
राजनांदगांव। Rajnandgaon News : सचिव कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी, कृषि उत्पादन आयुक्त डा. एम. गीता ने आज ग्राम मोखला एवं मुड़पार स्थित गौठान का निरीक्षण किया। इसके साथ ही उन्होंने पेड़ के नीचे चौपाल लगाकर महिला स्वसहायता समूह की महिलाओं से बातचीत की और वर्मी कम्पोस्ट निर्माण एवं अन्य गतिविधियों की जानकारी ली।
उन्होंने कहा कि वर्मी कम्पोस्ट निर्माण का कार्य महिला स्वसहायता समूह को करना है और उन्हें अपने मेहनत का फल मिलना ही चाहिए। उन्होंने कहा कि शासन की नीति एवं योजना के अनुरूप गोधन न्याय योजना के तहत हितग्राहियों को राशि प्रदान की जा रही है। गोबर खरीदी का कार्य गौठान समिति का है न कि महिला स्वसहायता समूह का।
राज्य शासन के निर्देशों का पालन करते हुए कार्य करें। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा महिलाओं के कार्य की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए कम ऊंचाई का वर्मी टांका बनाया जा रहा है। आगे इस तरह का वर्मी टांका भी गौठानों में बनाया जाएगा। उन्होंने जमीनी स्तर पर किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली और समूह की महिलाओं से प्रशिक्षण एवं वर्मी कम्पोस्ट निर्माण के संबंध में जानकारी ली।
महिलाओं ने उपहार में सब्जी एवं फल दिए
समूह की महिलाओं ने बताया कि उनके द्वारा मोखला गौठान में 26 क्विंटल 40 किलो वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण किया गया है। डा. गीता ने कहा गौठान का विकास अच्छे से किया गया है। इसमें अधिक से अधिक महिला समूह को जोड़ने की जरूरत है और उन्हें कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने वर्मी कम्पोस्ट के अलावा गोबर का उपयोग करते हुए गोबर की लकड़ी, दीया, अगरबत्ती, गमला, अन्य वस्तुएं का निर्माण करने कहा। समूह की महिलाओं ने उन्हें उपहार में सब्जी एवं फल दिए। इसके अलावा उन्होंने ग्राम मुड़पार स्थित गौठान का निरीक्षण किया।
किसान बनकर मदद कर सकते हैं
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अधिकारी बनकर नहीं, बल्कि किसान बनकर आप उनकी मदद कर सकते हैं। गौठान में मेहनत कर समूह की महिलाओं के जीवन में परिवर्तन लाने का महत्वपूर्ण कार्य कर सकते हैं। गांव में महिलाओं की समझ अच्छी है। कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन एवं अन्य संबंधित विभाग आपसी समन्वय से मिलकर अच्छा कार्य करें।
उन्होंने वहां ईंट जोड़कर बनाए गए वर्मी टैंक एवं उनके प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र को 10 गौठान गोद लेने के लिए कहा और इसकी मानिटरिंग करने के लिए कहा। कृषि विज्ञान केंद्र के डा. बीरबल राजपूत को प्रशिक्षण एवं अन्य कार्यों में सहयोग करने निर्देश दिए। वहां बाड़ी बनाने तथा दो सीपीटी का निर्माण करने कहा।