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कंगना-विद्या बालन यौन उत्पीड़न की शिकार…क्या है फिल्म इंडस्ट्री की चकाचौंध में छिपा कड़वा सच, बॉलीवुड के कई लोग कास्टिंग काउच में फंसे

बॉलीवुड और ओटीटी के जाने-माने अभिनेता विजय वर्मा ने खुलासा किया है कि करियर के शुरुआती दौर में वे भी कास्टिंग काउच का शिकार हुए थे। जानिए उनके संघर्ष, रिजेक्शन और सफलता के सफर की पूरी कहानी।

By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Wed, 19 Aug 2026 06:08:31 PM (IST)Updated Date: Wed, 19 Aug 2026 06:08:31 PM (IST)
कंगना-विद्या बालन यौन उत्पीड़न की शिकार…क्या है फिल्म इंडस्ट्री की चकाचौंध में छिपा कड़वा सच, बॉलीवुड के कई लोग कास्टिंग काउच में फंसे
फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच और यौन उत्पीड़न की कड़वी सच्चाई। (AI जनरेटेड)

मनोरंजन डेस्क, नई दिल्ली। जब कोई "कास्टिंग काउच" शब्द सुनता है, तो या तो वह इसे आम अंदाज में समझता है, या फिर इसे फिल्म इंडस्ट्री का "कॉमन कल्चर" मानकर नजरअंदाज कर देता है। लेकिन ये आम-सा लगने वाला शब्द असल में एक बड़ी सच्चाई पर पर्दा डालता है। यह वो सच्चाई है जिसे साफ-साफ ‘यौन उत्पीड़न’ कहा जा सकता है।

आम भाषा में समझे तो कास्टिंग काउच एक गलत और गैरकानूनी तरीका है। इसमें किसी व्यक्ति द्वारा नए या जूनियर व्यक्ति से नौकरी, फिल्म में रोल या प्रमोशन के बदले यौन संबंध की मांग की जाती है। यह शब्द आम तौर पर फिल्म इंडस्ट्री से आया है, जहां ऐसे ऑफर अक्सर ऑडिशन या मीटिंग के बहाने दिए जाते थे। असल में यह यौन शोषण का ही एक रूप है, जिसे मीठे शब्दों में छुपाने की कोशिश की जाती है।


100 साल पुरानी है ये कॉन्सेप्ट

"कास्टिंग काउच" शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले 1920 के दशक की हॉलीवुड फिल्मों में देखा गया। 1934 में ‘वेरायटी’ मैगजीन में इसका जिक्र किया गया था। तब से अब तक इसे कभी गंभीरता से नहीं लिया गया।

वहीं 1991 में एक डॉक्यूमेंट्री में हेलेन मिरेन ने कहा था- कास्टिंग काउच को हमेशा मजाक समझा गया, लेकिन हमें यह कभी सही नहीं लगा।

1956 में एक ब्रिटिश मैगजीन ने लिखा था- खतरनाक बात यह है कि ये बातें फिल्म इंडस्ट्री में सामान्य मानी जाती हैं। अब समय है इन्हें सामने लाने का।

MeToo मूवमेंट के दौरान हुआ कास्टिंग काउच का खुलासा

भारत में कास्टिंग काउच को लेकर खुलकर बातें बहुत समय खुल कर शुरू हुई। लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में इसके किस्से लंबे समय से चल रहे हैं। यह मुद्दा तब और चर्चा में आया जब कुछ बॉलीवुड एक्ट्रेसेज ने 2000 के दशक में इसके खिलाफ आवाज उठाई और 2018 के #MeToo मूवमेंट के दौरान कई बड़े नामों का खुलासा हुआ।

2003 में श्वेता मेनन ने दिया था पहला बयान

भारतीय सिनेमा में लंबे समय तक कास्टिंग काउच के विषय पर चुप्पी साधी गई। हालांकि, 1990 के दशक में कुछ कलाकारों ने इस मुद्दे पर इशारों में बोलना शुरू किया, लेकिन खुलकर आरोप लगाना तब भी मुश्किल था।

भारतीय सिनेमा में कास्टिंग काउच पर सबसे पहले खुलकर बयान 2003 में एक्ट्रेस श्वेता मेनन ने दिया था। उन्होंने यह स्वीकार किया कि उनसे भी ऐसे ऑफर दिए गए थे। इसके बाद कई और एक्ट्रेसेज जैसे ममता कुलकर्णी, कंगना रनौत, राधिका आप्टे, तनुश्री दत्ता आदि ने समय-समय पर कास्टिंग काउच की मौजूदगी पर सवाल उठाए और अपने अनुभव शेयर किए।

