
नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर: सरगुजा जिले के मैनपाट वन परिक्षेत्र से लगे धरमजयगढ़ वन परिक्षेत्र के बोरो रेंज में दल से बिछड़े हाथी के बच्चे का वन विभाग ने सुरक्षित रेस्क्यू किया है। कमजोर हो रहे इस बच्चे को विशेष वाहन से सूरजपुर जिले के हाथी पुनर्वास व राहत केंद्र में शिफ्ट कर दिया गया है, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उसे रखा जाएगा। गणेश चतुर्थी के दिन हाथी पुनर्वास व राहत केंद्र में नए मेहमान के आने से वन अधिकारी-कर्मचारियों में उत्साह है।
हाथी का यह बच्चा पहली बार नौ सितंबर को धरमजयगढ़ वन मंडल के बोरो रेंज में नजर आया था। इस इलाके में हाथियों का दल विचरण कर रहा था, उसी दल से यह बच्चा बिछड़ गया था। आशंका जताई जा रही है कि वह नौ सितंबर से पहले ही दल से अलग हो गया होगा, क्योंकि उसके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट देखी जा रही थी।बच्चा होने के कारण वह खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा था।
वन अधिकारी-कर्मचारी लगातार उसकी निगरानी कर रहे थे। खाने के लिए उसे केला और केले का पौधा दिया जा रहा था, जिसे वह खा भी रहा था, लेकिन अकेला होने दल के संरक्षण से वंचित होने के कारण वह दिन-ब-दिन कमजोर होता जा रहा था। उसकी निगरानी करना भी वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गई थी।
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डीएफओ ने लिखी चिट्ठी, सीसीएफ वाइल्डलाइफ ने पूरी की औपचारिकता
हाथी के बच्चे की बिगड़ती सेहत को देखते हुए धरमजयगढ़ डीएफओ सत्यदेव शर्मा ने सरगुजा के मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी डा प्रणव मिश्रा को पत्र भेजकर दल से बिछड़ जाने के कारण उत्पन्न परिस्थितियों से अवगत कराया और बच्चे को सूरजपुर जिले के हाथी राहत व पुनर्वास केंद्र में शिफ्ट करने का आग्रह किया।पत्र को संज्ञान में लेते हुए मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी डा प्रणव मिश्रा ने तत्काल सारी औपचारिकता पूरी की।
बिलासपुर से वन्य जीव विशेषज्ञ डा चंदन तथा सरगुजा संभाग में पदस्थ वन्य जीव विशेषज्ञ डा अजीत के नेतृत्व में हाथी ट्रैक्यूलाइज दल, महावत,वन अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम को विशेष वाहन के साथ बोरो रेंज भेजा गया।
ट्रेंकुलाइज कर विशेष वाहन से लाया गया हाथी के बच्चे को
बोरो रेंज में टीम ने हाथी के बच्चे को खोजा। सुरक्षित परिवेश मिलने के बाद विशेषज्ञों ने उसे ट्रेंकुलाइज किया। ट्रेंकुलाइज करने के बाद विशेष वाहन से उसे बोरो रेंज से अंबिकापुर होते हुए हाथी राहत व पुनर्वास केंद्र ले जाया गया। इस पूरी प्रक्रिया में वन्य जीव संरक्षण के सारे मानकों का पालन किया गया। वाहन की गति भी धीमी रखी गई और वाहन में विशेषज्ञ चिकित्सक तथा वन कर्मचारी मौजूद रहे।
राहत केंद्र में पहले से हैं कर्नाटक से लाए हाथी
सूरजपुर जिले के हाथी राहत व पुनर्वास केंद्र में पहले से ही कर्नाटक से लाए गए प्रशिक्षित हाथी और उनके बच्चे रहते हैं। अब गणेश चतुर्थी के दिन वहां यह नया मेहमान पहुंच गया है। सरगुजा के मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी डा प्रणव मिश्रा ने बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सक तथा प्रशिक्षित महावत व कर्मचारियों की देखरेख में हाथी का बच्चा रहेगा। यहां बेहतर तरीके से उसका लालन-पालन हो सकेगा। उसका स्वास्थ्य स्थिर है। बेहतर खान पान व देखरेख से उसके स्वास्थ्य में निश्चित रूप से तेजी से सुधार होगा।