मेरी आवाज ही पहचान है: Lata Mangeshkar के ऐसे फोटो-वीडियो, जो उन्हें हमेशा जिंदा रखेंगे
Meri awaaz hi pehchaan hai: लता दीदी को 8 जनवरी को कोरोना महामारी के लक्षण निमोनिया के चलते भर्ती कराया गया था। ...और पढ़ें
By Arvind DubeyEdited By: Arvind Dubey
Publish Date: Sun, 06 Feb 2022 11:41:07 AM (IST)Updated Date: Sun, 06 Feb 2022 12:15:03 PM (IST)

Meri awaaz hi pehchaan hai: 6 फरवरी 2022 की सुबह जब लता मंगेशकर का मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हुई, तब भारत ने न केवल अपने महान गायिका को खो दिया, बल्कि एक संगीतकार को भी खो दिया, जिसने फिल्म गायन के शिल्प को बदल दिया। आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेंचमार्क बन गया। लता दीदी को 8 जनवरी को कोरोना महामारी के लक्षण निमोनिया के चलते भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने 6 फरवरी, रविवार सुबह बताया कि दीदी हमारे बीच नहीं रहीं। लता दीदी एक ऐसे परिवार से रहीं जहां संगीत की पूजा होती थी। उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर मराठी रंगमंच में एक विशाल व्यक्तित्व थे। उन्होंने अपने नाटकों के लिए गाने बनाए और गाए, जिन्हों मराठी रंगमंच के चेहरे को बदल देगा। वह नाट्य संगीत के सबसे प्रमुख एक्सपोनेंट्स में से एक थे और एक पूर्ण हिंदुस्तान शास्त्रीय गायक थे।
सितंबर 1929 में पैदा हुईं लता दीदी, अपने भाई-बहनों मीना, आशा (भोसले), उषा और भाई हृदयनाथ में सबसे बड़ी थीं। लता मंगेशकर ने अपनी आवाज के दमपर दशकों तक मराठी और हिंदी फिल्म संगीत पर शासन किया।लता संगीत निर्देशक गुलाम हैदर को अपना गुरु मानती थीं। उन्होंने कई मौकों पर हैदर को अपना गुरु होने का श्रेय दिया है। 2013 के एक साक्षात्कार में लता मंगेशकर ने कहा था कि गुलाम हैदर पहले संगीत निर्देशक थे जिन्होंने मेरी प्रतिभा पर पूरा विश्वास दिखाया।
लता मंगेशकर ने भारत रत्न, दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, फ्रांसीसी लीजियन ऑफ ऑनर, पांच महाराष्ट्र स्टेट फिल्म पुरस्कार, तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और अनगिनत अन्य सम्मान हासिल किए हैं, जो उन्हें आसानी से सबसे प्रभावशाली भारतीय फिल्म गायक बनाते हैं।
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