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मनोरंजन डेस्क, नई दिल्ली. एक मंच, हजारों लोग और सामने बैठे थे प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू। यह पहला मौका था, जब स्वर कोकिला लता मंगेशकर ऐतिहासिक गाने ‘ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आंख में भर लो पानी…’ को गाने वाली थीं। फिर जैसे ही उन्होंने गाने की पहली लाइन गाई, चारों ओर सन्नाटा छा गया। सभी की आंखें नम हो गईं। पंडित नेहरू भी रो पड़े।
वहां मौजूद कोई नहीं जानता था कि इतना मार्मिक गाना एक सिगरेट की डिब्बी पर लिखा गया था।
तो आइए जानें कि इस अमर गीत के बनने की पूरी कहानी…
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सिगरेट के डिब्बी से गाने की शुरुआत
1962 में भारत-चीन युद्ध में भारत के हजारों जवान शहीद हुए। पूरे देश में मातम था। ऐसे में कवि प्रदीप ने शहीदों के लिए एक गाना बनाने के बारे में सोचा। एक दिन वे किसी समारोह में शामिल हुए। तभी वे मन में कुछ पंक्तियां गुनगुनाने लगे।
वे उन पंक्तियां को कागज पर उतारना चाहते थे। लेकिन उनके पास न तो कोरा कागज था और न ही कोई डायरी। तभी उनकी नजर पास में पड़ी एक सिगरेट की डिब्बी पर पड़ी। उन्होंने झट से उन लाइन्स को डिब्बी के पीछे लिख दिया। वो लाइन्स थीं- ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आंख में भर लो पानी, जो शहीद हुए हैं उनकी, जरा याद करो कुर्बानी…। फिर घर जाकर उन्होंने पूरा गाना लिखी।
गाने के लिए लता मंगेशकर से मना कर दिया था
प्रदीप चाहते थे कि गाने को ऐसा सिंगर अपनी आवाज दे, जिससे लोग कनेक्ट कर पाएं। इसके लिए पहले उन्होंने सिंगर सी. रामचंद्र को चुना रामचंद्र उस समय इंडस्ट्री के सबसे पॉपुलर सिंगर माने जाते थे।
फिर उन्होंने फीमेल वॉयज के लिए लता मंगेशकर को अप्रोच किया। लेकिन उन्होंने किन्हीं कारणों के चलते गाने से मना कर दिया। हालांकि जब उन्हें पता चला कि गाना शहीदों के सम्मान में लिया गया है, तो वे झट से गाने के लिए राजी हो गईं। उन्होंने फीस लेने से भी मना कर दिया।
भारत-चीन युद्ध के दो महीने बाद, 27 जनवरी 1963 को लता मंगेशकर और सी. रामचंद्र ने 'ऐ मेरे वतन के लोगों' को नई दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में गाया। इस मौके पर तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी मौजूद थे।
पंडित नेहरू ने कहा- बेटी, तुमने रुला दिया
कार्यक्रम के दौरान स्टेडियम में हजारों लोग मौजूद थे। जब लता दीदी ने गाना शुरू किया तो हर कोई शांत हो गया। सबकी आंखें नम हो गईं। पंडित नेहरू भी खुद को रोने से रोक नहीं पाए।
प्रोग्राम खत्म होने के बाद पंडित नेहरू ने लता दीदी से मिले। उन्होंने कहा, ‘बेटी, तुमने मुझे रुला दिया। मैं घर जा रहा हूं। तुम भी साथ घर चलो। चाय पियो।’
पंडित नेहरू का कहना मान लता दीदी उनके साथ घर चली गईं। इस पल के बारे में उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘घर जाकर मैं शांति से एक कोने में बैठ गई थी। तभी कुछ देर बाद इंदिरा गांधी आईं। उन्होंने कहा- मैं आपको दो ऐसे लोगों से मिलवाना चाहती हूं, जो आपके बहुत बड़े फैन हैं। फिर वे अपने दोनों बेटे राजीव और संजय गांधी को लेकर आईं।
लता दीदी ने आगे कहा था कि घर पर उनकी पंडित नेहरू से ज्यादा बातचीत नहीं हुई थी। लेकिन यह पल उनके लिए हमेशा यादगार रहा।