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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 15, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Chhattisgarh News: सीजीएमएससी की बड़ी लापरवाही, अस्थमा और एलर्जी की दवा अमानक, उपयोग पर तत्काल रोक

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। इस बार अस्थमा, एलर्जी, गठिया और आंतों में सूजन के इलाज में दी ज...और पढ़ें

By Akash PandeyEdited By: Akash Pandey
Publish Date: Tue, 15 Jul 2025 09:40:30 AM (IST)Updated Date: Tue, 15 Jul 2025 09:40:30 AM (IST)
Chhattisgarh News: सीजीएमएससी की बड़ी लापरवाही, अस्थमा और एलर्जी की दवा अमानक, उपयोग पर तत्काल रोक
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन की बड़ी लापरवाही(फाइल फोटो)

HighLights

  1. छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन की बड़ी लापरवाही सामने आई है।
  2. अस्थमा और आंतों में सूजन सहित कई बीमारियों में मिलने वाली दवा पर संदेह।
  3. दवा बांटने को लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश, आदेश का इंतजार करें।

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। प्रदेश में मरीजों की सेहत से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन (सीजीएमएससी) की लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। इस बार अस्थमा, एलर्जी, गठिया और आंतों में सूजन के इलाज में दी जाने वाली प्रेडनिसोलोन टैबलेट (दवा कोड D-427) के एक बैच की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं।

संभावित खामी सामने आने के बाद दवा निगम ने इसके उपयोग और वितरण पर रोक लगा दी है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिए हैं कि जब तक अगला आदेश न मिले, तब तक इस टैबलेट का इस्तेमाल और वितरण न किया जाए।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रेडनिसोलोन टैबलेट बैच नंबर T-240368 (निर्माण तिथि: 01 जुलाई 2024, समाप्ति तिथि: 30 जून 2026, निर्माता: सनलाइफ साइंसेस) की गुणवत्ता संदिग्ध मानी जा रही है। इस टैबलेट का उपयोग सूजन, एलर्जी, अस्थमा, त्वचा रोग, जोड़ों के दर्द और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज में किया जाता है।

क्या है खतरा?

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, संदेह है कि यह दवा अमानक गुणवत्ता की हो सकती है। जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन प्राथमिक रूप से यह माना जा रहा है कि दवा में कोई तकनीकी या निर्माण संबंधी खामी हो सकती है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी सीजीएमएससी द्वारा खरीदी गई दवाओं और सामग्री में गंभीर खामियां पाई जा चुकी हैं। बीते सप्ताह ही सर्जिकल ब्लेड की गुणवत्ता खराब होने का मामला सामने आया था।

अस्पतालों को स्पष्ट निर्देश

रायपुर और बलौदाबाजार जिले के सभी सरकारी अस्पतालों, सीएचसी, पीएचसी और शहरी स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि उनके पास यह दवा मौजूद है, तो उसे अलग सुरक्षित स्थान पर रख दें और किसी मरीज को इसका वितरण न करें। आदेशों के उल्लंघन पर जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी।

बार-बार दोहराई जा रही लापरवाही

यह पहला मामला नहीं है जब सीजीएमएससी द्वारा खरीदी गई दवाएं अमानक पाई गई हों। पिछले एक वर्ष में कई बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रेडनिसोलोन जैसी स्टेरॉइड दवा शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करती है। यदि यह खराब गुणवत्ता की हो, तो इसके दुष्परिणाम जानलेवा हो सकते हैं। बिना परीक्षण के इस तरह की दवाओं को अस्पतालों तक भेजना सीधे मरीजों की जान से खिलवाड़ करने जैसा है।

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