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छत्तीसगढ़ में अटकी 8,255 बच्चों की स्कॉलरशिप, 2.5 महीने में भी ब्योरा नहीं दे पाए निकाय, सूडा ने दिया 7 दिन का अल्टीमेटम

शहरों को साफ रखने और स्वच्छता की जिम्मेदारी निभाने वाले सीवर और कचरा बीनने वाले कर्मियों के बच्चों की प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति सरकारी लेटलतीफी में उलझ...और पढ़ें

By Abhishek RaiEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Tue, 13 Oct 2026 05:38:06 PM (IST)Updated Date: Tue, 13 Oct 2026 05:38:06 PM (IST)
छत्तीसगढ़ में अटकी 8,255 बच्चों की स्कॉलरशिप, 2.5 महीने में भी ब्योरा नहीं दे पाए निकाय, सूडा ने दिया 7 दिन का अल्टीमेटम
सरकारी लेटलतीफी का शिकार हुई प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति।

HighLights

  1. सरकारी लेटलतीफी का शिकार हुई प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति
  2. सीवर व कचरा बीनने वालों के बच्चों की छात्रवृत्ति अटकी
  3. 8,255 स्वच्छता कर्मियों के बच्चों को छात्रवृत्ति का इंतजार

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। शहरों को साफ रखने और स्वच्छता की जिम्मेदारी निभाने वाले सीवर और कचरा बीनने वाले कर्मियों के बच्चों की प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति सरकारी लेटलतीफी में उलझ गई है। जुलाई में जानकारी मांगे जाने के ढाई माह बाद भी नगरीय निकाय पात्र बच्चों का ब्योरा नहीं जुटा पाए हैं।

राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) ने नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को स्मरण पत्र जारी कर सात दिन का समय देते हुए जानकारी मांगी है। मामला नमस्ते (नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम) योजना के तहत सत्यापित सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मचारियों तथा कचरा बीनने वाले श्रमिकों के बच्चों को प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति दिलाने का है।


8,255 कर्मचारियों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति की पहल अटकी

प्रदेश में इस योजना के तहत 1,362 सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मचारी और 6,893 कचरा बीनने वाले श्रमिक शामिल हैं। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग ने स्वच्छता कर्मियों के बच्चों को छात्रवृत्ति योजना में शामिल करने के निर्देश दिए हैं।

लोक शिक्षण संचालनालय ने पात्र बच्चों की सूची भी उपलब्ध करा दी है। इसके बावजूद निकायों से जानकारी नहीं मिलने के कारण लाभ दिलाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।

सूडा ने 24 जुलाई को पहली बार पत्र आदेश जारी कर ब्योरा मांगा था। शहरों की सफाई में दिन-रात जुटे परिवारों के बच्चों की पढ़ाई को सहारा देने वाली योजना खुद सरकारी सुस्ती की धूल फांक रही है।

चार महीने में पत्र, फिर भी इंतजार

छात्रवृत्ति का मामला कई स्तरों पर पत्राचार से गुजर चुका है। केंद्र ने आठ जून को राज्य सरकार को पत्र भेजा था। इसके बाद 15 जून को राज्य शासन ने संबंधित विभाग के आयुक्त को और 30 जून को विभाग ने सूडा को पत्र लिखा। सूडा ने 24 जुलाई को निकायों से जानकारी मांगी, लेकिन अब तक ब्योरा नहीं मिल सका है।

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एक नजर में हुए पत्राचार

  • 8 जून: केंद्र से राज्य सरकार को मिला था पत्र।
  • 15 जून: राज्य शासन ने आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के आयुक्त को पत्र लिखा।
  • 30 जून: आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग ने सूडा से जानकारी मांगी।
  • 24 जुलाई: सूडा ने पात्र बच्चों का ब्योरा जुटाने के लिए नगरीय निकायों को पत्र जारी किया।
  • 8 अक्टूबर: सूडा ने निकायों को दोबारा पत्र लिखकर सात दिन में ब्योरा देने के दिए निर्देश।