ऐसा है आंवले का वैज्ञानिक महत्व, इसलिए आंवला नवमी पर होती है पूजा
ऐसी मान्यता है कि विटामिन से भरपूर आंवला फल में भगवान शंकर और भगवान विष्णु समाहित है। ...और पढ़ें
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Publish Date: Sat, 17 Nov 2018 01:52:27 PM (IST)Updated Date: Sat, 17 Nov 2018 01:56:17 PM (IST)

रायपुर। धर्मग्रंथों में कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि को 'आंवला नवमी" के रूप में मनाए जाने का विधान है। ऐसी मान्यता है कि विटामिन से भरपूर आंवला फल में भगवान शंकर और भगवान विष्णु समाहित है। इसी मान्यता के चलते आंवला फल को पूजकर दोनों देवताओं की आराधना की जाती है।
शनिवार को आंवला नवमी श्रद्धा-उल्लास से मनाई जाएगी। कुछ सालों पहले तक शहर के आसपास के इलाकों में आंवला पेड़ जगह-जगह पाए जाते थे। जब से बहुमंजिला इमारतें और कॉलोनियां विकसित हुई हैं, तब से आंवला पेड़ लगभग खत्म से हो गए हैं। शहर के गिने-चुने पार्कों में आंवला पेड़ है जहां पूजा करने महिलाओं का हुजूम उमड़ेगा।
पेड़ के नीचे बैठकर करेंगी भोजन महिलाएं
अपने घर से खाना टिफिन में लेकर मोतीबाग पहुंचेंगी। यहां पापों का नाश करने और पुण्य को अक्षत बनाए रखने के लिए आंवला पेड़ की पूजा की जाएगी। पूजा-अर्चना करके आंवला पेड़ के छाया में बैठकर परिवार समेत भोजन ग्रहण करेंगी। भोजन ग्रहण करने के बाद विविध तरह के खेल खेलकर बचपन की यादों को ताजा करेंगी।
'तुलसी और बेल" का गुण
महामाया मंदिर के पुजारी पं. मनोज शुक्ला के अनुसार आंवला पेड़ को पूजे जाने की शुरुआत माता लक्ष्मी ने की थी। शास्त्रों में वर्णित है कि एक बार माता लक्ष्मी धरती लोक का भ्रमण करने निकली। उन्हें भगवान विष्णु व शिव की पूजा एक साथ करने की इच्छा जागृत हुई। उन्होंने सोचा कि दोनों की पूजा वे एक साथ कैसे करेंगी तभी ख्याल आया कि तुलसी एवं बेल का गुण एक साथ आंवले में पाया जाता है।
तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय है और बेल भगवान शिव को। यह सोचकर उन्होंने आंवले के वृक्ष को शिव और विष्णु का प्रतीक मानकर पूजा शुरू की। पूजा से प्रसन्न् होकर विष्णु-शिव प्रकट हुए तब मां लक्ष्मी ने दोनों को आंवला वृक्ष के नीचे बैठकर भोजन करवाया। माता लक्ष्मी ने कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि को आंवला की पूजा की थी, तब से इसी दिन को आंवला नवमी के रूप में पूजा जाने लगा।
आंवले का वैज्ञानिक महत्व
पुरातन चिकित्सा पद्धति और चरक संहिता में आंवला के महत्व को दर्शाया गया है। वैज्ञानिक भी मानते हैं कि आंवला आंखों, बालों और त्वचा के लिए फायदेमंद है। विभिन्न् तरह की बीमारियों जैसे डायबिटीज, एसिडिटी, पथरी, रक्त की कमी, आंखों की ज्योति बढ़ाने, मोतियाबिंद से छुटकारा पाने, बुखार, दांत व मसूढ़ों के दर्द, शरीर से गर्मी भगाने, हिचकी, उल्टी में आंवला के रस को शहद, मिश्री के साथ सेवन करने से राहत मिलती है।