
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। शासकीय स्वशासी आयुर्वेद कालेज गौरीघाट इसी सत्र तीन नए पीजी कोर्स आरंभ करने जा रहा है। इसमें संहिता सिद्धांत, रचना शरीर व द्रव्यगुण विज्ञान में पहली बार पीजी पाठ्यक्रम कालेज के पास होंगे।
तीन प्रमुख पीजी कोर्स के लिए कुल 18 सीटें निर्धारित की गई है। जिसमें छह-छह सीटें प्रत्येक पाठ्यक्रम को मिलेगी। शासकीय आयुर्वेद कालेज में पीजी कोर्स आरंभ हाेने के साथ वह भोपाल व उज्जैन के बाद तीसरा कालेज बन जाएगा।
इस संबंध में शासकीय स्वशासी आयुर्वेद कालेज गौरीघाट के प्राचार्य डाॅॅ. एलएल अहिरवाल ने नईदुनिया को बताया कि राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति आयोग (एनसीआइएसएम) के दिशा-निर्देशों के तहत नए कोर्सेज की अनुमति मिलने की संभावनाओं को जांचा जाएगा। इसके लिए दिल्ली से एनसीआइएसएम की टीम आ रही है। 15 जुलाई के पहले यह टीम अन्य सुविधाओं का आंकलन भी करेगी।
महत्वपूर्ण है कि हाल के सालों में कालेज का कद बढ़ा है। कालेज के अस्पताल के एक्सटेंशन पर करीब दो करोड़ रुपये खर्च किए गए है। इससे 60 बेड के अस्पताल में मरीजों के लिए बिस्तरों की संख्या बढ़कर तकरीबन दो गुनी हो जाएगी।
छात्र-छात्राओं के लिए पीजी की पढ़ाई की शुरुआत का रास्ता खुलने से छात्रों के अध्ययन के लिए अन्य शहर का रूख नहीं करना पड़ेगा। नए सत्र से कॉलेज में पीजी पाठ्यक्रम के तहत पढ़ाई शुरू होगी। इसके लिए कॉलेज प्रशासन ने आयुष विभाग को प्रस्ताव प्रेषित कर दिया है।
-ये तीनों आयुर्वेद के मुख्य आधार स्तंभ हैं। संहिता सिद्धांत चिकित्सा के दार्शनिक नियम बताता है, रचना शरीर भौतिक शरीर की बनावट को स्पष्ट करता है, और द्रव्यगुण विज्ञान औषधियों के गुणों का अध्ययन।
संहिता सिद्धांत : यह आयुर्वेद का सैद्धांतिक आधार है। इसमें चरक, सुश्रुत और वाग्भट जैसे ऋषियों द्वारा रची गई संहिताओं के माध्यम से चिकित्सा के मूल नियम बताए गए है।
रचना शरीर : यह आयुर्वेद का वह विभाग है जो मानव शरीर की संरचना का अध्ययन करता है।
द्रव्यगुण विज्ञान : यह आयुर्वेद का औषध विज्ञान है। इसके अंतर्गत औषधीय पौधों, जड़ी-बूटियों और अन्य द्रव्यों के गुणों का गहन अध्ययन किया जाता है।
यह भी पढ़ें- जिला शिक्षा अधिकारी को क्रमोन्नति प्रकरण में हाई कोर्ट से राहत, विभागीय जांच पर अंतरिम रोक