
भारतीय सेना ने उग्रवादियों के खिलाफ सफल कार्रवाई म्यांमार से लगी सीमा पर की, लेकिन उससे परेशान पाकिस्तान हुआ। उसकी मुश्किल समझी जा सकती है। अपनी जमीन पर उसने दशकों से भारत विरोधी आतंकवादियों को पनाह दे रखी है। इसीलिए सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्द्धन सिंह राठौर का बयान सही निशाने पर लगा। राठौर ने कहा कि 'बेशक यह (म्यांमार में भारतीय कार्रवाई) उन देशों के लिए संदेश है, जो आतंकवादी इरादे रखते हैं। चाहे वो पश्चिम में हों अथवा उस खास देश में जहां अभी हम गए हैं।"
इससे भड़का पाकिस्तान भारत को धमकाने पर उतर आया। कहा कि 'पाकिस्तान म्यांमार नहीं है", इसलिए उसकी सीमा में घुसने का 'दुस्साहस" भारत न करे। पूर्व पाकिस्तानी राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ ने तो परमाणु हथियार के इस्तेमाल की भभकी दे दी। कहा कि पाकिस्तान ने एटम बम शब-ए-बारात (मुस्लिम त्योहार) पर फोड़ने के लिए नहीं बनाए हैं।
इन प्रतिक्रियाओं का मतलब क्या है, इसे रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने बखूबी समझाया है। पर्रिकर ने कहा कि 'जो भारत के नए तेवर से डर रहे हैं, उनकी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं।" निर्विवाद है कि म्यांमार में पनाह लिए उग्रवादियों को मार गिराने के बाद भारत सरकार और सेना के हौसले बुलंद हैं। इसके बावजूद भारतीय रणनीतिकार इससे परिचित हैं कि पाकिस्तान के अंदर घुसकर ठीक वैसी ही कार्रवाई करना कहीं अधिक जोखिम भरा होगा। यह तभी संभव है, जब भारत खुलकर पाकिस्तान से युद्ध करने का फैसला कर ले। यह तो पाकिस्तान के नेता भी जानते होंगे कि भारत अपनी तरफ से युद्ध को आमंत्रित नहीं करता। फिर भी उनके बयानों में डर झलक रहा है तो उसकी वजह भारतीय रक्षा चिंतन की दिशा में आया परिवर्तन है।
कुछ रोज पहले मनोहर पर्रिकर ने कांटे से कांटा निकालने की बात कही थी। इसका मतलब यह समझा गया कि भारत गुप्त ऑपरेशन के जरिए पाकिस्तान में चिह्नित लक्ष्यों को निशाना बना सकता है। मसलन, ऐसी कार्रवाइयों के जरिए उन आतंकवादियों-अपराधियों को पकड़ा या मारा जा सकता है, जिन्हें पाकिस्तान ने शरण दे रखी है। इन्हीं अंदेशों से खौफजदा पाकिस्तान ने भारत पर जुबानी मिसाइलें दागी हैं। लेकिन यह अंदाजा उसे जरूर होगा कि भारत के वर्तमान राजनीतिक नेतृत्व को इससे चुप नहीं किया जा सकता।
गौरतलब यह है कि भारतीय सुरक्षा बलों ने अतीत में भी कई बार दूसरे देशों की जमीन पर जाकर आतंकवादियों पर कार्रवाई की है। म्यांमार के अलावा नेपाल और भूटान में उसके खास ऑपरेशन हुए हैं। मगर तब की सरकारें उस बारे में ज्यादा ब्योरा नहीं देती थीं। नतीजतन, उससे स्थानीय एवं सीमित सफलता तो मिलती थी, मगर उसके जरिए दूरगामी संदेश नहीं जा पाते थे। नजरिए का यही बदलाव अब आया है। वर्तमान सरकार सीधा पैगाम देना चाहती है कि भारत सॉफ्ट स्टेट नहीं है। वह न सिर्फ अपनी रक्षा करने में सक्षम है, बल्कि जो उसे नुकसान पहुंचाएगा, उसे नष्ट करने की इच्छाशक्ति भी उसके पास है।