Malaal Movie Review: अंत में इमोशनल कर देती है यह ट्रेजिक लवस्टोरी
अमीर-गरीब, ऊंच-नीच जैसी दिक्कतों से लड़ती यह प्रेम कहानी 1990 के दौर का दर्शन कराती है। ...और पढ़ें
By Sudeep mishraEdited By: Sudeep mishra
Publish Date: Fri, 05 Jul 2019 05:27:04 PM (IST)Updated Date: Fri, 05 Jul 2019 05:42:44 PM (IST)

ज्यादातर फिल्मों की कहानी दो नौजवानों के बीच प्यार पर आधारित होती है। मलाल की भी कहानी कुछ ऐसी ही है लेकिन यह फिल्म आपको याद दिलाएगी 90 के दशक में आई फिल्मों की। उन पुरानी फिल्मों की लवस्टोरी की जिसे हर कोई देखना पसंद करता है। चूंकि निर्देशक मंगेश हडावले ने कहानी का बैकड्रॉप 90 की फिल्मों का रखा है जिसमें टाइटैनिक और हम दिल दे चुके सनम जैसी रोमांटिक फिल्मों के पोस्टर भी देखने को मिलते हैं। फिल्म से मशहूर निर्देशक संजय लीला भंसाली की भांजी शर्मिन सहगल और जावेद जाफरी के बेटे मिजान जाफरी ने बॉलीवुड में कदम रखा है।
कहानी की बात करें तो 90 के दशक के बैकड्रॉप में बनी फिल्म का फर्स्ट हाफ काफी रोचक है। फिल्म उस दौर के हिसाब से चॉल की कहानी लगती है। दो नौजवानों के बीच प्यार को दर्शाती फिल्म की कहानी दर्शकों को इसलिए बांधने में कामयाब नजर आती है क्योंकि फिल्म का स्क्रीनप्ले जबरदस्त है। सेकंड हाफ में जरुर फिल्म थोड़ी स्लो हो जाती है। ऐसी कहानियां हम हिंदी फिल्मों में कई बार देख चुके हैं कि जहां प्यार के दुश्मन अमीरी-गरीबी होती है या फिर जात-पात। मलाल में भी ऐसा ही कुछ देखने को मिलता है। मलाल में दिखाया गया है कि चॉल में रहने वाले टपोरी और बदमाश लड़के शिवा को वहां रहने आई लड़की आस्था चौधरी से प्यार हो जाता है। लेकिन बीच में आता है उनका बैकग्राउंड। शिवा चॉल में रहता है वहीं आस्था अमीर परिवार से है। लेकिन शिवा का परिवार भी कभी अमीर हुआ करता था लेकिन आर्थिक नुकसान के चलते उसके परिवार की स्थिति खराब हो गई। शुरुआत में दोनों के बीच नोक-झोंक देखने को मिलती है लेकिन इसके बाद क्या दोनों एक दूसरे को अपनाते हैं? क्या दोनों में प्यार होता है? इन सवालों के जवाब फिल्मों में हैं।
फिल्म में अहम भूमिका निभा रहे मिजान जाफरी और शर्मिन सहगल की परफॉर्मेंस शानदार है। फिल्म में दोनों के अभिनय को देखकर यह जरुर कहा जा सकता है कि बॉलीवुड को दो नए कलाकार मिल गए हैं जिनसे आगे और अच्छे काम की उम्मीद की जा सकती है।
- पराग छापेकर