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सूरजपुर: बतरा बांध में पलटीं दो नावें, छह ने तैरकर बचाई जान, दो ग्रामीणों की डूबने से दर्दनाक मौत

सूरजपुर जिले के करंजी चौकी क्षेत्र अंतर्गत बतरा बांध में सोमवार देर रात मछली पकड़ने गए 9 ग्रामीणों की दो नावें पलट गईं। इस हादसे में 6 लोग तैरकर बाहर ...और पढ़ें

By Anang Pal DixitEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Wed, 24 Jun 2026 03:18:25 PM (IST)Updated Date: Wed, 24 Jun 2026 03:18:25 PM (IST)
सूरजपुर: बतरा बांध में पलटीं दो नावें, छह ने तैरकर बचाई जान, दो ग्रामीणों की डूबने से दर्दनाक मौत
रेस्क्यू आपरेशन के दौरान बांध किनारे जुटी ग्रामीणों की भीड़

HighLights

  1. रात के अंधेरे में मौत से लड़े नौ ग्रामीण; छह ने तैरकर बचाई जान
  2. बतरा बांध में डूबी दो नाव, दो की मौत, तीसरे की तलाश
  3. बतरा बांध में सुरक्षा इंतजाम पूरी तरह फेल

नईदुनिया न्यूज, बिश्रामपुर: सूरजपुर जिले के करंजी चौकी क्षेत्र स्थित बतरा बांध में देर रात दो नावों के पलट जाने से तीन ग्रामीण बांध के गहरे पानी में डूब गए। मंगलवार को नगर सेना की डीडीआरएफ टीम ने घंटों चले रेस्क्यू आपरेशन के बाद दो ग्रामीणों के शव बरामद कर लिए, जबकि एक अन्य ग्रामीण की तलाश देर शाम तक जारी रही।

मृतकों के गांव रांई के सलेहापारा में मातम पसरा हुआ है, वहीं बांध में सुरक्षा इंतजामों और प्रतिबंध के बावजूद जारी मत्स्याखेट को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार रांई गांव के सलेहापारा तथा आसपास के ग्रामीण सोमवार रात करीब 11 बजे दो नावों में सवार होकर बतरा बांध में मछली पकड़ने पहुंचे थे। दल में कुल नौ लोग शामिल थे। बताया जाता है कि एक बार जाल डालकर मछली पकड़ने के बाद वे रात करीब दो से तीन बजे के बीच दोबारा जाल डाल रहे थे। इसी दौरान दोनों नावें अनियंत्रित होकर पलट गईं। नाव पलटते ही सभी ग्रामीण पानी में जा गिरे। छह लोगों ने किसी तरह तैरकर अपनी जान बचा ली, लेकिन तीन ग्रामीण गहरे पानी में डूब गए और लापता हो गए।


रेस्क्यू अभियान में मिले शव

घटना की जानकारी मंगलवार सुबह मिलते ही करंजी पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और नगर सेना की डीडीआरएफ टीम मौके पर पहुंची। बांध में विशेष रेस्क्यू अभियान चलाया गया। घंटों की तलाश के बाद टीम ने दो ग्रामीणों के शव बरामद कर लिए। मृतकों की पहचान जगलाल पैकरा (45 वर्ष) पिता सुखन पैकरा तथा समयलाल पैकरा (55 वर्ष) पिता कवलसाय पैकरा, निवासी सलेहापारा, ग्राम रांई के रूप में हुई है। वहीं कवलसाय राजवाड़े निवासी उचडीह का देर शाम तक कोई सुराग नहीं मिल सका था। उसकी तलाश के लिए अभियान जारी है। मौके पर भटगांव तहसीलदार शिवनारायण राठिया तथा पूर्व विधायक पारसनाथ राजवाड़े भी पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। बरामद शवों को पोस्टमार्टम के लिए सुरक्षित रखवाया गया है।

प्रतिबंध के बावजूद हो रहा था मत्स्याखेट

जिला प्रशासन द्वारा 15 जून से जलाशयों, एनीकटों और बांधों में मत्स्याखेट पर प्रतिबंध लागू किया गया है। इसके बावजूद बतरा बांध में लगातार रात के समय मछली पकड़ने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रतिबंध के बाद भी बांध में नियमित रूप से मत्स्याखेट किया जा रहा था। कुछ लोगों ने स्थानीय मछुआरा समिति की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं, हालांकि समिति के सदस्य इन आरोपों को निराधार बता रहे हैं। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि हादसे के बाद इस बात की भी जांच की जाएगी कि प्रतिबंध के बावजूद ग्रामीण बांध में कैसे पहुंचे और निगरानी व्यवस्था में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई।

बांध में कई हादसे

बतरा बांध में यह पहला हादसा नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार पिछले कई वर्षों में यहां डूबने से डेढ़ दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद सुरक्षा संबंधी पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बांध क्षेत्र में चेतावनी बोर्ड, रात्रिकालीन निगरानी, सुरक्षा घेरा और नियमित गश्त की व्यवस्था मजबूत नहीं है। यदि पूर्व की घटनाओं से सबक लेकर प्रभावी सुरक्षा उपाय किए गए होते तो संभवतः इस हादसे को टाला जा सकता था।

जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर

फिलहाल करंजी पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हादसा केवल नाव पलटने से हुआ या इसके पीछे अन्य कारण भी थे। साथ ही प्रतिबंधित अवधि में मत्स्याखेट किए जाने की परिस्थितियों की भी जांच की जा रही है। इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि प्रशासनिक प्रतिबंधों का पालन सुनिश्चित करने और जलाशयों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए आखिर और कितनी जानें जाने के बाद ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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