इसलिए, भारतीय सिनेमा में कास्टिंग काउच की शुरुआत भले ही दशकों पहले हो चुकी हो, लेकिन इसका पहला बड़ा पब्लिक केस 2000 के दशक की शुरुआत में सामने आया।

नाना पाटेकर पर लग चुका है यौन उत्पीड़न का आरोप

यह मामला सालों से चला आ रहा है। लेकिन 2008 और फिर 2018 में तनुश्री दत्ता का दिया बयान काफी चर्चाओं में रहा। दरअसल, उन्होंने नाना पाटेकर के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इस घटना के बाद बॉलीवुड में कास्टिंग काउच और यौन शोषण के खिलाफ एक आंदोलन की नींव रखी गई। इसे ही सार्वजनिक रूप से MeToo मूवमेंट की शुरुआत माना जाता है।

‘कास्टिंग काउच’ शब्द कैसे बना अपराध की ढाल

हाल ही में मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) और लिंग भेद (Sexism) पर Hema Committee की रिपोर्ट आई। इस रिपोर्ट ने इंडस्ट्री के भीतर लंबे समय से चल रहे शोषण को सामने लाया, और इसी के साथ 'कास्टिंग काउच' शब्द फिर से चर्चा में आ गया। लेकिन अब ये शब्द सिर्फ मनोरंजन जगत तक सीमित नहीं रहा। दूसरे कामों में भी उच्च पदों पर इस शब्द का इस्तेमाल होने लगा है।

अगर इसे समझने कि कोशिश करें, तो कांग्रेस नेता सिमी रोजबेल जॉन का बयान इसका उदाहरण है। उन्होंने बॉलीवुड पार्टीज में ‘कास्टिंग काउच कल्चर’ होने का आरोप लगाया। लेकिन मीडिया रिपोर्ट में उनके आरोपों को भी उसी शब्द के नीचे छुपा दिया गया जिसे आम भाषा में लोग "कास्टिंग काउच आरोप" कहते हैं।

भारत में कास्टिंग काउच के लिए कोई कानून मौजूद नहीं

भारत में कास्टिंग काउच को लेकर अब तक कोई भी अलग कानून नहीं बनाया गया है। लेकिन इसके अंदर आने वाले अपराधों जैसे यौन उत्पीड़न, ब्लैकमेल, आदि के लिए कई कानून मौजूद है। इनमें आर्टिकल 354 ( किसी महिला के साथ मर्यादा का उल्लंघन करना), आर्टिकल 354 A (यौन उत्पीड़न), POSH एक्ट 2013, आदि मौजूद है।

लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे संस्थान है जो इस पर नजर रखते है। इनमें CINTAA (साइन एंड टीवी आर्टिस्ट एसोसिएशन), FWICE (फेडेरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया साइन एंप्लॉय) और ICC (इंटरनल कंप्लेंट कमेटी) भी शामिल है।

बॉलीवुड के कई लोग हुए कास्टिंग काउच के शिकार

फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच कोई नया किस्सा नहीं है। कई एक्ट्रेसेज इसे फेस कर चुकी है और इस बात का खुलासा कर चुकी हैं कि वह कास्टिंग काउच की शिकार रही हैं।

विद्या बालन

एक इंटरव्यू में विद्या बालन ने बताया कि उन्होंने भी इसे फेस किया है। फिल्म मिशन मंगल के बात एक डायरेक्टर उनके पास आकर अकेले में कुछ बात करने को कहा। जब विद्या उनके साथ अंदर गई तो उन्होंने दरवाजा थोड़ा खुला छोड़ दिया। वहां डायरेक्टर ने उनके साथ गलत करने की कोशिश की। विद्या ने बताया कि इस घटना के बाद वो पूरी तरह से डर गई थी।

कंगना रनौत

कंगना भी डायरेक्टर आदित्य पंचोली पर यौन शोषण का आरोप लगा चुकी है। उनका कहना था कि तनु वेड्स मनु के ऑडिशन के बाद उन्हें डायरेक्टर ने उन्हें सेक्शुयल रिलेशन बनाने के लिए उकसाया था।

