• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • सुकमा

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 14, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Sukma Village Expulsion: छह मतांतरित परिवारों को किया बेदखल, सुकुमा में गांव की रीति-रिवाज नहीं मानने का आरोप

Sukma Village Expulsion: पंचायत के नौ गांव के लगभग 400 लोगों की विशेष ग्राम सभा में 13 मतांतरित परिवारों को बुलाकर गांव के रीति-रिवाज, परंपरा का पालन ...और पढ़ें

By Shashank Shekhar BajpaiEdited By: Shashank Shekhar Bajpai
Publish Date: Mon, 14 Apr 2025 01:40:14 PM (IST)Updated Date: Mon, 14 Apr 2025 01:40:14 PM (IST)
Sukma Village Expulsion: छह मतांतरित परिवारों को किया बेदखल, सुकुमा में गांव की रीति-रिवाज नहीं मानने का आरोप
मतांतरित परिवारों को सामान ट्रेक्टर में डालने के लिए मदद करते ग्रामीण।

HighLights

  1. इस पंचायत के नौ गांव के लगभग 400 लोगों की एक विशेष ग्राम सभा हुई।
  2. बीमारी के उपचार के झांसे में मतांतरित हुए सात परिवार ने की मूलधर्म में वापसी।
  3. छह परिवारों ने मूल धर्म में वापसी करने से इंकार कर दिया और गांव छोड़ दिया।

नईदुनिया न्यूज, सुकमा। Kari Gundam Panchayat: गांव के रीति-रिवाज नहीं मानने वाले छह मतांतरित परिवारों को ग्रामीणों ने गांव से बेदखल कर दिया। यह घटना कोंटा विकासखंड से 80 किमी दूर स्थित करीगुंडम पंचायत का है। शनिवार को इस पंचायत के नौ गांव के लगभग 400 लोगों की एक विशेष ग्राम सभा हुई।

इस बैठक में गांव के 13 मतांतरित परिवारों को बुलाकर गांव के रीति-रिवाज, परंपरा (Sukma Village social conflict) का पालन करने की बात कही गई। ग्रामीणों की समझाइश के बाद मतांतरित परिवारों में से सात परिवारों ने मूलधर्म में वापसी कर गांव के रीति-रिवाज परंपरा का पालन करने पर सहमति दी।


छह परिवार ऐसे थे, जिन्होंने मूलधर्म में वापसी करने से मना कर दिया और गांव छोड़ने (Sukma Village Expulsion) पर सहमत होकर अपना पूरा सामान लेकर चले गए। ग्राम सभा में मतांतरित परिवारों ने बताया कि लगभग दस साल पहले उन सभी ने मतांतरित समुदाय के लोगों के चर्च जाने पर बीमारी के ठीक होने की बात कहने के बाद मत परिवर्तन कर लिया था।

गांव से बाहर जाने में ग्रामीणों ने की मदद

इसके बाद से वे आदिवासी संस्कृति-परंपरा को छोड़ कर चर्च जाने लगे थे। गांव छोड़कर जाने वाले विनय कुमार ने बताया कि घर में लोग बीमार पड़ रहे थे और गांव के वड्डे (पुजारी) के पास जाने से स्वास्थ्य ठीक नहीं हो रहा था। इसके बाद साल 2015 से वे मतांतरित होकर चर्च जाने लगे। चर्च में प्रार्थना से बीमारी ठीक हुई है।

यह भी पढ़ें- HSRP Deadline Nears: हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने में मोबाइल कनेक्ट नहीं होना बना रोड़ा, 15 अप्रैल है डेड लाइन ‌

अब गांव के लोग दोबारा मूलधर्म में वापसी करने को कह रहे हैं, नहीं तो गांव छोड़कर जाने कहा है। अब वे गांव की संस्कृति और परंपरा से नहीं जुड़ना चाहते, इसलिए गांव छोड़कर जाना स्वीकार लिया है। गांव के सभी लोगों ने मिलकर छह परिवारों के सामान ट्रैक्टर में लादने में मदद भी की है।

दिनभर चली सभा, जमकर गुस्सा

करीगुंडम गांव में शनिवार की सुबह से लेकर देर शाम तक चली ग्राम सभा में मतांतरण को लेकर ग्रामीणों का जमकर गुस्सा फूटा। ग्रामीणों ने कहा कि मतांतरण से गांव की परंपरा और संस्कृति को गहरा आघात पहुंचा है। इसी तरह यदि सभी गांव की मूल परंपरा को छोड़ते जाएंगे तो एक दिन पूरी संस्कृति ही नष्ट हो जाएगी।

यह भी पढ़ें- रायपुर में नगर निगम के खोदे गड्ढे में गिरा मासूम, बाइक सवार युवक ने कूदकर बचाई जान

लोग गांव के देवी-देवता को छोड़कर बाहरी देव को पूजने जा रहे हैं। आसपास के गांव में भी ऐसी ही स्थिति बनती जा रही है। इससे सैकड़ों वर्षों की आदिवासी परंपरा नष्ट हो रही है। इसलिए गांव की संस्कृति-परंपरा को नहीं मानने वाले को गांव में रहने का कोई अधिकार नहीं है।