
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : निजी कॉलेजों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा अब देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) के लिए गंभीर हो गया है। कार्यपरिषद की बैठक में मामला उठने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है।
अब सिर्फ कॉलेजों के दावों और शपथ पत्रों के आधार पर भरोसा नहीं किया जाएगा। बल्कि अधिकारी मौके पर पहुंचकर शिक्षकों की वास्तविक स्थिति की जांच करेंगे। इसके लिए अगले सप्ताह कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई ने अधिकारियों की बैठक बुलाई है। फिर निरीक्षण कमेटी बनाई जाएगी, जो नवंबर के दूसरे सप्ताह से निजी कॉलेजों की जांच शुरू करेगी।
16 अक्टूबर को हुई कार्यपरिषद की बैठक में सदस्यों ने निजी कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कमी का मुद्दा उठाया था। दरअसल कॉलेजों को संबद्धता लेते समय रिक्त पदों को छह महीने के भीतर भरने का शपथ पत्र देना होता है। इसके बावजूद कई संस्थानों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। ऐसे में विश्वविद्यालय ने अब दस्तावेजों के बजाय वास्तविक स्थिति की पड़ताल करने का निर्णय लिया है।
उच्च शिक्षा विभाग के नियमानुसार कॉलेजों में 40 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होना चाहिए। बावजूद इसके कुछ संस्थानों में 50 से 55 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होना सामने आया है। इससे पढ़ाई की गुणवत्ता और विद्यार्थियों को मिलने वाले शैक्षणिक मार्गदर्शन पर असर पड़ सकता है। शिक्षकों की संख्या कम होने से कक्षाओं का संचालन और पाठ्यक्रम समय पर पूरा करना भी चुनौती बन सकता है।
निरीक्षण शुरू होने से पहले कॉलेजों से कार्यरत शिक्षकों की सूची, वेतन पर्ची और अन्य जरूरी दस्तावेज मांगे जाएंगे। कोड-28 के तहत शिक्षकों की नियुक्ति और उनकी स्थिति की जांच की जाएगी। इसे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कॉलेजों में शिक्षक वास्तव में कार्यरत हैं या केवल कागजों पर उनकी नियुक्ति दिखाई गई है। शिक्षकों का वर्कलोड यानी पढ़ाने की जिम्मेदारी भी जांच के दायरे में रहेगी। कुलगुरु डॉ. सिंघई ने बताया कि निर्धारित मानकों से कम शिक्षक मिलने पर संबंधित संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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