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छत्तीसगढ़ में विवादित बयान पर घिरीं भाजपा विधायक, भारी विरोध के बाद जताया खेद, पुलिस और वकीलों पर दिया था बयान

भाजपा विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते अपने बयान को लेकर विवादों में आ गई हैं। हालांकि बयान की आलोचना होने के बाद विधायक ने बैकफुट पर आते हुए एक वीडियो जारी...और पढ़ें

By Vinod ShriwashEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 02 Aug 2026 08:06:42 PM (IST)Updated Date: Sun, 02 Aug 2026 08:06:42 PM (IST)
छत्तीसगढ़ में विवादित बयान पर घिरीं भाजपा विधायक, भारी विरोध के बाद जताया खेद, पुलिस और वकीलों पर दिया था बयान
भाजपा विधायक पोर्ते के बयान पर बवंडर।

HighLights

  1. भाजपा विधायक पोर्ते के बयान पर बवंडर
  2. बार एसोसिएशन ने जताई कड़ी आपत्ति
  3. पुलिस और वकीलों पर दिया था बयान

नईदुनिया न्यूज, प्रतापपुर। सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते अपने बयान को लेकर विवादों में आ गई हैं। हालांकि बयान की आलोचना होने के बाद विधायक ने बैकफुट पर आते हुए एक वीडियो जारी कर खेद प्रकट किया है।

दरअसल, प्रतापपुर क्षेत्र में हरिनंदन राजवाड़े की हत्या के बाद विधायक पीड़ित परिवार से मिलने पहुंची थीं। इस दौरान उन्होंने बातचीत के दौरान वकीलों और पुलिसकर्मियों को लेकर ऐसी टिप्पणी कर दी, जिसने नया विवाद खड़ा कर दिया है। उनका बयान सामने आने के बाद अधिवक्ता समुदाय, पुलिस विभाग और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।


सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ बयान

पीड़ित परिवार के बीच बातचीत करते हुए विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते ने कहा कि वकील और पुलिसकर्मी कई बार अपराधियों को बचाने का काम करते हैं फिर अपने कर्मों का परिणाम भुगतते हैं। उन्होंने कहा कि इसीलिए पुलिस और वकीलों के बच्चे बधिर और विकलांग पैदा होते हैं, क्योंकि भगवान हर व्यक्ति के कर्मों का हिसाब रखता है और उसी के अनुसार दंड देता है।

विधायक की यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई, जिसके बाद इसे लेकर विवाद शुरू हो गया। विधायक के बयान को लेकर जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता बलराम शर्मा ने कड़ी आपत्ति जाहिर करते हुए कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि को इस प्रकार का अमर्यादित और आपत्तिजनक बयान नहीं देना चाहिए।

उनके अनुसार, अधिवक्ता न्याय व्यवस्था का अभिन्न और सम्मानित हिस्सा होते हैं तथा न्याय दिलाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में पूरे वकील समुदाय को निशाना बनाने वाली टिप्पणी न केवल अनुचित है बल्कि अधिवक्ताओं के सम्मान को भी ठेस पहुंचाती है।

कानूनी कार्रवाई की तैयारी

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाएगा। विधायक के बयान के संबंध में सूरजपुर पुलिस अधीक्षक को औपचारिक शिकायत दी जाएगी। साथ ही उन्होंने मांग करते हुए कहा कि इस पूरे मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी सार्वजनिक पद पर बैठा व्यक्ति इस तरह की टिप्पणी करने से बचे। अधिवक्ताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर संस्था का सम्मान बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।

राजनीतिक गलियारों में भी तेज हुई चर्चा

विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के बयान को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। विपक्षी दलों ने इस टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण और असंवेदनशील बताते हुए इसकी आलोचना की है। कई नेताओं ने कहा कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि से संयमित और जिम्मेदार भाषा की अपेक्षा की जाती है। विपक्ष ने विधायक से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग भी की है। दूसरी ओर सोशल मीडिया में भी इस बयान को अनुचित बताते हुए लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

खुद वकील, पति पुलिस में

जारी वीडियो में प्रतापपुर विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते ने कहा कि उनके बयान को सोशल मीडिया में तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है। वे खुद एक वकील हैं और उनके पति भी पुलिस विभाग में कार्यरत हैं फिर ऐसे में वे पुलिस और वकीलों पर विवादित बयान कैसे दे सकती हैं। उन्होंने कहा कि बावजूद इसके किसी को भी उनके बयान से ठेस पहुंची है तो वे खेद प्रकट करते हुए क्षमा मांगती हैं।

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यह था घटनाक्रम

प्रतापपुर थाना क्षेत्र के ग्राम गोंदा निवासी हरिनंदन राजवाड़े का जमीन विवाद के चलते 23 जुलाई की शाम दस आरोपितों ने चार पहिया वाहन के जरिए अपहरण कर लिया था। अपहरण के बाद बेरहमी से मारपीट कर उन्हें सड़क पर फेंक दिया था। मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी।

मामले में पुलिस ने सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर प्रतापपुर न्यायालय में पेश किया था पर न्यायालय ने पुलिस के दस्तावेजों में त्रुटि का हवाला देते हुए आरोपितों से बांड भरवाकर उन्हें छोड़ दिया था। आरोपितों की जमानत के बाद पीड़ित परिवार ने कड़ी नाराजगी जताई थी जिसके बाद पुलिस ने आरोपितों को एक दूसरे प्रकरण में गिरफ्तार किया और न्यायालय के आदेश पर जेल भेज दिया।