
मनोरंजन डेस्क। संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘देवदास’ में ऐश्वर्या राय बच्चन का पारो वाला किरदार आज भी दर्शकों के जेहन में बसा है। खासकर ‘सिलसिला ये चाहत का’ गाने में उनका लाल साड़ी वाला लुक। हाथ में जलता दीया, खुले बाल और चेहरे पर प्यार के साथ इंतजार का भाव… इस पूरे दृश्य ने पारो के दर्द को पर्दे पर खूबसूरती से उतारा। लेकिन इस लुक के पीछे सिर्फ खूबसूरत कपड़े नहीं, बल्कि काफी मेहनत और बारीकियां भी थीं।
फिल्म की कॉस्ट्यूम डिजाइनर नीता लुल्ला ने पारो के लुक को तैयार करने के लिए पारंपरिक साड़ियों को भव्य अंदाज दिया था। आमतौर पर पहनी जाने वाली साड़ी से कहीं ज्यादा कपड़े का इस्तेमाल किया गया। नीता लुल्ला के मुताबिक, फिल्म की कई साड़ियां 12 से 14 मीटर तक लंबी थीं। इन्हें इस तरह तैयार किया गया था कि ऐश्वर्या को पहनने और शूटिंग के दौरान संभालने में आसानी रहे।
लाल साड़ी को पारो के प्रेम और भावनाओं से जोड़कर देखा जाता है। वहीं नीले ब्लाउज को देवदास के इंतजार का प्रतीक बताने वाली व्याख्या भी चर्चा में रही है। हालांकि, इस रंग-संयोजन के पीछे दस साल के इंतजार वाली बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं मिलती। इसलिए इसे फिल्म की एक लोकप्रिय व्याख्या के तौर पर देखना चाहिए।
‘देवदास’ की शूटिंग से जुड़ा एक और दिलचस्प किस्सा फिल्म के क्लाइमैक्स का है। इसमें पारो देवदास से आखिरी बार मिलने के लिए हवेली की सीढ़ियों से दौड़ती है और उसके साड़ी के पल्लू में आग लग जाती है। इस दृश्य के लिए भंसाली को लंबा पल्लू चाहिए था, ताकि दौड़ते समय वह हवा में लहराता हुआ दिखाई दे।
नीता लुल्ला ने बताया था कि भंसाली ने शूटिंग से ठीक एक रात पहले 15 मीटर लंबी सिल्क साड़ी की मांग कर दी। उन्होंने एक नहीं, बल्कि दो साड़ियां तैयार करने को कहा, ताकि पहली साड़ी जलने पर दूसरी इस्तेमाल की जा सके। नीता ने रात में ही कपड़े का इंतजाम किया और उनकी टीम ने सुबह तक दो साड़ियां तैयार कर दीं।
इस तरह ‘देवदास’ का जादू सिर्फ ऐश्वर्या की खूबसूरती या भंसाली के भव्य सेट से नहीं बना था। उसके पीछे कॉस्ट्यूम डिजाइन, कपड़े की लंबाई और एक-एक दृश्य को पर्दे पर प्रभावशाली बनाने की लंबी तैयारी भी शामिल थी।
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