मनोज दुबे, नई दिल्ली। महाराष्ट्र के सांगली की एक शांत सुबह थी, जब 8 सितंबर 1933 को एक नन्ही बच्ची ने जन्म लिया। उसका नाम रखा गया आशा भोसले। घर में सुरों की गूंज थी, क्योंकि उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर खुद एक प्रतिष्ठित गायक थे। छोटी-सी आशा के लिए दुनिया संगीत से भरी हुई थी। हर दिन, हर पल संगीत से भरा माहौल।
लेकिन यह सुख ज्यादा दिन नहीं टिक पाया। जब आशा सिर्फ 9 साल की थीं, तभी उनके पिता का साया उनके सिर से उठ गया। घर में सन्नाटा छा गया और जिम्मेदारियों का बोझ अचानक बहुत भारी हो गया।
और दोनों बहनें अपनी आवाज से घर का चूल्हा जलाने लगीं
तब उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर ने उनका हाथ थामा। दोनों बहनों ने मिलकर फैसला किया कि अब गाना सिर्फ शौक नहीं, बल्कि जरूरत है। छोटी-सी उम्र में ही वे मंच पर उतरीं और अपनी आवाज से घर का चूल्हा जलाने लगीं।
समय बीतता गया, लेकिन जिंदगी ने आशा की परीक्षा लेना नहीं छोड़ा। महज 16 साल की उम्र में उन्होंने गणपतराव भोसले से शादी कर ली। यह फैसला उनके परिवार को मंजूर नहीं था और रिश्तों में दूरियां आ गईं।
आशा ताई की शादीशुदा जिंदगी भी आसान नहीं थी
शादीशुदा जिंदगी भी आसान नहीं थी। पति का कठोर व्यवहार, मानसिक और शारीरिक पीड़ा… जैसे हर दिन एक नई चुनौती हो। आखिरकार, उन्होंने उस रिश्ते से बाहर निकलने का साहस दिखाया और अपने बच्चों के साथ नई शुरुआत की। अकेले ही उन्होंने मां और पिता दोनों की जिम्मेदारी निभाई।
इसी दौरान उनकी मुलाकात संगीतकार आर. डी बर्मन से हुई, जिनके साथ उन्होंने जीवन का नया अध्याय शुरू किया। एक ऐसा अध्याय, जिसमें दर्द भी था और संगीत का जादू भी।
बेटी वर्षा का जाना और फिर बेटे हेमंत की मौत
लेकिन आशा ताई की जिंदगी की कठिनाइयां यहीं खत्म नहीं हुईं। साल 2012 में उनकी बेटी वर्षा भोसले का जाना और फिर 2015 में बेटे हेमंत भोसले की मौत...ये ऐसे घाव थे, जो शायद कभी पूरी तरह भर नहीं सकते। फिर भी, आशा ने अपने टूटे हुए दिल को अपनी आवाज में पिरो दिया।
हर गीत में उनकी जिंदगी की कहानी छुपी थी
उन्होंने 12,000 से ज्यादा गाने गाए। हर गीत में उनकी जिंदगी की कहानी छुपी थी। दर्द, प्यार, जिद और उम्मीद… सब कुछ उनकी आवाज में सुनाई देता था। और फिर एक दिन, 92 साल की उम्र में, सुरों की यह मल्लिका चुप हो गईं।
लेकिन उनकी आवाज… वह आज भी गूंजती है। हर उस दिल में, जो संगीत को महसूस करता है। आशा भोसले सिर्फ एक नाम नहीं थीं, वे एक कहानी थीं संघर्ष की, साहस की और उस जादू की.. जो कभी खत्म नहीं होता।