
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर : धान उठाने के बाद चावल लौटाने की बारी आई तो मिलरों ने चावल ही नहीं लौटाया। जिले में अनुबंधित 183 मिलरों में सिर्फ छह ने ही उठाए गए धान के बदले में शत-प्रतिशत चावल नागरिक आपूर्ति निगम में जमा किया है। बाकी 177 मिलरों के पास अभी 1,16,562 टन चावल जमा करना बाकी है। इसकी कीमत करीब 4.66 अरब रुपये है।
सबसे गंभीर स्थिति 11 मिलरों की है। इनकी ओर से अब तक चावल का एक दाना भी जमा नहीं किया गया है। प्रशासन ने अब बकायादार मिलरों को तीन दिन में चावल जमा करने का अल्टीमेटम दिया है। इसके बाद बैंक गारंटी जब्त करने से लेकर मिल सीलबंद करने तक की कार्रवाई की जाएगी।
183 मिलरों में केवल 32 ऐसे हैं, जिन्होंने उठाए गए धान के मुकाबले 90 से 100 प्रतिशत तक चावल जमा किया है। इनमें छह मिलरों ने ही पूरा लक्ष्य हासिल किया है। करीब 80 मिलरों ने 50 से 90 प्रतिशत तक चावल जमा किया है। शेष मिलरों का जमा प्रतिशत इससे भी कम है। यानी बड़ी मात्रा में चावल अभी मिलों में पड़ा है। प्रशासन अब मिल वार बकाया की समीक्षा कर रहा है, ताकि अगले माह तक पूरा चावल निगम में जमा कराया जा सके।
जिन मिलरों ने एक भी चावल जमा नहीं किया है, उनके मामले में प्रशासन ने अलग से सख्ती शुरू की है। कलेक्टर के निर्देश पर अपर कलेक्टर ने अधिकारियों की बैठक लेकर मिलिंग और चावल जमा करने की स्थिति की समीक्षा की। इसके बाद संबंधित मिलरों को नोटिस जारी किए गए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अनुबंध की शर्तों के अनुसार चावल जमा नहीं किया गया तो उपलब्ध बैंक गारंटी पर कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर मिल सीलबंद भी की जा सकती है।
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मिलरों अभी एफसीआइ का चावल जमा करने को प्राथमिकता दे रहे थे। अब दो माह का चावल एक साथ वितरण किया जाना है, इसलिए नान के चावल को भी तेजी से जमा कराने के लिए मिलरों पर दबाव बनाया जा रहा है। दीपक अग्रवाल, अध्यक्ष, राइस मिलरों एसोसिएशन
कस्टम मिलिंग का चावल जमा नहीं करने वाले मिलरों पर सख्ती की जाएगी। नोटिस जारी किए जा चुके हैं। तीन दिनों में चावल जमा नहीं करने पर बैंक गारंटी जब्त करने और मिल सीलबंद करने की कार्रवाई की जाएगी।
कीर्तिमान सिंह राठौर, अपर कलेक्टर