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नियति का अजब संयोग... जिस उम्र, दिन और अस्पताल में लता दीदी ने तोड़ा था दम, वहीं से विदा हुईं आशा ताई

स्वर साम्राज्ञी आशा भोसले (Asha Bhosle) अब हमारे बीच नहीं रहीं। 12 अप्रैल 2026 की उस मनहूस दोपहर ने संगीत प्रेमियों के कानों में एक ऐसा सन्नाटा भर दिय...और पढ़ें

By Dheeraj BelwalEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 12 Apr 2026 03:08:12 PM (IST)Updated Date: Sun, 12 Apr 2026 04:19:58 PM (IST)
नियति का अजब संयोग... जिस उम्र, दिन और अस्पताल में लता दीदी ने तोड़ा था दम, वहीं से विदा हुईं आशा ताई
शून्य में खो गई सात सुरों की जादुई किरण।

HighLights

  1. शून्य में खो गई सात सुरों की जादुई किरण
  2. 92 साल की उम्र में आशा भोसले का निधन
  3. अपनी रूहानी आवाज छोड़ गईं आशा ताई

एंटरटेनमेंट डेस्क। भारतीय संगीत के आकाश से आज एक ऐसी धवल और सुरीली किरण ओझल हो गई, जिसकी चमक ने सात दशकों तक सात सुरों को रोशन किया था। स्वर साम्राज्ञी आशा भोसले (Asha Bhosle) अब हमारे बीच नहीं रहीं। 12 अप्रैल 2026 की उस मनहूस दोपहर ने संगीत प्रेमियों के कानों में एक ऐसा सन्नाटा भर दिया है, जिसे भरने के लिए अब कोई दूसरी आवाज नहीं होगी। 92 वर्ष की आयु में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली।

आशा ताई का जाना केवल एक गायिका का जाना नहीं है, बल्कि उस चंचल, बहुमुखी और जादुई आवाज के अध्याय का अंत है, जिसने शास्त्रीय संगीत से लेकर क्लब डांस नंबर्स तक को अपनी रूह से सींचा था।

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दिन रविवार, उम्र 92 साल और ब्रीच कैंडी अस्पताल

कुदरत के खेल भी बड़े निराले और अक्सर हैरान कर देने वाले होते हैं। आशा भोसले के निधन की खबर के साथ ही एक ऐसा गजब का संयोग उभरकर सामने आया है, जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। इसे नियति का संकेत कहें या दो बहनों के बीच का अटूट आत्मिक बंधन आशा ताई और उनकी बड़ी बहन भारत रत्न लता मंगेशकर के प्रस्थान में एक अद्भुत समानता दिखी है।


गजब का संयोग

  • अस्पताल: दोनों बहनों ने मुंबई के 'ब्रीच कैंडी अस्पताल' में ही अपनी अंतिम सांसें लीं।
  • आयु: लता दीदी का निधन भी 92 वर्ष की आयु में हुआ था और आशा ताई ने भी इसी पड़ाव पर दुनिया को अलविदा कहा।
  • दिन: दोनों ही महान हस्तियों के निधन का दिन 'रविवार' रहा।

ऐसा लगता है मानो सुरों की ये दो देवियां, जिन्होंने मंगेशकर परिवार का नाम दुनिया के कोने-कोने में गुंजायमान किया, उन्होंने स्वर्ग की यात्रा के लिए भी एक ही मार्ग और एक ही मुहूर्त चुना।

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वह आवाज जो कभी बूढ़ी नहीं हुई

आशा भोसले की सबसे बड़ी खूबी उनकी आवाज़ की अमर जवानी थी। जहाँ लता मंगेशकर की आवाज़ में गंगा की पवित्रता और ठहराव था, वहीं आशा ताई की आवाज़ में किसी पहाड़ी झरने सी चंचलता और समंदर सी गहराई थी। उन्होंने महलों की बंदिशों को भी गाया और गलियों की शोखी को भी। 'दम मारो दम' की मादकता हो या 'इन आंखों की मस्ती' का ठहराव, उन्होंने हर सुर को अपना बना लिया।

संगीत जगत के जानकारों का कहना है कि आशा ताई ने संघर्ष को अपना आभूषण बनाया। अपनी बड़ी बहन की विशाल छाया के बावजूद उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई। उन्होंने सिखाया कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती, वह अपना रास्ता खुद बना लेती है।

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संगीत के एक युग का सूर्यास्त

आशा ताई के जाने से भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग की अंतिम कड़ी टूट गई है। उन्होंने 20 से अधिक भाषाओं में हजारों गाने गाकर गिनीज बुक में अपना नाम दर्ज कराया। उनके निधन से न केवल बॉलीवुड बल्कि विश्व संगीत जगत शोक में डूबा है।

आज ब्रीच कैंडी अस्पताल के बाहर जो भीड़ जुटी है, वह केवल प्रशंसकों की नहीं है, बल्कि उन लोगों की है जिन्होंने आशा ताई के गीतों में अपनी मोहब्बत तलाशी, अपनी तन्हाइयां साझा कीं और अपनी खुशियां मनाईं।

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ब्रीच कैंडी अस्पताल के उसी गलियारे ने आज फिर एक इतिहास को विदा किया है। 92 साल का वह सुरीला सफर, जो रविवार के सूरज के साथ ओझल हो गया, अब सिर्फ हमारी स्मृतियों और ग्रामोफोन के रिकॉर्ड्स में ज़िंदा रहेगा। आशा ताई, आपकी आवाज़ की खनक और वह चंचल मुस्कान हमेशा यह याद दिलाती रहेगी कि- 'चुरा लिया है तुमने जो दिल को, नज़र नहीं चुराना...' क्योंकि आपकी यादों से नजरें चुराना अब मुमकिन नहीं।