
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक सामने आई है। 100 अंकों के प्रश्नपत्र को 70 अंकों का छाप दिया गया। शिक्षकों ने भी कॉपियों का मूल्यांकन 70 अंकों के आधार पर किया। जबकि रिजल्ट 100 अंकों के हिसाब बना दिया।
इसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ा और 30 में से 20 छात्र फेल घोषित हो गए। मंगलवार को छात्रों की शिकायत के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने करीब छह घंटे में गलती सुधारी और संशोधित रिजल्ट जारी कर दिया।
मामला विश्वविद्यालय से संबद्ध बीबीए (हास्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन) प्रथम वर्ष की पूरक परीक्षा के एडवर्टाइजिंग विषय का है। परीक्षा स्कीम के आधार पर संबंधित विषय का प्रश्न पत्र 100 अंकों का था, लेकिन प्रश्नपत्र पर अधिकतम अंक 70 छप गए। मूल्यांकनकर्ताओं ने भी इसी आधार पर कापियां जांचीं। मगर विद्यार्थियों के अंक साफ्टवेयर में चढ़ाने के दौरान परीक्षा स्कीम से रिजल्ट बना दिया। इससे विद्यार्थियों के अंक और पास होने के निर्धारित मानदंड में अंतर आ गया।
रिजल्ट जारी होने के बाद विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों को गड़बड़ी के बारे में शिकायत की। परीक्षा विभाग ने मामले की जांच की तो प्रश्नपत्र और मूल्यांकन में गलती सामने आई। इसके बाद 70 में मिले अंकों को 100 के अनुपात में परिवर्तित कर परिणाम दोबारा तैयार किया गया।
इस सुधार से पहले फेल घोषित किए गए 20 विद्यार्थियों में से 12 पास हो गए। जबकि आठ विद्यार्थियों को अब भी पूरक परीक्षा देनी होगी। परीक्षा नियंत्रक डा अशेष तिवारी ने बताया कि आर्डिनेंस 14-1 के तहत एडवर्टाइजिंग विषय इसी सत्र में प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रम में पहली बार शामिल किया गया था। मार्किंग स्कीम की जांच में गलती सामने आई। फिर मूल्यांकनकर्ता से चर्चा की गई। संशोधित परिणाम पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया।
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