 2025 09:16:36 PM (IST)
छत्तीसगढ़ में बरसात ने बिगाड़ी सब्जियों की सेहत, आसमान छू रहे दाम, थोक से रिटेल तक महंगाई की मार
बरसात की वजह से सब्जियों की दामों में बढ़ोतरी

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर: प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के चलते सब्जियों की कीमतें बढ़नी शुरू हो गई हैं। मंडियों में अब सब्जियां खरीदना बजट से बाहर होते जा रहा है। व्यापारी भी इस समय घाटा सहते हुए मंगा रहे हैं, लेकिन बारिश की मार और बाहरी राज्यों पर निर्भरता ने सब्जियों को महंगा कर दिया है। वर्तमान में रायपुर सहित प्रदेश की मंडियों में 25 प्रतिशत सब्जियां आसपास के जिलों से आ रही हैं, जबकि शेष 75 प्रतिशत की आपूर्ति कर्नाटक, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों से हो रही है। इन राज्यों में भी बारिश के चलते फसलें प्रभावित हुई हैं, जिससे थोक मूल्यों में वृद्धि देखने को मिल रही है।

सबसे ज्यादा मार टमाटर, फूलगोभी और शिमला मिर्ची पर

टमाटर कर्नाटक से आ रहा है, जहां एक कैरेट की कीमत 800 रुपये तक पहुंच गई है। वहां से कैरेट के हिसाब से सीमित माल ही भेजा जा रहा है, जिससे थोक व्यापारी घाटे में सब्जी बेचने को मजबूर हैं। महाराष्ट्र से आने वाली फूलगोभी और पत्तागोभी भी महंगी हो गई है। राजस्थान से आ रही शिमला मिर्ची की आवक सीमित होने से इसके दाम भी बढ़े हैं। पश्चिम बंगाल से परवल और आलू आ रहे हैं, लेकिन परिवहन खर्च और बारिश के चलते इनकी कीमतों में भी उछाल है। मध्यप्रदेश से धनिया, हरी मिर्च, गाजर और बीट आ रही है, जबकि महाराष्ट्र से हरी मिर्च और गंवार फली की आपूर्ति हो रही है। इन सभी की कीमतें औसतन 20-30 प्रतिशत तक बढ़ी हैं।


स्थानीय उत्पादन भी नहीं दे रहा राहत

रायपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों से आने वाली लौकी, करेला, भिंडी, भांटा, खीरा, पालक, लाल भाजी, गिलकी जैसी सब्जियां भी बारिश में खराब हो चुकी हैं। इससे उनकी आपूर्ति घट गई है और कीमतों में इजाफा हो गया है।

सबसे महंगा सेमी, मशरूम बना ‘अमीरों की सब्जी’

फिलहाल सेमी सबसे महंगी सब्जियों में शामिल है। इसका थोक मूल्य 120 से 140 रुपये प्रति किलो और रिटेल मूल्य 160 से 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुका है। वहीं गरियाबंद के जंगली क्षेत्रों से आने वाला मशरूम भी आम जनता की पहुंच से बाहर हो चुका है। थोक में इसका मूल्य 1300 रुपये किलो तक पहुंच गया है, जबकि रिटेल में 500 रुपये प्रति पाव बिक रहा है।

नुकसान झेल रहे व्यापारी, आमजन परेशान

थोक व्यापारी बताते हैं कि बारिश के चलते माल समय पर नहीं आ पा रहा और जो आ रहा है उसकी क्वालिटी भी प्रभावित है। ऊपर से दाम बढ़ने के कारण खरीद कम हो गई है। उधर, उपभोक्ताओं को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक ओर क्वालिटी खराब है, दूसरी ओर कीमतें आसमान छू रही हैं।

बारिश के कारण सब्जियों की आवक में कमी आई है। इसका असर सब्जियों की कीमत में पड़ना शुरू हो गया है, लेकिन थोक व्यापारी सब्जियों की कीमतों को संतुलित रखने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। हमारा प्रयास है कि इन दिनों कम मुनाफे के साथ आम जनता को सब्जियां उपलब्ध कराएं। इसके लिए रेट टू रेट सब्जियां बेचने की कोशिश की जा रही है। श्रीनिवास रेड्डी, अध्यक्ष, श्रीराम थोक सब्जी विक्रेता समिति, डूमरतराई (रायपुर)