
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। डॉक्टरल एंट्रेंस टेस्ट (डीईटी) का परिणाम घोषित होने के बाद देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) ने पीएचडी में प्रवेश प्रक्रिया का अगला चरण शुरू करने की तैयारी कर ली है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी विभागों को रिसर्च एडवाइजरी कमेटी (आरएसी) के तहत साक्षात्कार आयोजित करने के निर्देश दिए है। अगले सप्ताह से विभिन्न विभागों में RAC की बैठकें शुरू होंगी।आरएसी इंटरव्यू से पहले डीईटी में सफल और योग्य उम्मीदवारों की सूची तैयार की जाएगी। इसी सूची के आधार पर अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा।
अधिकारियों के मुताबिक सूची जारी होने के बाद संबंधित विभाग इंटरव्यू की तारीख और समय तय करेंगे।विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में कुल 37 विषयों में पीएचडी कराई जानी है। इनमें अंग्रेजी, हिंदी, भूगोल, भौतिकी, इतिहास, पत्रकारिता सहित 24 नान-डीईटी विषय शामिल हैं।
इन विषयों में करीब 700 उम्मीदवारों ने आवेदन किया है। नान-डीईटी श्रेणी में 350 से 415 पीएचडी गाइड और सुपरवाइजर ने सीटों का विवरण दिया है, जिसके आधार पर 670 सीटों पर चयन किया जाएगा।
इन विषयों में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) के स्कोर के आधार पर उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी। पात्रता के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक अनिवार्य रखे गए हैं।डीईटी श्रेणी के अंतर्गत अप्लाइड मैथ्स, अप्लाइड फिजिक्स, अप्लाइड केमिस्ट्री, डेटा साइंस, कंप्यूटर इंजीनियरिंग, सांख्यिकी, एनर्जी, फार्मेसी, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इंस्ट्रूमेंटेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन और आईटी सहित 13 विषय शामिल हैं।
इन विषयों में 187 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, लेकिन परीक्षा में 145 उम्मीदवार शामिल हुए। इन विषयों में 68 गाइड के पास कुल 112 सीटें उपलब्ध हैं। 1 जनवरी को घोषित डीईटी परिणाम में सिर्फ 29 प्रतिशत उम्मीदवार ही सफल हुए हैं, जिनमें 43 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है।12 विषयों में नहीं हैं पीएचडी सीटेंइस वर्ष पीएचडी के 12 ऐसे विषय भी हैं, जिनमें एक भी सीट उपलब्ध नहीं है।
नान-डीईटी श्रेणी में इतिहास, राजनीति विज्ञान, शारीरिक शिक्षा, मराठी, उर्दू, संगीत, मास कम्युनिकेशन, योग और संस्कृत जैसे विषय शामिल हैं। वहीं डीईटी श्रेणी में डेटा साइंस, एनवायरमेंट इंजीनियरिंग और स्टैटिस्टिक्स में भी सीटें नहीं हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि सीटों की उपलब्धता गाइड की संख्या और मानकों के आधार पर तय की जाती है।