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मनोरंजन डेस्क, नई दिल्ली। वेटरन एक्टर अनंत नाग को इस साल दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। इसके बाद उन्होंने अपना खुशी जाहिर करते हुए कहा कि फिल्मों से नेपोटिज्म हटाने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है।
अवॉर्ड के लिए अनंत नाग के नाम की अनाउंसमेंट साल 2024 में की गई थी। यह अवॉर्ड सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। उन्हें 22 सितंबर को गुजरात के केवड़िया में नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स समारोह में यह अवॉर्ड दिया जाएगा।
बुधवार को अवॉर्ड मिलने के बाद एक्टर ने PTI से कहा- यह एक बहुत खास कैटेगरी थी। इसमें भाई-भतीजावाद और पक्षपात जैसी चीजें भी शामिल थीं। लेकिन मोदी ने इसे बदल दिया। मोदी ही वह व्यक्ति थे जिन्होंने लोगों से कहा कि वे अपनी पसंद के नाम का सुझाव दें। यह पहली बार था जब उन्होंने इस प्रोसेस को सबके सामने रखा।
एक्टर ने कहा कि उन्हें दादा साहब फाल्के अवॉर्ड मिलने की उम्मीद नहीं थी। वह अभी भी इस सम्मान को महसूस करने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह अवॉर्ड अपने राज्य कर्नाटक के लोगों को समर्पित किया। कहा- मुझे सच में उम्मीद नहीं थी कि मुझे यह फाल्के अवॉर्ड मिलेगा। इसलिए, मैं अभी भी इस बात को समझने और महसूस करने की कोशिश कर रहा हूं। मैं इसे कर्नाटक के लोगों को समर्पित करूंगा और साथ ही हमारे प्यारे प्रधानमंत्री श्री मोदी का भी शुक्रिया अदा करूंगा। उन्होंने ट्वीट करके इस अवॉर्ड की घोषणा की थी। इसलिए मैं उनका और इस देश का आभारी हूं जिसने मुझे यह मौका दिया।
हालांकि, अनंत नाग ने अभी यह कंफर्म नहीं किया है कि वह दिल्ली में होने वाले अवॉर्ड समारोह में शामिल होंगे या नहीं। उन्होंने इस बारेमें बात करते हुए कहा- अगर मुझसे कहा जाए, तो मैं मना नहीं कर सकता। जब उन्होंने मुझे इतना बड़ा अवॉर्ड दिया है, तो मुझे वहां जाकर उसे लेना चाहिए।
अनंत नाग एक थिएटर आर्टिस्ट, डायरेक्टर और एक्टर हैं। उन्होंने अपने 5 दशक के करियर में करियर में 250 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। उनकी अधिकतर फिल्में कन्नड़ भाषा में रही हैं, लेकिन उन्होंने कई मशहूर हिंदी फिल्मों में भी काम किया है। 78 साल के अनंत नाग थिएटर की दुनिया के भी जाने-माने कलाकार हैं।
अनंत नाग ने 1960 के दशक में कोंकणी, हिंदी और मराठी नाटकों में एक्टिंग करना शुरू किया। लगभग पांच साल तक इसमें एक्टिव रहे। इस दौरान वे सत्यदेव दुबे, गिरीश कर्नाड और अमोल पालेकर जैसी थिएटर की मशहूर हस्तियों के संपर्क में आए। उन्होंने 1973 में कन्नड़ फिल्म 'संकल्प' से सिनेमा में कदम रखा। धीरे-धीरे 1970 और 1980 के दशक में 'अंकुर', 'निशांत', 'मंथन', 'भूमिका', 'कलयुग' और 'गहराई' जैसी फिल्मों में काम करके पैरेलल सिनेमा (समानांतर सिनेमा) आंदोलन का अहम हिस्सा बन गए।
वे दूरदर्शन के मशहूर सीरियल 'मालगुडी डेज' का भी हिस्सा थे। यह सीरियल आर. के. नारायण की रचनाओं पर आधारित था और इसे उनके फिल्मकार भाई शंकर नाग ने डायरेक्ट किया था।
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