
मनोरंजन डेस्क। बॉलीवुड के किंग खान यानी शाहरुख खान आज दुनिया भर में रोमांस के बादशाह के नाम से पहचाने जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शाहरुख खान कभी रोमांटिक हीरो बनना ही नहीं चाहते थे? उन्हें लगता था कि वह पर्दे पर विलेन के किरदारों के लिए ज्यादा बेहतर हैं। यही वजह थी कि अपने शुरुआती करियर में उन्होंने ‘बाजीगर’, ‘डर’ और ‘अंजाम’ जैसी फिल्मों में नेगेटिव किरदार निभाए। लेकिन फिर उनकी जिंदगी में एक ऐसा वाकया हुआ, जिसने उनके करियर की दिशा बदल दी।
शाहरुख खान ने साल 1992 में फिल्म ‘दीवाना’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। इसके बाद ‘बाजीगर’, ‘डर’ और ‘अंजाम’ जैसी फिल्मों में उनके नेगेटिव रोल ने खूब सुर्खियां बटोरीं। उस दौर में शाहरुख को लगता था कि वह पारंपरिक हीरो जैसे नहीं दिखते। उन्हें यह भी लगता था कि रोमांटिक फिल्मों के लिए जिस तरह के चेहरे की जरूरत होती है, वह उनके पास नहीं है।
इसी बीच यश राज फिल्म्स के मालिक आदित्य चोपड़ा ने उन्हें अपनी फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ की कहानी सुनाई। लेकिन शाहरुख इस फिल्म को लेकर बहुत उत्साहित नहीं थे। उन्हें एक्शन फिल्में करना पसंद था और वह खुद को रोमांटिक हीरो के रूप में देखने की कल्पना भी नहीं कर पा रहे थे।
आदित्य चोपड़ा ने शाहरुख को फिल्म के लिए मनाने की कोशिश जारी रखी। इसी दौरान फिल्म ‘त्रिमूर्ति’ की शूटिंग चल रही थी। आदित्य चोपड़ा ने एक इंटरव्यू में बताया था कि इसी शूटिंग के दौरान करीब 80 साल की एक महिला शाहरुख के पास आईं।
महिला ने उनकी एक्टिंग की तारीफ की, लेकिन साथ ही एक ऐसी बात कह दी, जिसने शाहरुख को सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि आप बहुत अच्छी एक्टिंग करते हैं, लेकिन आपकी फिल्मों में आप हमेशा लड़ते रहते हैं और आखिर में मर जाते हैं।
यह बात शाहरुख के दिल को छू गई। आदित्य चोपड़ा ने भी इसी मौके को समझते हुए उनसे दोबारा रोमांटिक फिल्म करने की बात कही। उन्होंने शाहरुख को समझाया कि अगर उन्हें सुपरस्टार बनना है, तो उन्हें ऐसी प्रेम कहानी का हिस्सा भी बनना होगा, जिससे हर उम्र और हर वर्ग का दर्शक जुड़ सके।
आखिरकार शाहरुख खान ने आदित्य चोपड़ा की बात मान ली और ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ के लिए हामी भर दी। साल 1995 में रिलीज हुई इस फिल्म में उन्होंने राज मल्होत्रा का किरदार निभाया। काजोल के साथ उनकी जोड़ी दर्शकों को इतनी पसंद आई कि यह फिल्म हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार प्रेम कहानियों में शामिल हो गई।
इसके बाद शाहरुख ने ‘दिल तो पागल है’, ‘कुछ कुछ होता है’, ‘मोहब्बतें’, ‘वीर-जारा’ और ‘कल हो ना हो’ जैसी फिल्मों से रोमांस की एक अलग पहचान बनाई।
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