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मध्य प्रदेश के कॉलेजों में पढ़ाई जाएगी मंदारिन, रशियन, जर्मन व फ्रेंच

विदेशी भाषाओं के महत्व को समझने और देश-विदेश के विद्यार्थियों को एक-दूसरे की भाषाओं से जोड़ने के लिए यह पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। इससे विद्यार्थियों को देश-विदेश में नौकरियां प्राप्त करने में आसानी होगी। महाविद्यालयों में तेलुगू, तमिल, कन्नड, मराठी, मलयालम, सिंधी, मणिपुरी, ओड़िया, असमी, बांग्ला, पंजाबी और गुजराती पढ़ाने की योजना पहले ही तैयार की जा चुकी है।

By Anjali raiEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Mon, 12 Jan 2026 10:21:36 AM (IST)Updated Date: Mon, 12 Jan 2026 10:25:17 AM (IST)
मध्य प्रदेश के कॉलेजों में पढ़ाई जाएगी मंदारिन, रशियन, जर्मन व फ्रेंच
60 घंटे का पूरा पाठ्यक्रम ऑनलाइन होगा। - प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. 22 भारतीय भाषाओं के साथ सात विदेशी भाषाएं पढ़ाने की तैयारी
  2. छह माह का प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम, अगले सत्र से शुरू होंगी कक्षाएं
  3. विद्यार्थी को एक भाषा के लिए 500 रुपये शुल्क देना होगा

अंजली राय, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश के 68 पीएमश्री और स्वशासी महाविद्यालयों में नए सत्र से भारतीय भाषाओं के साथ चीन की मंदारिन और रूस की रशियन भाषा भी पढ़ाने की तैयारी है। यह पाठ्यक्रम छह माह का होगा। उच्च शिक्षा विभाग ने इसके लिए स्वशासी कॉलेजों व उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान को नोडल केंद्र बनाया गया है।

साथ ही पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए समिति बनाई है, जो सभी भाषाओं के पाठ्यक्रम 30 जनवरी तक तैयार कर उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान को उपलब्ध कराएगी। विद्यार्थी को एक भाषा के लिए 500 रुपये शुल्क देना होगा। 60 घंटे का पूरा पाठ्यक्रम ऑनलाइन होगा।


अधिकारियों का कहना है कि विदेशी भाषाओं के महत्व को समझने और देश-विदेश के विद्यार्थियों को एक-दूसरे की भाषाओं से जोड़ने के लिए यह पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। इससे विद्यार्थियों को देश-विदेश में नौकरियां प्राप्त करने में आसानी होगी। महाविद्यालयों में तेलुगू, तमिल, कन्नड, मराठी, मलयालम, सिंधी, मणिपुरी, ओड़िया, असमी, बांग्ला, पंजाबी और गुजराती पढ़ाने की योजना पहले ही तैयार की जा चुकी है।

ये विदेशी भाषाएं पढ़ाई जानी हैं

महाविद्यालयों में अभी जर्मन, फ्रेंच, रशियन, कोरियन, स्पेनिश, मंदारिन और जैपनीज भाषा पढ़ाये जाने का प्रस्ताव है। इसके लिए महाविद्यालय विशेषज्ञों की नियुक्ति करेगा।

सोशल इम्पैक्ट बांड में फायदा

राज्य सरकार सोशल इंपैक्ट बान्ड लाने की तैयारी में है। इसके तहत प्रदेश के 600 ओबीसी युवाओं को जापान और जर्मनी में प्लेसमेंट दिलाने की तैयारी है। पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक विभाग ने मसौदा तैयार कर लिया है। जल्द ही इसे कैबिनेट में रखा जाएगा। मंजूरी मिलेगी सोशल इम्पैक्ट बान्ड लागू करने वाला मध्य प्रदेश पहला राज्य बन जाएगा। इस प्रोजेक्ट के लिए युवाओं की राज्य स्तर पर स्क्रीनिंग की जाएगी।

चयनित युवाओं को पर्सनाल्टी ग्रूमिंग के साथ संबंधित देश की भाषा सिखाई जाएगी। दोनों देशों ने 300-300 पदों की वैकेंसी की जानकारी दी है। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम को पार्टनर बनाया गया है। इस योजना के लिए सरकार ने 100 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। पहले प्रोजेक्ट में 20 करोड़ खर्च होंगे।

सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम होगा

मध्य प्रदेश के 68 महाविद्यालयों में नए सत्र से विभिन्न क्षेत्रीय भाषाएं सिखाई जाएंगी। इनके साथ सात विदेशी भाषाओं को सिखाने की भी तैयारी है। यह सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम होगा। - अनुपम राजन, अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग

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