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सूरजपुर में 64 लाख का घोटाला, व्यावसायिक शिक्षा की राशि में गड़बड़ी, FIR के आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं

सूरजपुर में 32 स्कूलों के लिए आई 64 लाख की व्यावसायिक शिक्षा राशि में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। कलेक्टर जांच में 17 गैर-पात्र स्कूलों को राशि बां...और पढ़ें

By Anang Pal DixitEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Sun, 11 Oct 2026 05:58:00 PM (IST)Updated Date: Sun, 11 Oct 2026 05:58:00 PM (IST)
सूरजपुर में 64 लाख का घोटाला, व्यावसायिक शिक्षा की राशि में गड़बड़ी, FIR के आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं
प्रतीकात्मक चित्र

HighLights

  1. 64 लाख की व्यावसायिक शिक्षा राशि में गड़बड़ी उजागर हुई।
  2. कलेक्टर जांच में तत्कालीन DEO और प्रोग्रामर दोषी पाए गए।
  3. FIR के निर्देश के एक महीने बाद भी अपराध दर्ज नहीं हुआ।

नईदुनिया प्रतिनिधि, सूरजपुर: सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा से जोड़कर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए जारी 64 लाख रुपये की राशि में कथित वित्तीय गड़बड़ी का मामला अब कार्रवाई में देरी को लेकर सवालों के घेरे में है।

कलेक्टर स्तर की जांच में अनियमितता सामने आने के बाद तत्कालीन सहायक प्रोग्रामर अमित पड़वार की सेवा समाप्त की जा चुकी है। वहीं, तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी अजय मिश्रा और बर्खास्त प्रोग्रामर के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी जारी हो चुके हैं। इसके बावजूद करीब एक महीने बाद भी अपराध दर्ज नहीं होने से विभागीय कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं।


आखिर वित्तीय अनियमितता की जांच, जिम्मेदारी तय होने और एफआईआर के निर्देश के बाद भी कार्रवाई किस स्तर पर अटकी है। मामला वर्ष 2025-26 में सूरजपुर जिले के शासकीय हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा के लिए आवंटित राशि से जुड़ा है।

राज्य शासन से 32 विद्यालयों के लिए दो-दो लाख रुपये के हिसाब से कुल 64 लाख रुपये प्राप्त हुए थे। नियमानुसार संबंधित विद्यालयों को इस राशि से व्यावसायिक शिक्षा से जुड़ी सामग्री खरीदनी थी, ताकि विद्यार्थियों को कौशल आधारित प्रशिक्षण मिल सके। आरोप है कि राशि के आवंटन और सामग्री वितरण में नियमों की अनदेखी की गई तथा पात्र विद्यालयों के बजाय अन्य स्कूलों को राशि आवंटित कर दी गई।

32 में से 17 स्कूलों के चयन पर जांच में उठे सवाल- इस मामले की शिकायत चंद्रपाल कुशवाहा ने दो मई 2026 को कलेक्टर रेना जमील से की थी। शिकायत की जांच के लिए डिप्टी कलेक्टर रमेश मोर और जिला कोषालय अधिकारी की टीम गठित की गई। जांच में सामने आया कि व्यावसायिक शिक्षा के लिए निर्धारित 32 विद्यालयों में से चिन्हित 15 स्कूलों को ही दो-दो लाख रुपये दिए गए, जबकि शेष 17 गैर-व्यावसायिक शिक्षा वाले स्कूलों को भी दो-दो लाख रुपये आवंटित किए गए।

इस तरह राशि के आवंटन में गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया। कलेक्टर ने कार्रवाई की अनुशंसा के साथ जांच प्रतिवेदन राज्य शासन को भेजा था। इसके बाद शासन के आदेश पर तत्कालीन सहायक प्रोग्रामर अमित पड़वार की सेवाएं समाप्त कर दी गईं।

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11 सितंबर के पत्र के बाद भी एफआइआर नहीं

मामले में समग्र शिक्षा राज्य परियोजना कार्यालय, रायपुर के उपसंचालक दिनेश कुमार कौशिक ने 11 सितंबर को कलेक्टर सूरजपुर को पत्र जारी कर तत्कालीन डीईओ अजय मिश्रा और बर्खास्त सहायक प्रोग्रामर अमित पड़वार के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अब तक अपराध दर्ज नहीं होने की स्थिति ने कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रशासनिक स्तर पर आदेश की प्रति नहीं मिलने का हवाला दिए जाने की बात सामने आ रही है। ऐसे में सवाल है कि जब जांच प्रतिवेदन और कार्रवाई के निर्देश जारी हो चुके हैं, तो संबंधित आदेश के क्रियान्वयन में देरी क्यों हो रही है।

पहले भी विवादों में रहे थे तत्कालीन डीईओ

तत्कालीन डीईओ अजय मिश्रा के कार्यकाल में युक्तियुक्तकरण के तहत स्थानांतरित शिक्षकों के तबादलों को लेकर भी शिकायतें सामने आई थीं। आरोप था कि सेवानिवृत्ति से पहले जून में नियमों की अनदेखी कर कुछ शिक्षकों के इच्छानुसार तबादले किए गए। इस मामले में भी कलेक्टर स्तर पर जांच कराए जाने की जानकारी है। हालांकि इसकी जांच की वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं है।

गौरतलब है कि नईदुनिया ने 27 सितंबर को 64 लाख की गड़बड़ी में एफआईआर के निर्देश शीर्षक से खबर प्रकाशित कर मामले को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं होना कार्रवाई की गति पर सवाल खड़े करता है।

वर्जन

संबंधित निर्देश प्राप्त हो चुका है। मामले में एफआइआर दर्ज कराए जाने की प्रक्रिया जारी है।

अशोक सिन्हा डीईओ सूरजपुर