ममता कुलकर्णी

ममता कुलकर्णी नब्बे के दशक की मशहूर एक्ट्रेस हैं। उन्होंने फिल्म चाइना गेट के दौरान राजकुमार संतोषी पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। ममता का कहना है कि इस फिल्म में काम देने के बदले में डायरेक्टर ने उनके साथ सोने की बात कही थी।

राधिका आप्टे

एक्ट्रेस राधिका आप्टे को भी यौन शोषण का सामना करना पड़ा था। साउथ के एक डायरेक्टर ने उन्हें हिंदी फिल्मों में काम दिलाने के बदले फिजिकल रिलेशन बनाने को कहा। लेकिन राधिका ने अब तक उनका नाम रीवील नहीं किया।

शर्लिन चोपड़ा

एक्ट्रेस शर्लिन चोपड़ा ने भी अपने साथ हुए यौन शोषण का खुलासा किया था। उन्होंने बताया कि फिल्म कामसूत्र थ्री डी का प्रोड्यूसर उनके साथ फिल्म की रिहर्सल करने के बहाने इंटीमेट होता था। बाद में शर्लिन ने उनके खिलाफ FIR भी दर्ज करवाया।

सरोज खान के बयान पर शुरू हुई एक नई बहस

बॉलीवुड की मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था- इंडस्ट्री में शोषण तो होता है, लेकिन कम से कम औरतों को काम तो मिलता है। सरकार के लोग करते हैं फिर आप लोग फिल्म इंडस्ट्री के पीछे क्यों पड़े रहते हो । फिल्म जगत कम से कम रोटी तो देता है । रेप करके छोड़ तो नहीं देता । ये सब लड़की के ऊपर होता है कि वो क्या चाहती है । अगर वो किसी के हाथ नहीं आना चाहती तो ना आए।

उनके यह बयान यौन शोषण को सही ठहराने वाला था। लेकिन इस बात के बाद देश में एंटरटेनमेंट और लिंग भेद को लेकर एक बहस शुरू हो गई।

इस बयान के बाद लोगों का कहना था कि जब कोई महिला आगे आकर अपने शोषण की बात कहती है, तो उसे झूठी, और चालाक ठहरा दिया जाता है। वहीं पुरुष जो वास्तव में दोषी होते हैं, उनके नाम तक नहीं लिए जाते। तब वे या तो ‘मेहरबान’ बन जाते हैं या ‘प्रोफेशनल’।

मुझे कास्टिंग काउच पर भरोसा नहीं है- शर्मिला टैगोर

लखनऊ के एक कार्यक्रम में शर्मिला टैगोर ने भी कास्टिंग काउच को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा- 'मैं कास्टिंग काउच में विश्वास नहीं करती हूं। मेरे साथ कभी ऐसी घटना नहीं हुई। हर पेशे की कुछ न कुछ कमियां होती हैं। लेकिन अगर किसी महिला के साथ ऐसा होता है तो उसे पुलिस में शिकायत करनी चाहिए। कोई लड़की इस तरह की चीजों को पसंद नहीं करती है तो उसे ये नहीं करना चाहिए। मुझे तो ऐसा कुछ नहीं लगता।'

कास्टिंग काउच में शामिल होने वाले खुद भी जिम्मेदार- राजीव खंडेलवाल

एक्टर राजीव खंडेलवाल ने एक इंटरव्यू में कहा था – "जो लोग कास्टिंग काउच में शामिल होते हैं, वे खुद भी जिम्मेदार होते हैं। ये रेप नहीं है, इसमें कुछ फायदा भी होता है।"

यह बयान दिखाता है कि किस तरह कई लोगों को आज भी समझ नहीं है कि जब किसी के पास ‘ना’ कहने की आजादी नहीं होती, तब सहमति भी एक झूठ होती है। लेकिन इस कारण किसी विशेष को टारगेट किया जाना गलत भी हो सकता है।

क्या फिल्म इंडस्ट्री के लोग कास्टिंग काउच को सपोर्ट करते हैं?

'वीरे दी वेडिंग' के प्रमोशन के दौरान जब करीना से कास्टिंग काउच के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने चुप्पी साध लिया। साथ ही बात को भी बदल दिया।

वहीं एक्टर Innocent (जो AMMA के अध्यक्ष भी रह चुके हैं) ने 2017 में कहा था – अब इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच जैसी चीज नहीं है। हां, कुछ ‘बुरी औरतें’ होंगी, जो ऐसा करती हैं।” यह बयान न सिर्फ महिलाओं को बदनाम करता है, बल्कि शोषण करने वालों को बचाता भी है

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