त्रिशूल रूप में प्रतिष्ठापित हैं रानी सती दादी, जन्मोत्सव पर अखंड जोत प्रज्वलन, आज होगा मंगल पाठ
राजस्थान के झुंझनू जिले में स्थित रानी सती दादी मंदिर का प्रतिरूप राजा तालाब में प्रतिष्ठापित है। मंदिर में रानी सती त्रिशूल रूप में विराजित है। गुरुव ...और पढ़ें
By Ashish Kumar GuptaEdited By: Ashish Kumar Gupta
Publish Date: Fri, 18 Nov 2022 06:05:00 AM (IST)Updated Date: Fri, 18 Nov 2022 06:05:00 AM (IST)

रायपुर। राजस्थान के झुंझनू जिले में स्थित रानी सती दादी मंदिर का प्रतिरूप राजा तालाब में प्रतिष्ठापित है। मंदिर में रानी सती त्रिशूल रूप में विराजित है। गुरुवार को दो दिवसीय जन्मोत्सव का शुभारंभ हुआ। पहले दिन अखंड जोत प्रज्वलित की गई। इसके पश्चात भजन गायकों ने देर रात तक भजनों की प्रस्तुति दी। इस दौरान 56 भोग अर्पित किया गया।
मंदिर समिति के कैलाश अग्रवाल ने बताया कि शुक्रवार को सुबह 56 भोग प्रसादी का वितरण किया जाएगा। शाम को 500 से अधिक महिलाएं मंगल पाठ में शामिल होंगी। प्रदेशभर से महिलाएं मंगल पाठ के लिए पहुंच रहीं हैं। पाठ के समापन पर भव्य महाआरती की जाएगी।
47 साल से अखंड जोत हो रही प्रज्वलित
रानी सती दादी को मानने वाले श्रद्धालु पहले अपने घर पर अथवा भवन, धर्मशाला में भजन-कीर्तन, मंगल पाठ का आयोजन करते थे। श्रद्धालुओं के सहयोग से 1975 में मंदिर की नींव रखी गई थी। अब भव्य मंदिर में एक साथ हजारों श्रद्धालु पूजा करने शामिल होते हैं। मंदिर निर्माण के समय झूंझनू के मुख्य मंदिर से जोत लाकर राजातालाब मंदिर में अखंड जोत प्रज्वलित की गई थी। 45 साल से यह अखंड जोत प्रज्वलित हो रही है। हर साल जन्मोत्सव के अवसर पर इसी जोत से अस्थायी जोत का प्रज्वलन करके महोत्सव का शुभारंभ किया जाता है।
भादो अमावस्या और अगहन नवमीं पर उत्सव
मंदिर के पट प्रतिदिन सुबह 5 बजे खोले जाते हैं। आरती, पूजन के बाद 12 बजे पट बंद किए जाते हैं। शाम 4 से रात्रि 9 बजे तक फिर मंदिर खुला रहता है। मंदिर में साल में दो बार भादो अमावस्या और अगहन नवमी पर प्राकट्य महोत्सव मनाया जाता है। इस दौरान मंदिर में भजन-कीर्तन, 56 भोग, जात धोक पूजा होती है 24 घंटे मंदिर खुला रहता है।