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एमपी में 1.45 लाख साल के पेड़ों पर चली आरी, छत्तीसगढ़ के जंगलों में भी बोरर अलर्ट, वन विभाग ने शुरू किया सर्वे

प्रदेश के साल बहुल वन क्षेत्रों में बोरर की स्थिति का पता लगाने के लिए सर्वे शुरू किया गया है। विभागीय टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पेड़ों की स्थिति औ...और पढ़ें

By Vakesh SahuEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Fri, 18 Sep 2026 08:11:38 PM (IST)Updated Date: Fri, 18 Sep 2026 08:11:38 PM (IST)
एमपी में 1.45 लाख साल के पेड़ों पर चली आरी, छत्तीसगढ़ के जंगलों में भी बोरर अलर्ट, वन विभाग ने शुरू किया सर्वे
छत्तीसगढ़ के राजकीय वृक्ष 'साल' पर खतरा।

HighLights

  1. छत्तीसगढ़ के राजकीय वृक्ष 'साल' पर खतरा
  2. प्रदेश के जंगलों की सुरक्षा में जुटा विभाग
  3. बस्तर से सरगुजा तक बोरर का फैला खतरा

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। मध्यप्रदेश के जंगलों में साल के पेड़ों पर बोरर कीट के बड़े प्रकोप के बाद अब छत्तीसगढ़ के वन विभाग ने भी निगरानी बढ़ा दी है। प्रदेश के साल बहुल वन क्षेत्रों में बोरर की स्थिति का पता लगाने के लिए सर्वे शुरू किया गया है। विभागीय टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पेड़ों की स्थिति और कीट के संभावित संक्रमण की निगरानी कर रही हैं।

संक्रमण मिलने पर स्थानीय स्तर पर नियंत्रण के उपाय किए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर कीटनाशक के इस्तेमाल के साथ संक्रमित पेड़ों की कटाई का विकल्प भी अपनाया जा सकता है। मध्यप्रदेश में स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और आसपास के क्षेत्रों में बोरर के प्रकोप के बाद करीब 1.45 लाख साल के पेड़ों की कटाई को मंजूरी दी गई है।


छत्तीसगढ़ में पहले भी दिखा चुका है असर

छत्तीसगढ़ में साल बोरर का खतरा नया नहीं है। कोरबा वन मंडल के बालको क्षेत्र में 2022-23 के दौरान करीब 1,200 साल के पेड़ों को बोरर से प्रभावित पाया गया था। विभाग ने दवा का छिड़काव करने के साथ पेड़ों के उन हिस्सों को भी उपचारित किया, जहां से कीट के प्रवेश के संकेत मिले थे।

इसके बावजूद संक्रमण को पूरी तरह नियंत्रित नहीं किया जा सका। बाद में केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से अनुमति मिलने के बाद 923 प्रभावित पेड़ों की कटाई का रास्ता साफ हुआ। विज्ञानी अध्ययनों में भी मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के साल वनों में बोरर के प्रकोप का उल्लेख मिलता है।

पेड़ के तने के भीतर सुरंग बनाता है कीट

साल हार्टवुड बोरर का वैज्ञानिक नाम हाप्लोसेरेंबिक्स स्पिनिकार्निस है। मानसून के आसपास वयस्क कीट निकलते हैं और साल के कमजोर, गिरे या क्षतिग्रस्त पेड़ों की ओर आकर्षित होते हैं। प्रकोप बढ़ने पर स्वस्थ पेड़ भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।

मादा पेड़ की छाल की दरारों में अंडे देती है। अंडों से निकले लार्वा पहले छाल के नीचे और फिर लकड़ी के भीतर सुरंग बनाते हैं। संक्रमित पेड़ के तने पर छेद, लकड़ी का बुरादा और रेजिन का रिसाव इसके प्रमुख संकेतों में शामिल हैं।

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क्यों महत्वपूर्ण है छत्तीसगढ़ के लिए?

छत्तीसगढ़ के जंगलों में साल का बड़ा हिस्सा है और बस्तर से लेकर सरगुजा, कोरबा और अन्य वन क्षेत्रों में इसके विस्तृत वन क्षेत्र मौजूद हैं। प्रदेश के जंगलों के लगभग एक तिहाई (लगभग 33 प्रतिशत) हिस्से में साल (सराई) का पेड़ फैला हुआ है। साल छत्तीसगढ़ का राजकीय वृक्ष है। जबकि छत्तीसगढ़ में लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा जंगल में है।

मध्यप्रदेश में बोरर कीट के प्रकोप को देखते हुए छत्तीसगढ़ के साल वन क्षेत्रों में भी निगरानी बढ़ाई गई है। संबंधित वन क्षेत्रों में सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के दौरान यदि कहीं बोरर का संक्रमण पाया जाता है तो उसकी स्थिति के आधार पर आवश्यक नियंत्रण उपाय किए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर कीटनाशक का छिड़काव और संक्रमित पेड़ों को हटाने की कार्रवाई भी की जाएगी।- कौशलेन्द्र कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं संचालक, छत्तीसगढ़ वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान