
मनोरंजन डेस्क, नई दिल्ली। बॉलीवुड में त्योहारों का फिल्मों से रिश्ता कोई नया नहीं है। कभी करवा चौथ फिल्मों की कहानी का हिस्सा बना, तो कभी होली और दिवाली ने पर्दे पर रोमांस और परिवार की कहानी को रंग दिया। लेकिन अब हिंदी सिनेमा का कैमरा देश के उन त्योहारों और परंपराओं की ओर भी घूम रहा है, जो लंबे समय तक फिल्मों में सिर्फ छोटे-छोटे दृश्यों तक सीमित रहे।
इसी कड़ी में बिहार की लोक-संस्कृति और छठ पूजा से जुड़े दृश्य भी बड़े बजट की फिल्मों में नजर आने लगे हैं। हाल की फिल्मों के सेट और प्रमोशनल झलकियां संकेत देती हैं कि मेकर्स अब सिर्फ मुंबई की शहरी दुनिया नहीं, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों की जड़ों को भी अपनी कहानियों का हिस्सा बना रहे हैं।
Ye Prem Mol Liya में आयुष्मान खुराना और शरवरी वाघ की जोड़ी नजर आएगी। फिल्म का डायरेक्शन सूरज बड़जात्या कर रहे हैं। इसे राजश्री प्रोडक्शंस के बैनर तले प्रोड्यूस किया जा रहा है।
फिल्म की शूटिंग पूरी होने के बाद सामने आई तस्वीरों में आयुष्मान और शरवरी को इंडियन अटायर में घाट जैसे माहौल में देखा गया। सेट की इन तस्वीरों ने फिल्म के देसी और पारिवारिक टोन की ओर इशारा किया है। फिल्म 27 नवंबर 2026 को थिएटर्स में आने वाली है। यानी बड़जात्या की फिल्मों में जिस तरह परिवार, रिश्ते और भारतीय परंपराएं अहम रहती हैं, इस बार भी कहानी में भारतीय संस्कृति की ऐसी ही झलक देखने को मिल सकती है।
दूसरी ओर ‘द व्वान- द फोर्स ऑफ फॉरेस्ट’ बिल्कुल अलग दुनिया लेकर आ रही है। सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया स्टारर यह फिल्म लोककथा, रहस्य, जंगल और सुपरनेचुरल एलिमेंट्स को जोड़ती है।
हाल ही में इसका टीजर भी रिलीज हुआ है। इसमें तमन्ना का किरदार पूजा करता हुआ दिखाई देता है। फिल्म की कहानी एक ऐसे रहस्यमयी जंगल के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे लेकर स्थानीय मान्यताएं और एक प्राचीन शक्ति जुड़ी हुई है। फिल्म 25 सितंबर 2026 को रिलीज होगी।
हालांकि टीजर में दिख रही पूजा को अभी आधिकारिक तौर पर छठ पूजा नहीं बताया गया है, लेकिन फिल्म का लोक-संस्कृति और ग्रामीण परंपराओं से जुड़ा संसार जरूर इसे खास बनाता है।
छठ सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा यह पर्व लोकगीतों, घाटों, प्रसाद, पारिवारिक परंपराओं और सामूहिक आस्था का हिस्सा है। शायद यही वजह है कि फिल्ममेकर्स के लिए यह सिर्फ एक पूजा का दृश्य नहीं, बल्कि कहानी को जमीन और पहचान देने वाला विज्युअल वर्ल्ड भी बन सकता है।
एक तरफ घाट पर डूबते सूरज को अर्घ्य देता परिवार, दूसरी तरफ लोकगीत और पारंपरिक परिधान—बड़े पर्दे पर ये दृश्य कहानी को सिर्फ खूबसूरत नहीं बनाते, बल्कि उसके किरदारों की जड़ों के बारे में भी बताते हैं।