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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 25, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

MP Election Result: हारने वाले मजबूत निर्दलीयों पर भी रहेगी भाजपा-कांग्रेस की नजर, अपने पाले में लाने की करेंगे कोशिश

MP News मध्य प्रदेश चुनाव में दल से टूटकर निर्दलीय चुनाव लड़कर खूब वोट बटोरने वाले उम्मीदवारों को भी दलों ने फिर पार्टी में शामिल कर टिकट देने में पार...और पढ़ें

By Neeraj PandeyEdited By: Neeraj Pandey
Publish Date: Sat, 25 Nov 2023 06:10:23 PM (IST)Updated Date: Sat, 25 Nov 2023 06:10:23 PM (IST)
MP Election Result: हारने वाले मजबूत निर्दलीयों पर भी रहेगी भाजपा-कांग्रेस की नजर, अपने पाले में लाने की करेंगे कोशिश
हारने वाले मजबूत निर्दलीयों पर रहेगी भाजपा-कांग्रेस की नजर

HighLights

  1. हारने वाले मजबूत निर्दलीयों पर रहेगी भाजपा-कांग्रेस की नजर
  2. अच्छा प्रदर्शन करने वाले निर्दलीयों का राजनीतिक भविष्य संवार सकते हैं परिणाम
  3. लोकसभा चुनाव के चलते मजबूत निर्दलीयों को भी अपने पाले में लाने की कोशिश करेंगे दल

भोपाल (राज्य ब्यूरो)। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव मैदान में उतरे 2,533 प्रत्याशियों की टकटकी अब तीन दिसंबर को होने वाली मतगणना पर लगी है। जीतने वालों का भाग्य तो चमकेगा ही, पर कड़ी टक्कर देने वाले यानी मजबूत निर्दलीय व अन्य दलों के उम्मीदवारों का बेहतर राजनीतिक भविष्य भी इन परिणामों से निर्धारित होगा। अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव के चलते प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस इन्हें अपने पाले में लाने की पूरी कोशिश करेंगे।

चार निर्दलीय विधायक कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशी बने

दोनों दल ऐसे उम्मीदवारों को अगले विधानसभा चुनाव में टिकट का आश्वासन दे सकते हैं या फिर पार्टी संगठन में भी जिम्मेदारी देकर उन्हें अपने साथ रख सकते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव के परिणाम देखें तो कई ऐसे प्रत्याशी हैं जो दूसरे या तीसरे नंबर पर रहे और इसी वजह से इस चुनाव में वह भाजपा या कांग्रेस से लड़े हैं। वर्ष 2018 का चुनाव जीते चार निर्दलीयों में इस बार दो कांग्रेस और दो भाजपा से प्रत्याशी बने।


इसी तरह, सतना जिले की नागौद विधानसभा सीट में तीसरे नंबर पर रहीं निर्दलीय प्रत्याशी डा. रश्मि सिंह को कांग्रेस ने टिकट दिया। सिहावल सीट से निर्दलीय प्रत्याशी विश्वमित्र पाठक को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया। वर्ष 2018 में वह भी तीसरे नंबर पर थे। वहीं, गुढ़ विधानसभा सीट से सपा से लड़कर दूसरे नंबर पर रहे कपिध्वज सिंह को भी कांग्रेस ने इस बार चुनाव लड़ाया।

इतना ही नहीं अपने ही दल से टूटकर निर्दलीय चुनाव लड़कर खूब वोट बटोरने वाले उम्मीदवारों को भी दलों ने फिर पार्टी में शामिल कर टिकट देने में संकोच नहीं किया। इस चुनाव में भी ऐसी स्थिति है। भाजपा और कांग्रेस के कई मजबूत दावेदार टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय या किसी छोटे दल से चुनाव लड़ रहे हैं।

निर्दलियों की घर वापसी

तीन दिसंबर को परिणाम आने पर यह जीते या दूसरे नंबर पर रहे तो दल फिर घर वापसी करा सकते हैं। लोकसभा चुनाव के चलते भाजपा-कांग्रेस दोनों दल यह कदम उठा सकते हैं। ऐसा पहले हुआ भी है। वर्ष 2018 में महेश्वर से निर्दलीय चुनाव लड़कर दूसरे नंबर पर रहे राजकुमार मेव को इस चुनाव में भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया।

बड़वानी में निर्दलीय लड़कर दूसरे स्थान पर रहे राजन मंडलोई इस बार कांग्रेस से मैदान में उतरे। पिछली बार बालाघाट से सपा से लड़कर दूसरे क्रम पर रहीं अनुभा मुंजारे को कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया। इस चुनाव में भी भाजपा या कांग्रेस से टूटकर निर्दलीय या अन्य दल से मैदान में उतरे प्रत्याशियों ने कुछ जगह चुनावी संघर्ष को त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय बना दिया है।