
'गुमनाम' और 'जब जब फूल खिले' जैसी हिट फिल्में देने वाली गुजरे जमाने की मशहूर अभिनेत्री नंदा का 75 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।
नंदा का जन्म 8 जनवरी 1939 को मुंबई के एक मराठी व्यवसायी परिवार में हुआ था। पिता मास्टर विनायक एक अभिनेता थे और उनकी मौत के बाद नंदा को महज आठ साल की छोटी उम्र में फिल्मों में काम करना पड़ा। उन्होंने 1957 से 1995 के दौरान फिल्मों में सक्रिय योगदान दिया। वह कई फिल्मों में छोटी बहन के किरदार में नजर आईं, लेकिन 'भाभी' और 'छोटी बहन' जैसी फिल्मों से उन्हें पहचान मिली।
नंदा के मामा वी शांताराम ने उन्हें अपनी फिल्म 'तूफान और दीया' (1956) में बड़ा ब्रेक दिया था। वह देव आनंद के साथ फिल्म 'काला बाजार' में सपोर्टिंग रोल में नजर आईं। उन्होंने 'धूल का फूल' जैसी कई बड़ी फिल्मों में छोटे-छोटे किरदार भी निभाए।
हिंदी सिनेमा में सफल होने से पहले नंदा ने शशि कपूर के साथ आठ फिल्में साइन की। उनकी पहली दो फिल्में बॉक्स ऑफिस पर चल नहीं पाई। 1965 में 'जब जब फूल खिले' में पहली बार नंदा ने पश्िचमी किरदार निभाया था। इसी फिल्म में उनका पसंदीदा गाना 'ये समा' फिल्माया गया था। इसके बाद शशि कपूर ने खुद कहा कि उनकी पसंदीदा हीराइन नंदा ही है। उन्होंने शशि कपूर के साथ अन्य कई फिल्में की जिसमें 'मेहंदी लगी मेरे हाथ', 'राजा साहब' अौर 'नींद हमारी ख्वाब तुम्हारे' जैसी हिट फिल्म शामिल है।
1965 में दूसरी हिट फिल्म 'गुमनाम' से उनकी गिनती शीर्ष हीरोइनों में गिनी जाने लगी। मनोज कुमार के साथ फिर उन्होंने फिल्म 'मेरा कसूर क्या है' में काम किया। 1960 के पूरे दशक में वे फिल्मों में मुख्य नायिका का किरदार निभाया।
उन्हें सांगलेस सस्पेंस थ्रिलर 'इत्तेफाक' 1969 में राजेश खन्ना के अपोजिट देखा गया। इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेअर नॉमिनेशन भी मिला। खन्ना जब स्टार बने तब उन्होंने नंदा के साथ दो और फिल्में 'द ट्रेन' (1970) और 'जोरू का गुलाम' (1972) साइन की थी। जितेंद्र ने भी उनके साथ 'परिवार' फिल्म की थी।
1972 की मनोज कुमार की फिल्म 'शोर' में छोटी सी भूमिका निभाने के बाद नंदा ने कुछ और फिल्में 'छैला' (1973), 'नया नशा' (1974) की और इसके बाद वे पर्दे से जैसे गायब ही हो गईं। 1982 में उन्होंने तीन फिल्मों 'आहिस्ता आहिस्ता', 'मजदूर' और 'प्रेम रोग' के साथ वापसी की और तीनों में ही संयोग से उन्होंने पदमिनी कोहलापुर की मां की भूमिका निभाई।
करीबी दोस्तों में वहीदा रहमान का नाम सबसे ऊपर आता है। उनकी दोस्ती अभी तक कायम थी। दोनों ने फिल्म 'काला बाजार' में साथ काम किया था।