
एंटरटेनमेंट डेस्क। बड़े अपराधों के रोमांच और चार दोस्तों की दोस्ती को साथ लेकर आई यह सीरीज ‘चार यार’ अपनी हाई स्पीड स्टोरी, अचानक आने वाले ट्विस्ट और 2000 के शुरुआती दौर के मुंबई को दिखाने के अंदाज की वजह से दर्शकों को खूब पसंद आ रही है।
ऐसे में इस सीरीज की तुलना राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘सत्या’ और ‘कंपनी’ की क्राइम की दुनिया से की जा रही है, वहीं इसकी कार चोरी की कहानी और कुछ कर दिखाने का जुनून ‘धूम’ और ‘बदमाश कंपनी’ की याद दिलाता है।
धोखा, चोरी, रोमांच और दोस्ती के मेल के साथ यह सीरीज क्राइम-ड्रामा की दुनिया में अपना अलग अंदाज लेकर आई है। एक दर्शक ने इसकी तारीफ करते हुए कहा , “क्या शानदार सीरीज है! इसमें दोस्ती, मस्ती और एक बेहतरीन कहानी का ऐसा मेल है, जो दिल और दिमाग दोनों को छू लेता है।”
क्रिटिक्स ने भी इस सीरीज की तारीफ की है और इसे मजेदार, तेज रफ्तार और दोस्ती पर बनी एक डार्क कहानी बताया है। इसकी कहानी में कई ऐसे मोड़ आते हैं, जिनका अंदाजा लगाना मुश्किल है।
साथ ही, सीरीज का माहौल भी दर्शकों को पसंद आ रहा है। क्राइम और एक्शन के साथ यह सीरीज 2000 के दशक के मुंबई की यादें भी ताजा करती है। इसमें चार युवा लड़कों की दोस्ती और उनके सपनों की कहानी दिखाई गई है, जहां उनके हर फैसले का असर उनकी जिंदगी पर पड़ता है।
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2000 के शुरुआती दौर के मुंबई की हलचल और अपराध की दुनिया के बीच बनी ‘चार यार’ की कहानी चार दोस्तों जय (प्रयारक मेहता), टोनी (साकिब अयूब), साहिल (पुरव झा) और समीर (नमन जैन) के इर्द-गिर्द घूमती है।
चारों दोस्त अपनी परेशानियों से जूझ रहे हैं और बेहतर जिंदगी के सपने देखते हैं, लेकिन उनका एक फैसला उन्हें अपराध, गैंगस्टर्स और पुलिस से बचकर भागने की खतरनाक दुनिया में ले जाता है।
विनय वैकुल के डायरेक्शन में बनी इस सीरीज को संबित मिश्रा और सौरभ सावंत ने लिखा है। इसके आठों एपिसोड अब सिर्फ प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो रहे हैं।