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एग्रीस्टैक आईडी अनिवार्य, बटाईदारों को भी मौका... छत्तीसगढ़ में किसानों के धान बेचने के बदले नियम, 1 जुलाई से शुरू होगा रजिस्ट्रेशन

खास बात यह है कि इस बार वन पट्टाधारी, डुबान क्षेत्र, कोटवार, बटाईदार और संस्थागत किसानों को भी एग्रीस्टैक पोर्टल से जोड़ दिया गया है। सरकार का दावा है...और पढ़ें

By Jitendra DahiyaEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Fri, 26 Jun 2026 10:51:11 AM (IST)Updated Date: Fri, 26 Jun 2026 10:56:17 AM (IST)
एग्रीस्टैक आईडी अनिवार्य, बटाईदारों को भी मौका... छत्तीसगढ़ में किसानों के धान बेचने के बदले नियम, 1 जुलाई से शुरू होगा रजिस्ट्रेशन
धान बेचने के नियम बदले, अब बिना एग्रीस्टैक आइडी नहीं होगी खरीदी (AI से जनरेट इमेज)

HighLights

  1. धान बेचने के नियम बदले, अब बिना एग्रीस्टैक आइडी नहीं होगी खरीदी
  2. एक जुलाई से शुरू होगा किसान पंजीयन
  3. वन पट्टाधारी से लेकर बटाईदार तक सभी को कराना होगा अपडेट

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। इस बार समर्थन मूल्य पर धान बेचने की तैयारी कर रहे किसानों के लिए कई नए नियम लागू किए गए हैं। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान बेचने के लिए एग्रीस्टैक आइडी अनिवार्य कर दी गई है। खाद्य विभाग ने एक जुलाई से 31 अक्टूबर तक किसान पंजीयन और संशोधन की समय-सीमा तय की है।

पिछले वर्ष पंजीकृत किसानों को राहत देते हुए दोबारा आवेदन से छूट दी गई है। लेकिन खसरा, बैंक खाते, नामांतरण या बंटवारे में बदलाव होने पर संशोधन कराना जरूरी होगा। खास बात यह है कि इस बार वन पट्टाधारी, डुबान क्षेत्र, कोटवार, बटाईदार और संस्थागत किसानों को भी एग्रीस्टैक पोर्टल से जोड़ दिया गया है। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था से धान खरीदी प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और व्यवस्थित होगी।


पुराने किसान सीधे होंगे अपडेट

खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में पंजीकृत किसानों को फिर से नया आवेदन नहीं करना पड़ेगा। ऐसे किसानों की पुरानी जानकारी को ही अगले सत्र के लिए मान्य माना जाएगा। हालांकि यदि किसान ने नई जमीन खरीदी है, नामांतरण कराया है या खसरे में बदलाव हुआ है, तो उसे संशोधन कराना होगा। इसके लिए विभागीय वेबसाइट के ऑनलाइन सोसाइटी माड्यूल में जानकारी अपडेट की जाएगी। इससे लाखों किसानों को दोबारा लंबी प्रक्रिया से राहत मिलेगी।

अब बटाईदार और वन पट्टाधारी भी दायरे में

नई व्यवस्था में पहली बार वन पट्टाधारी, डुबान क्षेत्र के किसान, कोटवार और संस्थागत कृषकों को भी एग्रीस्टैक पंजीयन के तहत शामिल किया गया है। वहीं अधिया, रेगहा, बटाई और लीज पर खेती करने वाले किसानों को आथराइजेशन मॉड्यूल से अधिकृत करना होगा। शासन ने निर्देश दिए हैं कि ऐसे किसानों की भूमि और खसरों की डिजिटल मैपिंग समय पर पूरी की जाए। इससे धान खरीदी के दौरान विवाद और फर्जीवाड़े की संभावना कम होगी।

आधार और बायोमेट्रिक से होगी खरीदी

धान खरीदी इस बार भी आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली से की जाएगी। किसान स्वयं या नामांकित नामिनी के जरिये धान बेच सकेंगे। पंजीयन के दौरान किसान और एक नामिनी का आधार नंबर दर्ज करना अनिवार्य रहेगा। विभाग ने हर खरीदी केंद्र में ट्रस्टेड पर्सन नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इससे फर्जी खरीदी और बिचौलियों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी तथा पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी।

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31 अक्टूबर तक मिलेगा मौका

शासन ने किसान पंजीयन, संशोधन और डिजिटल क्राप सर्वे के लिए अंतिम तारीख 31 अक्टूबर तय की है। नया पंजीयन, खसरा मैपिंग, बैंक खाते और नामिनी से जुड़ी जानकारी इसी अवधि में अपडेट करनी होगी। वहीं नामिनी संशोधन धान खरीदी अवधि तक जारी रहेगा। विभाग ने सभी कलेक्टरों और समितियों को समय-सीमा में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। किसानों को सलाह दी गई है कि अंतिम समय की भीड़ से बचने के लिए समय रहते पंजीयन करा लें।