
नईदुनिया न्यूज,ओड़गी। सूरजपुर जिले के ओड़गी क्षेत्र में साढ़े तीन साल के मासूम की मौत के मामले ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पागल कुत्ते के काटने के बाद बच्चे को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोहरसोप ले जाया गया, जहां से उसे जिला अस्पताल सूरजपुर रेफर किया गया था।
आरोप है कि इसके बावजूद झोलाछाप डॉक्टर रामानुज विश्वकर्मा बच्चे का इलाज करते रहे और उसके घाव पर टांके लगा दिए। 17 अक्टूबर को बच्चे की मौत हो गई।
मामले में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोहरसोप के चिकित्सक डॉ. बृजेश कुशवाहा के बयान और स्वजन की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग से निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई की मांग उठ रही है। शिकायत के अनुसार एक अक्टूबर 2026 को पागल कुत्ते ने साढ़े तीन साल के बच्चे के दोनों गाल और पैरों पर काट लिया था।
इसके बाद स्वजन बच्चे को उपचार के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोहरसोप लेकर पहुंचे। यहां से बच्चे को जिला अस्पताल सूरजपुर रेफर किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि रेफर किए जाने के बाद भी झोलाछाप डॉक्टर रामानुज विश्वकर्मा बच्चे का इलाज करते रहे। बाद में 17 अक्टूबर को बच्चे की मौत हो गई।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोहरसोप के चिकित्सक डॉ. बृजेश कुशवाहा ने बताया कि पागल कुत्ते के काटने के बाद बच्चे के घाव पर टांके लगाने को लेकर उन्होंने रामानुज विश्वकर्मा को मना किया था। डॉ कुशवाहा के अनुसार रामानुज विश्वकर्मा ने फोन कर बताया था कि वह बच्चे के घाव पर टांके लगा चुके हैं और बच्चा ठीक हो जाएगा।
डॉक्टर ने बताया कि उन्होंने इस मामले में टांके नहीं लगाने की सलाह दी थी, लेकिन इसके बावजूद टांके लगा दिए गए। बाद में बच्चे की मौत हो गई।
पागल कुत्ते के काटने के मामले में रेबीज से बचाव के लिए समय पर उचित चिकित्सा बेहद जरूरी होती है। ऐसे मामलों में घाव की चिकित्सकीय जांच, घाव की उचित सफाई और रेबीज से बचाव के लिए आवश्यक उपचार का निर्णय योग्य चिकित्सक द्वारा किया जाना चाहिए।
घाव पर टांके लगाने का निर्णय भी चिकित्सकीय स्थिति के आधार पर लिया जाता है। ऐसे में इस मामले में बच्चे को दिए गए उपचार, रेफर किए जाने के बाद की परिस्थितियों और मौत के वास्तविक कारणों की चिकित्सकीय जांच आवश्यक है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोहरसोप के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी की ओर से 26 अक्टूबर 2026 को मामले की जांच और उचित कार्रवाई के लिए खण्ड चिकित्सा अधिकारी को पत्र जारी किया गया है। पत्र के साथ रेफर पर्ची और शिकायत आवेदन की छायाप्रति संलग्न होने का उल्लेख है।
इससे मामला स्वास्थ्य विभाग के संज्ञान में आने की बात सामने आई है। अब जरूरी है कि विभाग दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर निष्पक्ष जांच करे। स्वास्थ्य विभाग को रामानुज विश्वकर्मा की शैक्षणिक योग्यता, चिकित्सा संबंधी पंजीयन और इलाज करने की वैधता की जांच करनी चाहिए।
चिकित्सा अधिकारी डॉ. बृजेश कुशवाहा ने ग्रामीणों से अपील की है कि कुत्ते के काटने या किसी अन्य गंभीर बीमारी की स्थिति में झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे इलाज न कराएं। योग्य चिकित्सक की सलाह मानें और समय पर सरकारी अस्पताल या उचित चिकित्सा केंद्र पहुंचें।
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से ब्लॉक मुख्यालय और ग्रामीण क्षेत्रों में बिना वैध पंजीयन के चिकित्सा कर रहे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करने की आवश्यकता भी जताई है।
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